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#hindipoetry #insprational #motivational


सोने खालिस होने की चाहत मे आग की तपिश से हो गुजरता है
हीरे अपने आप को तराशने की चाहत कटता रहता है
सुनहरी शाम को पाने की चाहत में धूप में जलना पड़ता हैं
कांटो का दामन थाम मुकम्मल आफताब मिलता है।

सीप को पाने की चाहत में, सागर की गहराइयों मे उतरना पड़ता है
अपने जिगर को मजबूत बना , जिंदगी के उतार-चढ़ाव से उतरना पड़ता है
फलक को छूने की चाहत मे नयी ऊंचाइयों पर चढ़ना होता है
है अगर कुछ पाने का जुनून , तो संघर्ष हर राह पर करना होता है
जन्नत में रहने वालों भी शोलो से गुजारना पड़ता हैं

मूर्ख हैं वो जो इन कांटों से डरते हैं
चांद की बराबरी करने की चाहत में जुगनू भी रात भर चलते हैं
कतरा कतरा लहू बहा, कांटो का दामन थाम फूल खिलते हैं
महबूब बना अपनी मुश्किलों को गुल खिलते हैं ।।
Deepti

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#hindilines
दूर बैठे आसमान में तारे नसीब बुनाते हैं,
जो दिल की धड़कन सुन ले ,वो दिल के करीब होते हैं

है जो इश्क !उनके लिए आँखों में, तो वो चेहरे हर कहीं दिखाई देते हैं
वक्त के पहियों पे हो सवार, परछाई बन
जिंदगी भर साथ चलते हैं

समुंदर सी आँखों की गहराइयों में झांक
उनमे झलकती अनकही बातें पढ़ लेते हैं
इतने मेरे करीब हो तुम ,
ये सब एहसास कोई अजनबी नहीं
जो अपना समझते हैं वही समझते हैं ।

बिन कहे "सनम" जो हर जख्म पर मरहम लगाते हैं
"मेरे दिल के करीब हो तुम" बिना कहे दिल के करीब हो जाते हैं
Deepti

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#hindi poetry
ना रूप ना कोई स्वरूप,
लेकिन चांद और सितारों सा, है ये प्यारा ये महबूब जरूर

एक ख्वाब तुम, जिसकी कोई खुशबू नहीं
बस उसको पाने का है फितूर

टूटते हुए तारे से मांगा है ,हर रात को ये जरूर
एक ख्वाब जो दिल में कब से बसा रखा है
कब हो जाए कबूल

लुकाछिपी जो खेल रहा है, अब और ना उड़ाए आंखों में धूल
भूल गए हैं खुद को जिसको पाने की चाहत में,
अब मिल जाए किसी रूप

Deepti

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#hindipoem
कस्तूरी की अभिलाषा, मृग को भ्रमित करती है
लम्हों को समेटने की आशा, कलम में स्याही भर्ती है

शतरंज में ,हर सिपाही की एक अनोखी चाल होती है
जीवन की हर कसौटी से जुड़ी एक नयी याद होती है

शीशम की छाल अपने सदाबहार पत्तों से हरी-भरी हो लहराती रहती है
लहर बहर जिंदगी के सफर की कलम में नई ताजगी भर्ती रहती है

जो रहे गुर्जर हों खाली पन्ने इस कलम की स्याही से
हर लम्हा बिछ जाए इन पे जीवन की कलाई से

सिलते जाए अनोखे विचारों को मैं और कलम
नयी सादगी से
हर तबस्सुम को नवीन रूप देती जाए कलम, मेरे भावुक विचारों से
Deepti

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# हास्य रस

"अनमोल रस का तू स्रोत"

हर क्षण है इसका रस भरा
जब व्यंग उत्पन्न करे यह छैल छबीला
तोतले! तोतले बोल के ,
इंद्रधनुष के रंग बिखेरे
यह नन्हे से कन्हैया का रूप

