लिखने का शौक हैं ,तो लिख भी लेते हैं,,बंद पडी़ किताबो से धूल हटा कर कभी कभी पड़ लेते हैं,,हमें नहीं पता की हमे क्या चाहिए,जो ईश़्वर दे दे वहीं कुबूल कर लेते हैं,,एक छोटी सी बस कोशिश हैं और जिन्दगी को अपनी आज़मा लेते हैं,,

बहुत 🥺 तकलीफ़ होती है,
जब तू कहता है कि तू भाड़ में जा__

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चल आज जिन्दगी से लिपटते हैं,
जो तुमको जलाने की कोशिश करते हैं,
उन्हें ignore करते हैं।

-अंदाज़ ए सफ़र

'शेर बनो गीदड़ बनने में क्या रखा है'

जो भोंके भी कभी पीठ पीछे
उसकी औकात वक़्त आने पर
दिखाना ही अच्छा है!!

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