M.sc(chemistry),B.Ed प्रिय दोस्तों, रसायन विज्ञान की प्रयोगशाला में पता नहीं ऐसा कौन सा केमिकल रिएक्शन हुआ कि मैं साहित्य का हो गया।अब साहित्य लिखता हूँ, साहित्य गाता हूँ और साहित्य जीता हूँ। तो दोस्तों, जिंदगी एक उपवन है और हम सब उसके फूल, खुद महकें और दूसरों को भी महकाएं।। धन्यवाद, राकेश सागर

ढूंढने निकला था पानी,
रेत के खलिहान में,
हम नदी का रास्ता,
हैं भूल आए क्या पता.
-राकेश सागर

आदरणीय विष्णु सक्सेना सर की इन पंक्तियों ने दिल के तारों को झंकृत कर दिया....
तन तुम्हारा अगर राधिका बन सके,
मन मेरा फिर तो घनश्याम हो जाएगा,
मेरे होठों की बंशी जो बन जाओ तुम,
सारा संसार बृजधाम हो जाएगा।

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आसमाँ के फलक पर,
उभरी हुई तस्वीर हो,
तृप्त हों मन की क्षुधाएं,
वो बरसता नीर हो,
बुझ रही है लौ तुम्हारे बिन,
कहूँ मैं क्या प्रिए,
प्यार के मधुमास की,
वो प्यास लेकर लौट आओ,
लग रहा है चाँद आँगन,
आके बोला लौट आओ।
-राकेश सागर

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लौट आओ

अकिंचन ही हो जाऊँगा
जो गए तुम,
मगर तुम भी ना रह सकोगे
सुकूँ से,
छपी दिल दीवारों पर
तस्वीर मेरी,
उसे हाथ लेकर सवाँरा
करोगे,
इन आँखों से रस्ता
निहारा करोगे।
-राकेश सागर

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किया प्यार अनहद,
भरोसा किया हूँ,
थी हिस्से की खुशियां,
परोसा किया हूँ,
मेरे इश्क़ की बेल,
फैली है नभ तक,
बता मुझसे कैसे,
किनारा करोगे,
इन आँखों से रस्ता निहारा करोगे।
-राकेश सागर

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ये माना कि शजर कटने लगे बदली फिजाओं में,
मगर जिंदा दिलों में छाँव का एहसास रहने दो।
-राकेश सागर

जिन राहों में काटें हैं,
अब फूल खिलाने ही होंगे,
उन अंधियारी गलियों में,
अब दीप जलाने ही होंगे,
फेंको ईर्ष्या हवन कुण्ड में,
सब हैं एक समान,
प्रेम सरस् रस पी ले प्राणी,
ईश्वर का वरदान।।
-राकेश सागर

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नागफनी के कांटे जो घाटी में हैं मुरझायेंगे,
फिर से फूल खिलेंगे भौरे गीत प्रेम के गाएंगे,
सच होंगे आंखों के सपने,
होगा सुखद विहान,
प्रेम सरस् रस पी ले प्राणी,
ईश्वर का वरदान
-राकेश सागर

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तुम्हीं से प्यार करता हूँ...