भेंट करे नीरस जीवन में
एक ताजा सा फूल
कहे मैया मैं लाया गुलाब
परंतु था वह विशाल पौधा कुरूप
मुस्कुराती यशोदा सी मैया कहे
"तू है मूरख ! तू कहाँ से लाया यह अनमोल फूल"।

छनछन करता आचरण ,
चंचल मन कहे उसको की कर कोई कर्म अद्भुत
मैया के हाथ से झाड़ू ले चले औरों के घर में चलाने स्वच्छता का आंदोलन
" कि बचे ना कोई अब धूल।"

हास्य रस जहां अपनी पूर्ण सीमा पर चढ़ा मिले
उस भीड़ में ये किशोर करतब करता हुआ दिखे
तवर ! तवर नाचे घुंघरू डाल के कि उससे बड़ा नर्तक की और ना कोई होये

हास्य रस का मधुर मिलन जीवन के शिशु काल से मिले
मेघ जीवन में खुशियों के रस बरसाए
Deepti

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रौद्र रस


"काली स्वरूप "

केश खोल चक्रवात जग में छा जाए
तब ,काली का स्वरूप बाहर आए,
काशी सा शीतल स्वभाव था, कभी जिसका
आज उसके आँखों के दर्पण से
अग्नि मे लिपटे हुए एक कोमल
हृदय का छायाचित्र दिख जाए ।

धैर्यशील थी जो कभी ,
आज धैर्य का आंचल छोड़ जाए
आखेट समझ लिया था
जिस समाज ने उसे कभी
आज उसका वह श्राद्ध किए जाए ।

कांच सा मान-सम्मान को वह अपने
औरों की निष्ठुरता से बचाती जाए
जब खींचे कोई आंचल उसका
त्रिशूल से उनका संघार किए जाए
घातक नहीं है वह परंतु
Deepti

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#श्रृंगार रस
#hindipoem


"निर्मोही रसिया"

निर्मोही सा रसिया! जो ना देखे भीगी अखियाँ
कहती है सखियाँ! करता है किसी और से यह बतियाँ
नटखट सा रास रसिया,
देखें औरों की चमकीली चुनरिया
नयी खरीदी हैं मैंने! चमकीली ओढनियाँ,
कभी इधर नजर डाल ले मेरे सांवरिया

कृष्ण का संवाद तुम्हारा , हर श्रोता को लगे तू नयारा
काटू वचन क्यों छलकते हैं इस हृदय बसंत पे,
थोड़े मीठे बोल इधर भी सुना दे बावड़ा
भंवरे, सामान स्वभाव तुम्हारा,
जो सोम के लिए खरकाये औरों का दरवाजा
यहां ! अनंत प्रेम बसा रखा है तेरे लिए,
बस तू इस हृदय की चौखट ना लांघ, मेरे कान्हा!

Deepti

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लबों पे मुस्कान-ए-चांद इस जमी बरखा में लगे फूलों की झड़ी ।
संगमरमर की मूरत जिसकी पलकों पे, जन्नत की सारी खुशियां थी ,खड़ीं
ज़हिर है ! उसकी कशिश खुद में हमनशी थी
लेकिन उसकी मीठी यादें मे भी ,
वो कशिश की कमी ना थी l

ना रूह-ए-रवाँ को उसने आवाज दी
लेकिन अब तलक उसकी यादें मेरे दिल के करीब हे बसी
भस्म हो जाती थी सारी हसीनाएं उसे
मेरे संग देख खड़ी
उसे जान कहते कहते ,मेरी जान वो कहीं चली गई.....

अब इस दिल में है उसकी यादें और मेरे लबों पे एक मीठी सी मुस्कान कहीं दबी
उससे जुड़ी यादों को याद कर ,आंखों में फिर भी आ जाती है नमी

वो रूह से ज़हन तक, मेरे दिल के करीब थी
लेकिन मेरे नसीब में बस उसकी खुशियां देने वाली यादें मिली ,इस जमीन
Deepti

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