मेरी इबादतों को ऐसे कर कबूल ऐ मेरे खुदा, के सजदे में मैं झुकूं तो मुझसे जुड़े हर रिश्ते की जिंदगी संवर जाए........ ..खान@

ना नमाज़ आती है मुझको  ना वजू आता है,
सज़दा कर लेता हु मैं जब सामने तू आती है।
@खान।,,

हमारा ओर उनका
प्यार तो देखो यारो
कलम से नशा हम
करते है,
ओर मदहोश वो
हो जाते है।,,
@खान।

💐મિત્ર💐

ફળે છે ઈબાદત ને ખુદા મળે છે,
મિત્રો ને નિહાળી ઉર્જા મળે છે.
નથી જાતો હું મંદિર ,,મસ્જિદ..કે ચર્ચ માં,
મિત્રો ના દિલ મા જ દેવતા મળે છે....

ખસુ છું હું  જ્યારે સતત ખુદ માંથી,
મિત્ર તારા હૃદય માં જગ્યા મળે છે.
સમય છે ઉકળતો અને જીવન સળગતું,
મિત્રો ની હથેળી માં શાતા મળે છે...

ઈચ્છા ને તમન્ના બધીય થાય પુરી,
મને ઊંઘ માં મિત્રો ના સપના મળે છે..
ડૂબું છું આ સંસાર  સાગર માં જ્યારે,
મિત્રતા ના મજબૂત તરાપા મળે છે....

દવાઓ ની સારવાર નીવડે નકામી.
મિત્રો ની  અસરદાર દુઆ મળે છે,
જીવન મરણ કે સુખ..દુઃખ..નિ ગમેતે  ઘડી  હોય,
સદનસીબે મને મિત્રો ના ખમ્ભા  મળેછે.....

તમામ મિત્રોને સમર્પિત.......એક દોસ્ત...

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याद तेरी जब भी आई वफ़ा रोती रही
आँखों से बरसा वो बादल के इन्तहा होती रही
तेरे मिलने की दुआ के लिए जब भी हाथ उठाए मैंने
मेरी इस मासूम ख्वाहिश पे न जाने क्यों दुआ रोती रही।
@खान।

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प्यार में वह पल बहुत खूबसूरत होता है,
जब देखना इबादत और छूना गुनाह लगता है
शिकवा करने गये थे और इबादत सी हो गई,
तुझे भुलाने की जिद्द, अब तेरी आदत सी हौ गई..!!
@खान।,,

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मां 

मामूली एक कलम से कहां तक घसीट लाए
हम इस ग़ज़ल को कोठे से मां तक घसीट लाए
 
लबों पे उसके कभी बद्दुआ नहीं होती
बस एक मां है जो मुझसे ख़फ़ा नहीं होती

किसी को घर मिला हिस्से में या कोई दुकां आई
मैं घर में सब से छोटा था मेरे हिस्से में मां आई

इस तरह मेरे गुनाहों को वो धो देती है
मां बहुत ग़ुस्से में होती है तो रो देती है

दावर-ए-हश्र तुझे मेरी इबादत की कसम
ये मेरा नाम-ए-आमाल इज़ाफी होगा

नेकियां गिनने की नौबत ही नहीं आएगी
मैंने जो मां पर लिखा है, वही काफी होगा।
बहन का प्यार मां की ममता...

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सूखे पत्तों की तरह बिखरे थे हम।
किसी ने समेटा भी तो सिर्फ जलाने के लिए।
@खान।,,

वहम था कि सारा बाग अपना है,
तुंफ़ा के बाद पता चला,
सूखे पत्तों पर भी हक़,
हवा ओ का था।,,
@खान।,,

दिल की धड़कन को धड़का गया कोई
मेरे ख्वाबों को जगा गया कोई
हम तो अनजाने रास्तो पे यूं ही चल रहे थे
अचानक ही प्यार का मतलव भी सीखा गया कोई।
KH@N..

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रेत सा क्युं लगता हैं  प्यार तुम्हारा , 
कभी मिला , तो मुठ्ठीभर तो कभी .
चुटकी भी नसीब नहीं।
@खान।,,