मैं एक कवि हूँ ।कविता लिखना और सुनना बहुत अच्छा लगता है ।मैं सेवानिवृत्त वरिष्ठ अध्यापक हूँ मुझें चुटकलें .शायरी .गजल .बहुत अच्छे लगते है ।

# आज की प्रतियोगिता "
# विषय .सक्षम "
# कविता ***
प्रभु तू ही ,तारणहार ठहरा ।
प्रभु तू ही ,सक्षम ठहरा ।।
प्रभु तेरी मर्जी ,बिन पत्ता नहीं डोलता ।
प्रभु तेरी मर्जी ,बिन जग नहीं चलता ।।
प्रभु तू प्रकृति ,में रंग अनोखे भरता ।
प्रभु तू ही नव ,सृजन करता ।।
तेरी महिमा , को चारों ओर दिखाता ।
जड़ चेतन को ,तू ही सांसे देता ।।
तुझें जो पाले ,वो निहाल हो जाता ।
बृजेश कहता सब तेरे ,ही गुण गाता ।।
बृजमोहन रणा ,कवि ,अमदाबाद ,गुजरात ।

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** कविता **
* * विषय .उम्मीद **
उम्मीद की पतवार ,को तू थाम लें ।
खुशीयों का भवसागर ,तू पा जायेगा ।।
वक्त की चाल को ,तू पहचान लें ।
मंजिल अपने आप ,तू पा जायेगा ।।
किसी के दिल ,को तू पहचान लें ।
अपना उसे पल ,में बना लेगा ।।
आंसूओं के दर्द ,को तू जान लें ।
आँख का तारा ,पल में बन जायेगा ।।
मीठी बोली को ,तू जिह्वा पर सजा लें ।
परायों को पल ,में अपना बना लेगा ।।
दूसरों के लिए ,अपना जीवन लुटा दें ।
मर कर भी तू सदा ,अमर बन जायेगा ।।
बृजमोहन रणा ,कश्यप ,कवि ,अमदाबाद ,गुजरात ।

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**कविता **
# विषय .संगति **
प्यार की उम्मीद में ,जीता आदमी ।
प्यार पाकर पल में ,खिल उठेगा ।।
प्यार में दिल ,लुटाता आदमी ।
नफरत से जी ,नहीं पायेगा ।।
अपनों के लिए ,जीता आदमी ।
बिछड़ने का दर्द ,सह न पायेगा ।।
दर्द में धुंटता ,रहा आदमी ।
सहानुभूति से ,महक उठेगा ।।
वक्त की मार से ,आंसू बहाता आदमी ।
रोजगार पाकर ,खुश हो उठेगा ।।
अपना जीवन ,व्यर्थ समझता आदमी ।
प्रभु चरण पाकर ,जीवन संवार लेगा ।।
पापाचार करता ,रहा आदमी ।
अच्छी संगति पाकर ,सुधर जायेगा ।।
दानवता में ,जीवन बर्बाद करता आदमी ।
मानवता पाकर ,सज्जन बन जायेगा ।।
बृजमोहन रणा ,कश्यप ,कवि ,अमदाबाद ,गुजरात ।

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# आज की प्रतियोगिता "
# विषय .अवरोधन **
** कविता **
खिलखिलाते जीवन में ,अवरोध मत बनें ।
प्यार में बढ़ते कदम ,में रुकावट मत बनें ।।
खिलते फूल को ,पैरों तले कूचल न दें ।
बहारें आने से पहले ,नाउमीद न करें ।।
नयनों को लडने से ,पहले अवरोध न बनें ।
प्यार की बारिश में ,ओले न गिरायें ।।
बहकते कदमों को ,गिरने से बचायें ।
दिल जले को ,आंसू ओर न दें ।।
किसी के सहारे ,में अवरोध न बनें ।
प्यार के फूल को ,खिलने से मत रोकें ।।
चाहत के फूलों ,को महकने दें ।
दोस्ती में कभी ,अवरोध न बनें ।।
बृजमोहन रणा ,कश्यप ,कवि ,अमदाबाद ,गुजरात ।

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# आज _ की _प्रतियोगिता "
# विषय _ संतुलन "
# छंदमुक्त _ कविता ***
जीवन में अच्छे बुरे ,का संतुलन होना चाहिए ।
जीवन तो माप तोल का ,उदाहरण होना चाहिए ।।
आपकी अच्छाई देख कर ,लोग तुम्हें आँखों पर बिठा लें ।
बुरे काम से सदा ,बचते रहना चाहिए ।।
सुख दुःख तो ,धुप छांव की तरह है ।
धैर्यपूर्वक उनका ,मुकाबला करना चाहिए ।।
पैसा पाकर ,कभी छलके नहीं ।
पैसा न होने पर ,भी अफसोस न करें ।।
दिल में आशा निराशा का ,संतुलन होना चाहिए ।
संतुलित जीवन ही ,खुशहाल रखता है ।।
हर परिस्थिति में ,महकते चहकते रहना चाहिए ।
कहता बृजेश संतुलित जीवन ,ही सुख का आधार है ।।
बृजमोहन रणा ,कश्यप ,कवि ,अमदाबाद ,गुजरात ।

