मैं एक प्राइमरी अध्यापिका हूं l मैं दिल्ली में रहती हूंl शुरू से ही पढ़ने, पढ़ाने में मेरी रूचि रही है l अपने मन के भावों को कविता, कहानी का रूप देने का यह मेरा छोटा सा प्रयास हैl आप सभी मेरी रचनाओं को पढ़ मेरा मार्गदर्शन करें, जिससे मेरी लेखनी को सही दिशा मिल सकेl

फूलों संग कांटे भी मंजूर है मुझे
जिंदगी तेरा हर रंग कबूल है मुझे।
सरोज ✍️

-Saroj Prajapati

सुना है ! तंग है ये इश्क की गली
फिर भी हर कोई इससे क्यों गुजरता है
दर्द और रुसवाइयां मिलती है इन गलियों में
फिर भी खुशी खुशी हर कोई क्यों जहर ये चखता है।

-Saroj Prajapati

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उम्र के अंक अब बढ़ने लगे हैं
ख्वाहिशों के कद कुछ घटने लगे हैं
जिंदगी की इस भागदौड़ से
अब मैं थककर हो गई हूं चूर
भर ले मां, मुझे अपने अंक में तू
सहला मुझे फिर उसी प्यार से तू
तेरे स्पर्श मात्र से मिट जाएंगी
मेरी सब दुख तकलीफ और चिंताए
बचपन की तरह सो सकूंगी मैं
तेरे अंक में,निश्चित हो आराम से।।
सरोज ✍️

-Saroj Prajapati

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आकर तेरी बाहों के दरम्यान , पूरे हुए दिल के सभी अरमां।।

-Saroj Prajapati

ब्याही बेटियों पर मां की ममता
कुछ यूं बरसती है.........................
इतने दिनों बाद तो आती हो, आते ही
क्यों जाने की इतनी जल्दी दिखलाती हो
अपनी सेहत का क्यों नहीं रखती ध्यान
देखो तो कितनी दुबली हुई जाती हो
मना करने के बाद भी मां प्यार से
हर बार एक रोटी ज्यादा खिलाती है
बिठा सबको साथ कितने चाव से
बचपन के कितने अनमोल किस्से सुनाती है
खोल अपनी संदूकची के पट मान
मनुहार से सूट साड़ियां छंटवाती है
माना बहुत कमाती है तू कहकर
हथेलियों में रख एक नोट वो मुस्काती है
विदाई की बेला में जल्दी आने का वादा ले
नम आंखों से गले लगा बेटियों पर
अपार स्नेह और ममता लुटाती है।
सरोज ✍️

-Saroj Prajapati

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आया कैसा कठिन ये दौर है
हर ओर दहशत का माहौल है
सांसों को मुनाफाखोरों ने खरीद लिया।
असमय कितनी ही जिंदगियों को
उनके लालच ने हाय! लील लिया।
खोदते हैं जो दूसरों के लिए गड्ढा
वो खुद ठोकर खा उसमें गिर जाएंगे।
तमाशा देख रहे हैं जो दूसरों की मौत का
एक दिन चंद सांसों के लिए वो भी गिड़गिड़ाएंगे।
माना दुख की रात है कुछ गहरी और लंबी
पर हमारे हौंसले और विश्वास के आगे
वो जल्द ही समेट अपनी कालिमा ढल जाएगी।
विश्वास की किरणों संग, हरने दुख संताप
करने जीवन में फिर से खुशियों का संचार
वो सुबह जरूर आएगी, वो सुबह जरूर आएगी।

-Saroj Prajapati

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जिंदगी होगी फिर से गुलजार, हम फिर मुस्कुराएंगे
थोड़ा सब्र रखो ऐ दोस्तों, कोरोना को दे मात
हम फिर से महफिलें सजाएंगे। ।

-Saroj Prajapati

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अभी बेवजह गली मोहल्ले में जाने से बचिए
अपनी बेइंतहा ख्वाहिशों पर थोड़ा लगाम कसिए
आपके ये छोटे छोटे कदम कोरोना पर करेंगे प्रहार
जिंदगी में फिर से होगा खुशियों का संचार।।

-Saroj Prajapati

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कहे कोरोना सुन पते की बात ऐ प्राणी

नहीं हुई है देर अभी भी तुम संभल जाओ।

अपनी बढ़ती बेफिजूल आवा-जाही

और लापरवाहियों पर थोड़ी लगाम लगाओ।

देर होने से पहले ही दो गज की बना के दूरी

चेहरे पर अपने भली-भांति मास्क लगाओ।

यारी दोस्ती निभाने का भी समय आएगा

अभी दूर से हाथ जोड़ दुआ सलाम करो।

चाहते हो बना रहे गर तेरा साया तेरे साथ अभी

बरतो एहतियात और घर पर ही विश्राम करो।
सरोज ✍️

-Saroj Prajapati

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समुद्र की गहराइयों से गहरा है प्यार मेरा
क्या कभी दिल की गहराइयों से तुम भी मुझे चाहोगे।

दिन रात करते हैं हम तेरी इबादत
क्या कभी मेरे सजदे में तुम भी झुक पाओगे।

मेरा कतरा कतरा डूबा है तेरे इश्क में
क्या कभी मेरे प्यार में तुम भी यूं डूब पाओगे।

बिन कहे पढ़ लेते हैं तेरे दिल के हर जज्बात
क्या कभी मेरी आंखों की भाषा तुम भी पढ़ पाओगे।
सरोज ✍️

-Saroj Prajapati

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