लिखने का शौक हैं ,तो लिख भी लेते हैं,,बंद पडी़ किताबो से धूल हटा कर कभी कभी पड़ लेते हैं,,हमें नहीं पता की हमे क्या चाहिए,जो ईश़्वर दे दे वहीं कुबूल कर लेते हैं,,एक छोटी सी बस कोशिश हैं और जिन्दगी को अपनी आज़मा लेते हैं,,

बचाने में लगे रहे हम हर समय घर अपना दीमकों से।
और कुछ कीडे़ कुर्सी वाले पूरा देश खा गए।।
@सीमा कपूर🖊

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क्या चाहते हैं हम/शायद खुद भी नहीं जानते हैं हम/
तभी तो भागते-भागते थक जाते हैं हम!!
सीमा कपूर.....

हाय, मातृभारती पर इस कहानी 'क्या स्त्री होना गुनाह हैं' पढ़ें
https://www.matrubharti.com/book/19877805/kya-stree-hona-gunah-hai