માતૃભારતી પર રાકેશ ઠક્કરની ૪૮ પ્રકરણ સુધી ચાલેલી નવલકથા રેડલાઇટ બંગલોના ૧.૮૫ લાખથી વધુ ડાઉનલોડ થઇ ચૂક્યા છે ત્યારે નવી નવલકથા "લાઇમ લાઇટ" ને આથી વધુ પસંદ કરવામાં આવી છે. એક રહસ્યમય રૂપાળી યુવતીના હીરોઇન બનવાના સંઘર્ષ સાથે ફિલ્મી દુનિયાના અંધારાં-અજવાળાંની વાતો કરતી અને આ ક્ષેત્રના રાજકારણ, કાવા-દાવા, હવસ, પ્રેમ અને ઝગમગાટને આવરી લેતી આ નવલકથા સંપૂર્ણ કાલ્પનિક છે. અને કોઇ રોમાંચક, દિલધડક, રહસ્યમય ફિલ્મની જેમ તમને જકડી રાખશે એવી ખાતરી છે.

एक जरा सी दुनिया घर की
लेकिन चीजें दुनिया भर की
फिर वो ही बारिश का मौसम
खस्ता हालत फिर छप्पर की
रोज सवेरे लिख लेता है
चेहरे पर दुनिया बाहर की
पापा घर मत लेकर आना
रात गये बातें दफ्तर की
बाहर धूप खड़ी है कब से
खिड़की खोलो अपने घर की
विज्ञान व्रत

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धीरे— धीरे भीग रही हैं सारी ईंटें पानी में
इनको क्या मालूम कि आगे चल कर इनका क्या होगा

आईना भी हैरानी में डूबा है
इतना कैसे रोज़ बदल जाता हूँ मैं।भारतभूषण पंत

*"मन" बड़ा चमत्कारी शब्द है,*
*इसके आगे "न" लगाने पर यह "नमन" हो जाता है..!*
*और पीछे "न" लगाने पर "मनन" हो जाता है..!*
*जीवन में "नमन" और "मनन" करते चलिए..!*
*जीवन "सफल" ही नहीं "सार्थक" भी हो जायेगा..!!*

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मुझसे जल्दी हार कर मेरा हरीफ़
जीतने का लुत्फ़ सारा ले गया
हस्तीमल 'हस्ती'

ईमानदारी बोलती है
उसे अलग से
ज़बान की ज़रूरत नहीं होती
कवि‍ता अपना काम करती है
उसे अलग से
तीर-कमान की जरूरत नहीं होती 
डी. एम. मिश्र

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उधर आकाश था ऊँचा, इधर गहरा समंदर था
हमारे पास टकराने को उनसे एक ही सर था

यह कहावत है पुरानी मन के जीते, जीत हो
आदमी का मन न हारा तो बहुत कुछ शेष है
 डी. एम. मिश्र

जिसे कोई आसक्ति न हो मैं उस फ़क़ीर से डरता हूँ
किसी और से नहीं मगर अपने ज़मीर से डरता हूँ

हम ग़जल अपने लिए कम ही लिखे
 ग़म से यारी हो गयी ग़म ही लिखे।