मेरी इबादतों को ऐसे कर कबूल ऐ मेरे खुदा, के सजदे में मैं झुकूं तो मुझसे जुड़े हर रिश्ते की जिंदगी संवर जाए........ ..खान@

महसूस करोगे तो कोरे कागज पर भी नज़र
आएंगे,
हम अल्फ़ाज़ हैं तेरे… हर लफ्ज़ में ढल
जाएंगे।,,,,,,,,,

शहर में बसने वाला गाँव हूँ मैं,
काँटों पर चलने वाला पाँव हूँ मैं,
यूँ ही आग नहीं है मेरे शब्दों में
धूप में जलने वाला छाँव हूँ मैं.
@खान।,,

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एक आधा बुझा दिन मिलता है,
एक आधी जली रात से,
और वो कहते है…
‘क्या ख़ूबसूरत शाम है’,,,,,

मेरे दिल की राख़ क़ुरेद मत,
इसे मुस्कुरा के हवा न दे,,,,

ये चराग़ फिर भी चराग़ है,
कहीं तेरा हाँथ जला न दे।,,,,,
@खान।,,

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कल क्या खूब इश्क़
से मैने बदला लिया,
कागज़ पर लिखा इश्क़,
और उसे ज़ला दिया।..
@खान।,,

વાયુને હંફાવવા બળ ના કરે
એ સુંગધ છે,કદી છળ ના કરે,

પુષ્પ પર ડાઘો પડે એ બીકથી
જીવવાને જિદ ઝાકળ ના કરે,,,,,,

पत्थर को शिकायत है कि पानी
की,
मार से टूट रहे है हैम,,,,

पानी का गिला ये है की पत्थर हमे,
खुलकर बहने नही देते,,,,,,,!!
KH@N..

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मैं पेड़ हूं हर रोज़ गिरते हैं
पत्ते मेरे ,
फिर भी हवाओं से,,
बदलते नहीं रिश्ते मेरे..
@खान।,,

आलमारी मैं बंद रखा जाता है
कभी पहना नहीं जाता,
हाल अपना भी अब बेवा के
जेवर जैंसा हो गया है|,,,
@खान।,,

इंसान कभी गलत नहीं होता, उसका
वक़्त गलत होता है.
मगर लोग इंसान को गलत कहेते हे. 

जैसे के,पतंग कभी नहीं कटती, कटता
तो धागा हे 
फिरभी लोग कहेते हे पतंग कटी"..!
@खान।,,

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