zinadgi khak na thi... khak udaate gujri....

मैं बेवकूफ़ सी बेपरवाह यूँही रहती हूं,
अपनी ही धुन में...
क्या फर्क पड़ता कुछ बाक़ी रह भी गया तो..
एक ना एक दिन तो सबकुछ रह ही जाएगा..
क़यामत के दिन तो हम होंगे ही सबसे आगे,
और ज़माना हमारे पीछे ही आएगा..
मैं इन बन्द किताबों का इतिहास नहीं बनना चाहती..
जो खुद एक ना एक दिन मिट ही जाएगा..
मैं वो पहली बारिश की सोंधी सी खुशबू होना चाहती हूं..
जिसे महसूस कर कोई मिट्टी खाने को तरस जाए..
मैं वो चंदन हो जाना चाहती हूं..
जिसकी महक हमेशा के लिए ज़हन में बस जाए..
मैं वो मिट्टी हो जाना चाहती हूं,
जहाँ मेरे महादेव बसते हों...🙏

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कोई जी रहा बस तेरे ख्याल से,
किसी का ख्याल तुझे भी सताएगा..
कितना ख़ुशनसीब होगा वो शख़्स,
जिसको तू यूँही मिल जाएगा..

-Sarita Sharma

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तेरी बनाई इस दुनियां में कोई तुझसा मिला नहीं,
मैं तो भटकता रहा दर-बदर कोई किनारा मिला नहीं...🙏

मिल जाएं कभी जो हम किसी मोड़ पर,
क्या फेर लोगे नज़रें तुम मुझे देखकर..
रिश्तों की दूरियों से जब रास्ते बदल दोगे,
जब भूलकर हमें तुम अपनी आदते बदल दोगे,
किसी रोज़ आईने में देखकर खुद को,
यूँही नज़रें मिलाकर क्या कह पाओगे खुद से?
झूठा ही सही पर..."हां प्यार था तुमसे"...

-Sarita Sharma

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हां वादे भी नहीं थे बातें नहीं थी..
ऐसा भी नहीं है कि मोहब्बत नहीं थी..
इज़हार था, इकरार था,
ऐतबार था, तक़रार था,
हजारों शिकायतों में बंद प्यार भी था,
दरम्यां तो सब था हमारे पर,
हमनवाई नहीं थी..
ऐसा भी नहीं है कि मोहब्बत नहीं थी..

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Sarita Sharma लिखित कहानी "ज़िन्दगी सतरंग.. - 4" मातृभारती पर पढ़ें
https://www.matrubharti.com/book/19913219/jindagi-satrang-4

टूटेंगे हर ख़्वाब जो सजाकर बैठे हो..
किसी से गर तुम भी दिल लगाकर बैठे हो..

-Sarita Sharma

Sarita Sharma लिखित कहानी "ज़िन्दगी सतरंग.. - 3" मातृभारती पर पढ़ें
https://www.matrubharti.com/book/19912256/jindagi-satrang-3

कितनी साज़िशें की होगी, एक तुझको पाने में,
मेरे नसीब में तू है भी? ये कौन जानता है..

-Sarita Sharma