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# आज _ की _ प्रतियोगिता "
# विषय _ सामान "
#विधा _ कविता ***
क्या सामान बिक गया है ,इतने खुश हो रहे हो ।
क्या जमीर को मार कर ,शहनशाह बन रहे हो ।।
क्या ,मानवता मार कर ,दानवता अपना रहे हो ।
क्या सदाचार छोड़ कर ,स्वछंदता अपना रहे हो ।।
क्या अपना जमीर मार कर ,पापाचार कर रहे हो ।
क्या दुसरों की खुशियाँ चुरा कर ,खुश हो रहे हो ।।
क्या गद्दारी कर के ,देश भक्त बन रहे हो ।
क्या दुसरों का सुकून बेच कर ,इतरा रहे हो ।।
बृजमोहन रणा ,कश्यप ,कवि ,अमदाबाद ,गुजरात ।

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** कविता **
** विषय .पराधीन #
डरते है कही बिमार ,हम न पड़ जायें ।
महफिलों में जायें तो ,कहीं रोग न लग जायें ।।
खुली हवा में श्वास लेने ,से धबराने लग गये ।
प्रकृति की गोदी में ,खेलने से कतराने लगे ।।
दोस्तों के गले मिलने ,को तरसने लगे ।
दोस्तो के साथ बैठे ,जमाना हो गया ।।
इस धुंटन से अब ,हम धबराने लगे ।
अपनों से हम ,जुदा हो गये ।।
कोरोना ने हमारा ,सुख चैन लुट लिया ।
कोरोना हमारा खुशीयों ,का खजाना खा गया ।।
दोस्त भी धर ,आने से डरने लगे ।
सब को हम शंका की ,दृष्टि से देखने लगे ।।
खिड़की ,दरवाजे से ,झांक कर देखने लगे ।
गलीयों ,चौहारे ,बच्चों ,की अटखेलियों ,से मर्हुम हो गयी ।।
अब हम अपना चेहरा ,नकाब से ढ़कने लगे ।
हम पशु तुल्य ,पराधीन से हो गये ।।
बृजमोहन रणा ,कश्यप ,कवि ,अमदाबाद ,गुजरात ।

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# आज की प्रतियोगिता "
# विषय .आसमानी "
# कविता ***
जीवन आसमानी,
विस्तृत सा ,
कयी अभिलाषा लिए हुए ,
जीवन के रंगों को महकाता हुआ ,
सबके दिलों में बसता हुआ ,
आनंद के पल लुटाता हुआ ,
प्यार में पागल होता हुआ ,
उमंगों की तरंगों से खेलता हुआ ,
हर पल श्रेष्ठता को पाता हुआ ,
श्रेष्ठतम कहलाता हैं ।।
बृजमोहन रणा ,कश्यप ,कवि ,अमदाबाद ,गुजरात ।

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**गजल **
# काफिया .अन् **
# रदीफ .तो होता **
मोहब्बत का एहसास कभी कराया तो होता ।
दिखावा ही सही भरम बनाया तो होता ।।
सदाओं की भटकन फितरत तुम्हारी ।
गर दिल पर नहीं काबू बताया तो होता ।।
जमाने के कहने से मोहब्बत नहीं होती ।
चरागे इश्क दिल में जलाया तो होता ।।
कहते हो ओरों से रिश्ता हमारा ।
कभी आकर हमें भी जताया तो होता ।।

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# आज की प्रतियोगिता "
# विषय .जिंदा **
**कविता **
लोग प्यार के खातिर ,जिंदा रहते ।
लोग अपनों के लिए ,जिंदा रहते ।।
लोग अरमानों के खातिर ,जिंदा रहते ।
लोग आशाओं के खातिर ,जिंदा रहते ।।
लोग बच्चों के खातिर ,जिंदा रहते ।
लोग वादें निभाने के खातिर ,जिंदा रहते ।।
लोग स्वाभिमान के खातिर ,जिंदा रहते ।
जो अपने खुद के ,जिगर को मार डालते ।।
वो जिंदा भी मुर्दा ,समान ही होते ।
लोग देश की आन के खातिर ,जिंदा रहते ।।
जिसमें मानवता ही नहीं ,वह इंसान नहीं होते ।
बेइज्जत करने वाले ,दानव ही होते ।।
देश पर बलिदान होने वाले ,सदा जिंदा रहते ।
परोपकार करने वाले ,सदा दुसरों के दिलों में जिंदा रहते ।।
बृजमोहन रणा ,कश्यप ,कवि ,अमदाबाद ,गुजरात ।

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