Hey, I am on Matrubharti!

इतनी सी तू नज़रें इनायत ‌कर दे
दिल में थोड़ी सी अपनी जगह दे दे।

वादा है ना हम वहां घर बसाएंगे
ना कभी तेरी रातों की नींदें ही चुराएंगे।

है दिल में तेरे जो एक छोटा सा दरींचा
उससे आने जाने की बस मुझको इजाजत दे दे।

ना करेंगे जमाने में कभी तेरी रुसवाई
कर दूर से दीदार तेरा, दिल को हम समझाएंगे।।

सरोज ✍️

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दूसरों की नजरों में अपने लिए इज्जत देखना चाहते हो तो
अपनी नज़र व नज़रिया
हमेशा साफ रखें।
सरोज ✍️

हमने चाहा तुझे शिद्दत से
पर तूने मेरी वफ़ा की
कभी कदर ना जानी।
सीने में छुपा के दर्द सभी
भीड़ में भी तन्हा सी बीत रही है अब
ये जिंदगानी।।
सरोज ✍️

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मेरे भोले की है महिमा अपरम्पार।
पीकर स्वयं हलाहल
भक्तों को देते अमृत , जीवन वरदान।।
🙏सरोज 🙏

जिसे सुन कानों में घुलती मिश्री सी मिठास
ऐसी है मेरी मातृभाषा हिंदी की शान।

छोटे बड़ों को देती है सम्मान
ऐसी है मेरी मातृभाषा हिंदी महान।।

परायो को भी देती अपनेपन का एहसास
ऐसी है मेरी मातृभाषा हिंदी महान।।

दिल की हर धड़कन को देती शब्दों में ढाल,
ऐसी है मेरी मातृभाषा हिंदी महान।।

दिलों को जोड़ने का करती सेतु सा काम,
ऐसी है मेरी मातृभाषा हिंदी महान।।

सरोज

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दुनिया तेरी रीत निराली
चेहरे पर चढ़ा झूठे मुखौटे
जी रही यहां दुनिया सारी।।
दुनिया तेरी रीत निराली!

भावों का यहां मोल नहीं
दिखावों में बीत रही है जिंदगानी।
दुनिया तेरी रीत निराली!

ईमानदारी को दिखा के ठेंगा
जीत रही है यहां मक्कारी।
दुनिया तेरी रीत निराली!
सरोज ✍️

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आज है वहीं दिन, वही वार
अपनी डायरी में, तेरे लिए
दिल में उमड़ते,अनेक जज़्बातों में
भिगो छुपाकर रखा था
वो प्यारा सा लाल गुलाब।
सोचा था, देकर तुम्हें ये प्यार की निशानी
हाल ए दिल सुनाएंगे।
मेरी हया कहो या तेरी नासमझी
हम कह ना सके, तुम कभी समझ ना पाए
दिल में ही दफ़न हो गए, वो अनकहे जज़्बात
डायरी में हो कैद,सूख गया वो लाल गुलाब।।
सरोज ✍️

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लिव-इन रिलेशनशिप (लेख)

अति स्वतंत्रता, विकृत मानसिकता व उच्छृंखला का घिनौना रूप लिव इन रिलेशनशिप है। हमारे युवा विदेशों का अनुसरण करते हुए यह भूल जाते हैं कि पाश्चात्य संस्कृति के लोग धीरे-धीरे भारतीय संस्कृति को अपना रहे हैं। वह लोग जिन चीजों का त्याग करते हैं, हम उन्हीं चीजों को बिना सोचे समझे झपटने की कोशिश करते हैं। उदाहरणार्थ एकल परिवार , फास्ट फूड, छोटे कपड़े, प्लास्टिक आदि।
विवाह संस्था हमारे देश की पहचान है। यह कोई बंधन नहीं है अपितु समाज, परिजनों के आशीर्वाद से एक दूसरे के भावनाओं को समझ, प्यार विश्वास, त्याग समर्पण से परिपूर्ण बहुत ही प्यारा नाता है। यह केवल लड़का लड़की तक ही सीमित नहीं अपितु उनके परिवारों को भी आपस में जोड़ उनके प्रति भी जिम्मेदारी का एहसास कराता है।
इसके विपरीत लिव इन रिलेशनशिप में साथ रहकर भी लड़का-लड़की एक दूसरे से दिल से कभी जुड़ नहीं पाते और ना ही एक दूसरों की भावनाओं को समझ पाते क्योंकि उनका रिश्ता प्यार पर नहीं करार पर टिका है । यह एक उपभोक्तावादी संबंध है। जिसमें एक दूसरे को उपभोग की वस्तु समझा जाता है। जिसका आधार पहले इस्तेमाल करें, फिर विश्वास करें है!अगर समझ ना आए तो छोड़ दे ।
यह विश्वास शायद ही इन दोनों के मध्य कभी पनप पाए। जिम्मेदारियों से भागने का दूसरा नाम लिव इन रिलेशनशिप है।
सरोज ✍️

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गुस्से में कहीं गई सही बात भी अपना महत्व खो देती है। सरोज ✍️