मातृभूमि सर्वोपरि

" तेरे शहर की आबोहवा मे ऐसा गुमान आया हैं,
की अब वो खुश्बू भी एक विरान तन्हाँई लगती हैं "...…!! अजीत सिंह गौतम् ✍️

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" गर समझ मे आये तो इश्क न कीजिएगा ,
हुजूर ऐ तो नादांनों का खेल हैं , उन्हें ही खेलनें दीजिए"......!! अजीत सिंह गौतम् ✍️

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चाँदनी रातों में कुछ भीगे ख्यालों की तरह,
मैने चाहा है तुम्हें दिन के उजालों की तरह,
गुजरे थे जो कुछ लम्हें तुम्हारे साथ,
मेरी यादों में चमकते हैं वो सितारों की तरह
💞💞💞💞💞अजीत सिंह गौतम् ✍️

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लोग अक़्सर तेरी मुस्कराहट की तारीफ किया करते है,
हो भी क्यों न कई शिक़वों को दफ़न करके ये खिला करते हैं....!! अजीत सिंह गौतम् ✍️

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" तेरे शहर की अबोहवा मे ऐसा गुमान आया हैं ,
की अब वो खुशबूँ भी एक विरान तन्हाँई लगती हैं "...…!! अजीत सिंह गौतम् ✍️

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तुम्हारे इश्क़ के रंग ओढ़कर ही मैं ख़ुशनुमा हूँ,
तुम ही तो हो मुझमे मैं खुद में कहाँ हूँ....!! अजीत सिंह गौतम् ✍️

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अधुरी हसरतों का आज भी इल्ज़ाम है तुम पर.
अगर तुम चाहते तो ये मोहब्बत कभी खत्म ना होती...!! अजीत सिंह गौतम् ✍️

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सादगी में भी कयामत की अदा होती है,
अच्छे अच्छे लोगो को जला देती हैं...!! अजीत सिंह गौतम् ✍️

यूं ज़ाहिर हो रहा है मुझ से तेरा इश्क़ फरमाना
नजर मिलना नजर झुकना और हौले से मुस्काना....!! अजीत सिंह गौतम् ✍️

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" तुम्हें अपना कहनें की बडी तमन्नाँ थी दिल मे ,
मगर लबों तक आते आते तुम गैर हो गयें "..…..!! अजीत सिंह गौतम् ✍️