गज़ब की बेरुख़ी छाई हे तेरे जाने के बाद, अब तो सेल्फ़ी लेते वक़्त भी मुस्कुरा नही पाते।

S. Khan

S, khan

सुना है आज उनकी आँखों आँशु आ गए।
वो बच्चों को लिखना सिखा रही थी.. कि मोहब्बत ऐसे लिखते है।

गुफ्तगू करते रहिये थोड़ी थोड़ी सभी दोस्तो से,
जाले लग जाते है अक्सर बंद मकानों में भी।

ये जो छोटे होते है ना दुकानों पर होटलों पर और वर्कशॉप पर
दरअसल ये बच्चे अपने घर के बड़े होते है

S, khan

S, khan

S, khan

Uski Mohbat ka silsila bi kya ajeeb hai..
Apna bi nhi bnati hai.. Or kisi ka hone bi nhi deti hai.

S, khan