M.sc(chemistry),B.Ed प्रिय दोस्तों, रसायन विज्ञान की प्रयोगशाला में पता नहीं ऐसा कौन सा केमिकल रिएक्शन हुआ कि मैं साहित्य का हो गया।अब साहित्य लिखता हूँ, साहित्य गाता हूँ और साहित्य जीता हूँ। तो दोस्तों, जिंदगी एक उपवन है और हम सब उसके फूल, खुद महकें और दूसरों को भी महकाएं।। धन्यवाद, राकेश सागर

तुझमें मुझमें है अगर एक बात,
आओ मिल चलें,
तुम कहो जो दिन को मानूँ रात,
आओ मिल चलें,
बस तुम्हारी हाँ से मेरी भी सँवर जाएंगी रातें,
आओ पकड़ो हाथ दे दो साथ,
आओ मिल चलें।।
-राकेश कुमार पाण्डेय"सागर"

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इन नयन में तुम बसी हो,
उन नयन में मैं बसा हूँ,
कोई मुझको तो जँची है,
मैं किसी को तो जँचा हूँ,
जब नयन से नयन का,
मिलना मिलाना हो गया है,
तब से तेरे इश्क में ये,
दिल दीवाना हो गया है। -राकेश कुमार पाण्डेय"सागर"

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नए हैं पत्ते, नई हैं कलियाँ,
नया सवेरा महकती गलियाँ,
ये ओस लगती हैं जैसे मोती,
कहूँ प्रिये क्या जो पास होती,
है कोयलों को गुमान खुद पर,
उन्हें मुहब्बत का जाम देना,
जो काग छेड़े हैं तार मन के,
व्यथाएँ दिल से गुजरती होंगी,
सजल नयन डबडबाती आँखें,
पिया मिलन को तरसती होंगी।।
-राकेश कुमार पाण्डेय"सागर"

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कभी जो बरसात की फुहारें,
दुआरे तेरे बरसती होंगी,
सजल नयन डबडबाती आँखें,
पिया मिलन को तरसती होंगी,
जो आके छेड़े पवन का झोंका,
उसे संदेशों का काम देना,
जो बूंदे पूछेंगी आँसुओं से,
तुम्हारी पलकें झपकती होंगी।
-राकेश पाण्डेय"सागर"

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इन नयन के नीर सूखे, पंक्षी भी उड़ जाएं भूखे, हृदय की करुणा बताओ, क्यूँ हुई लाचार हो,
बीच नदिया में हो जैसे, टूटी सी पतवार हो।।
गिरके भी इतना गिरे, पहुँची रसातल में गिरावट, सिसकती हैं बेटियाँ, शर्मिंदा है खुद पर धरातल, चीखें सारी जल गईं,
तुम क्यूँ हुई अंगार हो, बीच नदिया में हो जैसे, टूटी सी पतवार हो।। -राकेश सागर

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तेरी यादों का मुझको,
बिछौना मिला,
ये न पूछो कि राहों में,
कौन ना मिला,
बस तुम्हारे लिए ही सँवरती रही,
मैं बिखर जाऊं कण कण,
तुम्हारे लिए,
जिंदगी भर समर्पण तुम्हारे लिए।
-राकेश सागर

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