Author and Poet Insta-Krishna Katyayan Facebook-Krishnakatyayan

सब निःस्वार्थ हो,
फिर व्यापार कहाँ रहेगा?
ना उसका,
जो उपर बैठा,
ना उसका,
जो नीचे बैठा,
ना देह का व्यापार होगा,
ना आत्मा का व्यापार होगा,
बस आने जाने का चक्र होगा,
सब होगा निःस्वार्थ।

-Krishnakatyayan

Read More

सब निःस्वार्थ हो,
फिर व्यापार कहाँ रहेगा?
ना उसका,
जो उपर बैठा,
ना उसका,
जो नीचे बैठा,
ना देह का व्यापार होगा,
ना आत्मा का व्यापार होगा,
बस आने जाने का चक्र होगा,
पूरा होगा निःस्वार्थ।

-Krishnakatyayan

Read More

it's just a deja vu
or there is life out there?
wherein,
there is a dwelling light I see,
passing through several doors, opening and closing at the same time.

-Krishnakatyayan

dreaming something,
and getting in this life,
is not because of money,
or because of power you posses,
it's because,
you get courage to chase it.

-Krishnakatyayan

नारद बाहर नही है,
जो तुम्हारे अंदर द्वंद चलता है ना,
जो बार बार तुम्हे उद्देलित कर देता है,
वही नारद है।

-Krishnakatyayan

Read More

relationship is like,
I drive very deep sometimes,
it becomes very intensive,
and i enjoy a lot,
but after some time,
I just prefer to float on top,
without doing any effort,
and try to take some breathe
in fresh air,
you know,
swimming is not the only option,
floating too is available.
-Krishnakatyayan

Read More

मोह गया,
तो बैराग अपने आप आ जाता है,
मोह ही सब बंधनों का कारण है,
ईश्वर की जिसपे कृपा होती है,
वे उनके मोह को शीघ्र ही तोड़ते है,
जिससे वो जल्दी ही मुक्त हो,
और इस काम के लिए,
ईश्वर उनके अपनों से भी दुख दिलवा देते है।
-Krishnakatyayan

Read More

what's the biggest search?
it's food,
mankind spends more time on it,
rather knowledge or wisdom,
or any other things.

-Krishnakatyayan

पहले लिखो,
फिर उसे दुबारा लिखो,
फिर पाठक के हिसाब से और सुधारो,
फिर उसे मशहूर करने हेतु श्रम करो,
फिर दिन रात सफल होने के सपने देखो,
क्या इसलिए कलम पकड़े हो।

-Krishnakatyayan

Read More

दृष्टा और दृश्य एक ही तो है,
क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ एक ही तो है,
खेल और खिलाड़ी एक ही तो है,
लीला और लीलाधारी एक ही तो है,
अगर ये ज्ञान है तो दोनो बनकर चलते रहो,
अगर नही है,
तो भी चलना ही है।

-Krishnakatyayan

Read More