टोटली फक्कड़

पहले लोग लुकछिप के क्रिकेट में सट्टा लगाते थे,
इस आईपीएल के स्पॉन्सर ड्रीम11 ने घर-घर में जुआरी पैदा कर दिये।

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लोगो के व्यवहार से आप पता नही लगा सकते कि कौन आपके लिए मन मे बुरे विचार लिये बैठा है।
बहुत आत्मीयता दिखाने वाले लोग भी पीठ पीछे आपके अवगुणों की ही ज्यादा चर्चा करते हैं।
इसलिए बस खुद में मस्त रहिये,ईमानदारी से जीवन जीते रहिये।

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मेरी आहट भर से खुलने वाली खिड़कियों की कमी नही,

तू तरस जायेगा की कभी गुजरें हम भी तेरी गली से।।

-S Choudhary

प्रथम विश्व युद्ध के समय ब्रिटेन की तरफ से लड़ने के लिये 12लाख70हजार भारतीय सैनिक गये।
भारतीय राजा रजवाड़ो ने अपने खजाने खोल दिये।।
75 हजार भारतीय विदेशी धरती पर मारे गये जिनकी लाश तक का क्रियाकर्म नही हो सका,
घरवाले अंतिम दर्शन भी नही कर सके।
लाखो घायल हुए,
हजारो के अंग भंग हो गये,
बहुत से लोग पूरी उम्र अपाहिज रहे।
भारतीय लोग अंग्रेजों के गुलाम होते हुए भी उनकी जीत के लिए प्रार्थना कर रहे थे।
युद्ध की समाप्ति के बाद जीतने पर भी ब्रिटेन दुखी था क्योंकि उसकी अर्थव्यवस्था बुरी तरह बिगड़ चुकी थी,
उनके सामने अपने देश को संभालने के लिये भी संकट खड़ा हो चुका था।

वहीं इतनी गुलामी झेलने पर भी भारतीयों ने इस जीत का जश्न मनाया,
अंगेजो में उत्साह भरा की वो फिर खड़े हो और हम पर अच्छे से शासन कर सकें।
वही हुआ,

अंग्रेज दशयुओ ने भारत को और ज्यादा लूटा ,
नये नये टैक्स लगाये।

और हम तो बड़े दिलवाले है,
वसुदेव कुटुम्बकम जपते रहे,

सर्वे भवन्तु सुखिनः की प्रार्थना करते रहे।

'अहिंसा'परमो धर्म का जाप करके हुए नपुंसकता की अंतिम सीढ़ी चढ़ने लगे।।

#अहिंसा

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तेरे फरेब के लिए तुझे तो सो बार माफी,
तुझसे इश्क करके खुद से जो फरेब किया उसकी माफी कौन दे ?
#माफी

जिंदगी खुद जिंदगी का सबसे बड़ा हादसा है।
जब इसको जी रहे हैं तो बाकी हादसों की क्या औकात है फिर....

S Choudhary

तू कर गुमान अपने हुस्न पर बेशक,
मैं मिट्टी से बना हूँ मेरी खुशबू अलग है।

तू कर जालसाजी जितना तू चाहे,
मैं वफ़ा से बना हूँ मेरी फितरत अलग है।

ये फरेब चालाकियां तेरी खो रही है मुझे,
मैं तेरी किस्मत में नही मेरी कीमत अलग है।।

मुझे ढूंढेगा तू मेरे चले जाने के बाद,
मैं नही लौटूंगा मेरी आदत अलग है।।

© सुमित

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तुझसे बिछड़े भी तो तेरा सिखाया सलीका नही भूले,

आज भी अलमारी में तह बने रखे है तेरे संग देखे सपने।।

#तह

सामुहिक दुराचार,
फिर मारने के लिए गला घोंटने लगे तो जीभ भी काट दी,
दर्द से बेहाल होकर विरोध किया तो तुमने रीढ़ की हड्डी भी तोड़ दी।

अंततः आज उसकी रूह ने उसकी देह को छोड़ दिया।
यही देह चाहिए थी ना तुम्हे?

जाओ अब फिर करलो बलात्कार......
अब विरोध भी नही कर सकती क्योंकि भीतर प्राण नही है।

दिन प्रतिदिन राक्षसी परवर्ती से भरता जा रहा है इंसान।

कहने को इंसान, कर्म हैवानों से भी परे।

एक एक अपराधी के साथ क्रूरतम व्यवहार होना चाहिये।

योगी जी-कहीं पलटा दो इनकी भी गाड़ी,
इन दुराचारियो की आवश्यकता नही इस धरती पर।।

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कुछ सवालों के जवाब दोगे ?

#कभी_ऐसे_लड़े_हो -

●उसने क्लास में तुम्हारी तरफ देखा नही तो लड़े हो उससे ?
●उसको किसी और से बात करते देखा तो जलभुन कर चिढ़े हो कभी ?
●कभी स्कूल/कॉलेज न आयें हो तो मुझे क्यों नही बताया ये कहकर लड़े हो कभी ?

#कभी_ऐसे_बात_की_है -

●आंखों और चेहरे के इशारे से बात की है कभी ?
●फुसफुसाकर रात भर घरवालों से छिपकर बात की है कभी ?
●दोस्त पर कमेंट करके उसे कुछ कहा है कभी ?
●फोन पर बतियाते हुए घर से कई किलोमीटर दूर निकल जाते थे कभी ?

#कभी_ऐसे_महसूस_किया_है -

●सैंकड़ो लोगो की महफ़िल में होकर भी खुद को अकेला महसूस किया कभी?
●वो नही है तो भी वो देख रहा है ऐसा महसूस किया कभी ?

#ऐसा_हुआ_है_कभी -

●उसके घर के सामने से निकले तो धक्क से दिल बाहर निकल आने को हुआ है कभी ?
●वो नही दिखे तो चलते चलते कदम भारी हो गये हो कभी ?
●सालों बाद किताब उठाई तो सूखे गुलाब की पंखुड़ियां बिखर गई हो कभी ?
●पहली बार सिगरेट सुलगाई हो उसकी याद में ?
●कभी पेग लगाकर,इमोशनल होकर दोस्तो को अपना किस्सा सुनाया कभी ?
●अब भी कभी सामने आजाये तो शरीर मे सिरहन सी हो जाती है कभी ?

#ऐसे_चाहा_है_कभी -

●वो मिले तो उसको जी भर कर गालियां दूं कभी?
●कभी पास आये तो जी भर कर रो ले कभी?
●सम्भव नही तो भी ये सोचा कि वो आ जाये कभी?
●हर प्रेम कहानी अपनी सी लगी हो कभी?
●जब भी कहीं बेवफा लिखते हो तो चाहते हो कि वो पढ़े इसको कभी ?
●कभी सोचते हो कि वो भी ऐसा सोचता होगा कभी ?


एक का भी जवाब हाँ में है तो तुम 😊😊💑
सवालों को पढ़कर कोई याद आया है तो तुम....😍

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