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जनम तेरा बातों ही बीत गयो

जनम तेरा बातों ही बीत गयो, रे तुने कबहू ना कृष्ण कहो |

पाँच बरस को भोलो बालो, अब तो बीस भयो |
मकर पचीसी माया के कारन, देश विदेश गयो ||

तीस बरस की अब मति उपजी, लोभ बढ़े नित नयो |
माया जोड़ी लाख करोड़ी, अजहू न तृप्त भयो ||

वृद्ध भयो तब आलस उपज्यो, कफ नित कंठ नयो |
साधू संगति कबहू न किन्ही, बिरथा जनम गयो ||

यो जग सब मतलब को लोभी, झूठो ठाठ ठयो |
कहत कबीर समझ मन मूरख, तूं क्यूँ भूल गयो

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છે શક્તિ કેરો સાથ,જટા પર ગંગા બહે દિનરાત ,
ડાક ડમરુ ના ડમડમાટ,શંખ ના નાંદ કરે છે એક જ કે શિવ ને ભજો જીવ દિન-રાત

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आहीर को डुबोने वाली तीन 1 - दारु , 2 - दोगङ , 3 - दगा आहीर के लिये जरुरी तीन 1 - सँस्कार , 2 - महेनत , 3 - भाइचारा | | आहीरको प्रिय तीन 1 - न्याय , 2 - नमन , 3 - आदर आहीरको अप्रिय तीन 1 - अपमान , 2 - विश्वाशघात , 3 - अनादर ॥ आहीर को महान बनाने वाले तीन 1 - शरणागतरक्षक , 2 - दयालूता , 3 - परोपकार आहीर के लिये अब जरुरी तीन 1 - एकता , 2 - सँस्कार , 3 - धर्म पालन आहीर के लिये छोङने वाली तीन 1 - बुरी संगत , 2 - कुप्रथायें , 3 - आपसी मनमुटाव ॥ आहीर को जोङने वाली तीन 1 - गोरवशाली ईतिहास , 2 - परम्पराएँ , 3 - हमारे आदर्श . . .... 🙏Jai murlidhar🙏
🙏jay madhav🙏

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"જીતુદાદ ગઢવી | લોકડાયરો - લોક સાહિત્ય" માતૃભારતી વિશેષ પર જુઓ. https://www.matrubharti.com/vishesh/261/jitudad-gadhvi-lok-dayro-lok-sahitya/927