मैं एक कवि हूँ ।कविता लिखना और सुनना बहुत अच्छा लगता है ।मैं सेवानिवृत्त वरिष्ठ अध्यापक हूँ मुझें चुटकलें .शायरी .गजल .बहुत अच्छे लगते है ।

" हवाओं की भी अपनी गजब सियासतें है ,
कहीं बुझी राख भड़का दें ,
तो कही जलते दिये बुझा दें "

-Brijmohan Rana

पलकों पर बिठा गया कोई ।
अपनी मीठी चुभन दे गया कोई ।
मैं तुम्हारी हूँ कानों में कह गया कोई ।
आँख खुली तो पता चला वो तो मीठा ख्वाब था कोई ।।

-Brijmohan Rana

Read More

# आज की प्रतियोगिता "
# विधवा "
* कविता *
विधवा एक ,अपशुकन नहीं है ।
फूल सी नाजुक ,चाँद सी सुदंर है ।।
ममता की मूरत ,वात्सल्य की देवी है ।
उस पर ये कैसा ,ग्रहण लगा है ।।
नारी तो विधाता ,की अनमोल कृति है ।
जिसे विधाता के ,क्रुर हाथों ने छला है ।।
उसे खिलने से ,पहले ही मुरजा दिया है ।
उसमें उसका ,क्या कसूर है ।।
वह क्या हमारी ,जैसी नारी नहीं है ।
अपनी धटिया विचारधारा ,अब बदलो ।।
वह तो आपके प्रेम ,की भुखी है ।
उसे पुनः विवाह ,करने की आज्ञा दो ।।
वह आपके अपनत्व ,की प्यासी है ।
वह आपका प्रेम ,पाकर खिलखिल जायेगी ।।
वह भी समाज ,का अभिन्न अंग है ।
उसे गर्त में जाने ,से रोको ।।
वह समाज के प्रताडना ,से बच जायेगी ।
आपका उपकार मान कर ,अपना दुःख भुल जायेगी ।।

-Brijmohan Rana

Read More

तेरी आँखों का जादू समझ लेते ।
तो तेरे पास ही नहीं फटकते ।।
एक बार नजरे क्या मिली ।
दिल परिन्दें की तरह शिकार हो गया ।।

-Brijmohan Rana

Read More

तेरी नजरों ने शिकार कर डाला ।
एक दिल को धायल कर डाला ।।
हम समझ न पाये कुछ भी ।
तुमने दिल को अपना बना डाला ।।

-Brijmohan Rana

Read More

# आज की प्रतियोगिता "
# विषय .शिकार "
# कविता *
तेरी नजरों का ,शिकार हो गया हूँ ।
मैं दिल ही दिल में ,तुझें चाहने लग गया हूँ ।।
तेरे रुप का दीवाना ,हो गया हूँ ।
तेरे चाँद से मुख ,को निहारने लग गया हूँ ।।
दिल बैचेन हो गया है ,जिस दिन से मिला हूँ ।
तेरे प्रेम का ,रोगी बन गया हूँ ।।
तेरी एक झलक पाने ,उतावला हो गया हूँ ।
तेरी सादगी का ,शिकार हो गया हूँ ।।

-Brijmohan Rana

Read More

शानदार मुक्तक .
विषय .मनमीत ।
मात्राभार .20 .
मनमीत जान से प्यारा होता है ।
प्रियतम आँखों का तारा होता है ।।
हमसफर बिना जग सूना सा लगे ।
साजन खुशी का खजाना होता है ।।
विषय .झंझवात .
मात्राभार .24 .
विधा .मुक्तक ..
पल में आँधी सबके दिल भयभीत कर दें ।
पल में बवडंर सबके दिल आतंकीत कर दें ।।
झंझवात का कोई सामना कर सकता नहीं ।
पल में तूफान सबके मन को दुःखी कर दें ।।

-Brijmohan Rana

Read More

# आज की प्रतियोगिता "
# विषय .दृश्य "
# कविता *
बेटी की विदाई का दृश्य ,बहुत करण होता ही ।
इसे देख कर ,सबका दिल भर आता ही ।।
दिल के कलेजे को ,विदा करने का मन होता नहीं ।
माता पिता विदाई ,करते बहुत आंसू बहाते ही ।।
यह दृश्य देख ,सबका दिल मुँह को आता ही ।
बेटी इसलिए ही ,पराई कहलाती ।।
गाय और बेटी ,जहाँ भेजो वहाँ चली जाती ।
बेटी तो सबकी ,दिल की दुलारी होती ।।
बेटी तो धर आंगन की ,फूलवारी होती ।
बेटी धर आंगन ,सूना कर चली जाती ।।
उसकी याद मिटाये ,भी नहीं मिटती ।
बेटी की विदाई ,बहुत कष्टकारी होती ।।
बेटी पराये धर ,जाकर माँ बाप को कभी नही भुलती ।
बिन बुलाये एक आवाज ,मैं दौडी चली आती ।।
बेटी बिना माँ बाप ,की आँखें तरस जाती ।
उसकी याद बरसों ,तक भी भुलाई नही जाती ।।

-Brijmohan Rana

Read More

# आज की प्रतियोगिता "
# विषय .विजय "
*छंदमुक्त कविता *
विजय का स्वाद ,मीठा लगता ।
विजय से व्यक्ति ,खुशहाल लगता ।।
अच्छे कर्म ही ,विजय श्री दिलवाते ।
बुरे कर्म ,मिट्टी में मिलाते ।।
विजय व्यक्ति का ,श्रेष्ठ आभूषण होता ।
अच्छाईयों के आगे ,बुराईयाँ सदा धुटने टेकती ।।
सत्य की ही ,संसार में विजय होती ।
असत्य की सदा ,हार ही होती ।।
राम सत्यवादी थे ,इसलिए विजयी हुए ।
रावण असत्यवादी था ,इसलिए धूलधूसरीत हुआ ।।
आज भी हम रावण ,का पुतला जलाते ।
श्रीकृष्ण सत्यवादी थे ,इसलिए विजयी हुए ।।
कंस असत्यवादी था ,इसलिए पराजीत हुआ ।
विजय श्री कर्मठ ,को गले लगाती ।।

-Brijmohan Rana

Read More

साहित्य संगम संस्थान मंचपटल से मुझे श्रेष्ठ टिप्पणीकार सम्मान पत्र मिला ।