पहले शिक्षक फिर बैंक अधिकारी और उसके बाद कॉरपोरेट प्रबंधन में राजभाषा अधिकारी...आगे नए क्षितिज की तलाश में निरंतर बढ़ते कदम..! स्वभाव से थोड़ा जिद्दी, मन से चंचल (एक साथ कई काम करने की कोशिश), शांत संगीत का प्रेमी, साहित्य का विद्यार्थी, कम्प्यूटर, तकनीकी, सूचना प्रौद्योगिकी, वेब डिजाइनिंग और ब्लॉगिंग आदि का शौक (शायद शौक से कुछ ज्यादा)। अंधेरे रास्तों पर चलने का जुनून और अपनी मातृभाषा हिंदी को तकनीकी रूप से समृद्ध करने लिए कुछ छिट-पुट प्रयास...और हाँ, अब तक कुछेक कविताएं और लेख भी यत्र-तत्र प्रकाशित। कुल जमा लेखन में कुछ विशेष उपलब्धि नहीं है मित्रो। वर्तमान में देश की एक प्रतिष्ठित महारत्न कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड में राजभाषा अधिकारी के रूप में कार्यरत हूँ...बस यही थोड़ी सी पहचान है अपनी। शेष आपसे मिलने पर...!

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