दीपक बुंदेला लेखक, निर्माता-निर्देशक टीवी सीरियल लेखन और एसोसिएट डायरेक्टर (मिले सुर मेरा तुम्हारा, भक्ति सागर, गज़ल स्पेसल, फ़िल्मी चक्कर, चाणक्य, टीपू सुल्तान, जय हनुमान, विवाह, अजीब और भाभी ) वीडियो सांग डायरेक्शन (मेड इन इंडिया, ठंडा ठंडा पानी, तेरे बालों में मोती पिरो दू, एक लड़की प्यारी प्यारी लग भाग 200गानों का फिल्मांकन और नए लोगों को इंटरडूस किया ) फीचर फ़िल्म- इन क्रिएटिब डायरेक्टर (लाल दुपट्टा मल मल का, जीना तेरी गली में, सूर्य पुत्र शनि देव, माँ वैष्णों देवी, बेबफा सनम. वर्तमान में

नजर ए लफ्ज़ जो जिस्म में उतरे तो इक इश्क़ की कहानी हुई
मोहब्बत का जला ए चराग ए रात तो जिस्म की जवानी हुई
इश्क़ की आड़ में जिस्म ए मोहब्बत हुई फिर बात इश्क़ की पुरानी हुई

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मातृ भारती

-Deepak Bundela AryMoulik

ये मौन ये ख़ामोशीयां
शहर ए शहर मौत बिछा देगी...!
यादें धुंध ओ धुआं बन कर
जेहन में होश जगा देगी...!!

-Deepak Bundela AryMoulik

दासता ए खबर नहीं कहीं सुनाया करता हूं मैं..!
हो के तन्हा गुज़रे ज़माने में जाया करता हूं मैं..!!

-Deepak Bundela AryMoulik

हंसते रहो हासते रहो किसी ना किसी बहाने से..!
वर्ना ज़िन्दगी में सुख और दुख तो हैं ज़माने से..!!

सुप्रभात 🙏

-Deepak Bundela AryMoulik

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अकेला नहीं हूं मैं मुश्किलें और तन्हाईयां मेरे साथ हैं..!
बैठा नहीं हूं फुर्सत में बस इक रोज़गार की तलाश हैं...!!

-Deepak Bundela AryMoulik

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हर लम्हा लम्हा तिरे ख्यालों के द्वन्द में रहता हूं..!!
देखता हूं आईने में चेहरा अपना तो तुझे देखता हूं..!!!

-Deepak Bundela AryMoulik

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ये मोहब्बत भी गर हक़ से मांगू तो नज़र से गिर जाऊंगा..!!
इससे अच्छा हो कर खामोश शहर से तिरे गुज़र जाऊंगा...!!!

-Deepak Bundela AryMoulik

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सृजन-🅰️-अल्फाज़

हो गया ये शहर वीराना यहां आनें से डरते हैं सब
देख कर मका ए खंडहर, दीवारे आहे भरते हैं सब

बीते बचपन की यादों में खो कर जो सिहरते हैं अब
बीत गया एक ज़माना तस्वीरों में देखा करते हैं सब

तंग मैं हूं या हैं ये ज़माना बैठ कर सोचा करते हैं सब
उठ वो आती हैं हूक ए याद जो टीसा करती हैं अब

बैठ आगोश ए तन्हाईयों में खुद से पूछा करते हैं अब
ना मिली हसरतें मंज़िलों की तो कोसा करते हैं सब

देख बनते मका शहर के गांव भी सोचा करते हैं अब
जोड़ते हैं ईंट गारा लोग फिर भी उनमें ठहरते हैं कब

मतलबी हैं सब यहां पर बसते लोग मतलबी यहां हैं अब
तोड़ देते हैं वो घरोंदा भी जहां प्यार से रहा करते हैं सब

-Deepak Bundela AryMoulik

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दिल-ए-मर्म को छुपाया जा सकता हैं..!!
किसी के इश्क़ को बचाया जा सकता हैं..!!!

-Deepak Bundela AryMoulik