केम छो. नमसते, राम राम, अस्सलामु वालेकुम, केम ना छो. सश्रिया काल. मित्रो हम है आपके प्यारे से लेकख महोदय श्री मेहुल पसाया. और मे इंडिया, गुजरात, दाहोद से बिलोंग करते है. और मेरे इस डेस्क पर आपको कई तरह की रचना मिल जायेगी बस पढ्ने के लिये मेरे साथ जुडे रहे. और हमारा ऐसे ही उत्साह बढ़ाते रहे. ताकी हम वैसी ही रचनाये/नॉवेल्स लाये जैसे आपको पसंद है. और उमीद करेंगे मेरि ये सारी रचनाये/नॉवेल आपको पसंद आये. आप सभी के लिये मेरि तरफ से कुच ये जानकारी दी जो की जरुरी थी.

जय श्री कृष्णा 🙏

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राधे राधे

-Mehul Pasaya

[दिल की जुबां पे]

हर दिन एक नई आश मिलती है

हर वक़्त पर एक मुकाम भी मिलता है

लेकिन उन हर वक्तो में हर दिनों में कई बार निराशा भी मिलती।

#मेहुल_पसाया

#Deshbhakti

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😇😘💞💔☹️

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😍

😍लव😍