Hey, I am on Matrubharti!

मैं अपनों के दिए दर्द से तड़पी हूँ,
ख़ता नहीं गुनाह हैं,कि मैं एक लड़की हूँ...
सजा मुकर्रर हो गयी है मेरी,
बीस की हो गयी है, अब किस बात की देरी..
मैं खुद ही अपने दर्द से लड़ती हूँ,
ख़ता नहीं गुनाह है, कि मैं एक लड़की हूँ
-SVjoshi

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दोस्ती ख्वाब हैं,
ख्वाबों की ताबीर भी,,
कभी मुक्कमल इश्क,
यादों की जंजीर भी.


- SVjoshi

वो कहते हैं "सफ़र " से थक गये
उन्हें कैसे बताए
"suffer"
तो हम भी करते हैं
बस थकने का हक नहीं है