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एक पत्नी के अतिरिक्त कोई सच्ची
प्रेमिका नही हो सकती |
प्रेमिका का वास्तविक अर्थ ही पत्नी है |

तुम खुश हो, मुझे और क्या चाहिए,
खुश रहो सुख तुम्हारे सलामत रहे ,
यह हाथ दुआ में उठते मेरे |
जो करती है वो ,कुछ भी संशय नही ,
जो लायक है जिसके मिले भी वही ,
मै पाकर भी पाती नही जानती ,
मै होकर भी होती नही जानती ,
मुझसे ज्यादा है मुझको वो पहचानती |
इन शब्दो का मेरे कोई मोल है , बूझे किसी को ,
कोई तोल है | या भ्रम है कोई मेरा मुझसे ही है,
है शिकायत कहीं, आप ही तोड़ है |

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रुठा है ! रूठकर बैठा है ,
कुछ इस तरह से ,
न मिलते शब्द मनाऊँ किस तरह से ,
रो रहा है अन्तर , बाहर विरान है |
मन ही सुकून ,
मन से ही आराम है,
मृत हूँ अनुपस्थिति में तुम्हारे
ये जीवन झूठा , केवल नाम है |
मन उदास है

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रक्षा बन्धन की हार्दिक शुभकामनाएं |
मेरे वीर दी राखी
मेरे द्वारा निर्मित ,
मानती हूँ इसमे खूबसूरती कम होगी
मगर भावना अधिक है |
मेरे भैय्या गणपति
और ठाकुरजी के लिए |

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मेरी बुद्धि भावना को बहला ले जाये ,
तुम सामने खड़े हो , पहचान न पाये तब भी,
मुझे विकल्प मे मत रखना , तब तक मुझे खुद
मे जकड़े रखना जबतक तुम्हे समझकर ,तुममे ही
मिल जाऊँ |
कविता (अंश से)

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सुन लो!
हृदय मे हो !
हृदय में हूँ तो !!
तुमसे ही हैं पर्व ये सारे ,
तुमसे ही है सावन ,
तुम हो तन मे ,
तुम हो मन में,
रोम - रोम जीवन में,
जहाँ बिठाया ,बैठे हो,
नही छू कोई, तुमको पाया |
दिखला लो बाहर तुम नाटक ,
बन्द कर लिया तुमने फाटक ,
ऐसा क्या अपराध किया?
बुरी अगर मै मिले ही क्यों थे ,
मिलकर तुमसे मै बुरी रही क्या?
पतितपावन हो जो तुम ,
मुझको पतित ही छोड़ दिया क्या ?
नही समझ पाई हूँ छवि को ,
जिस छवि ने मुझको है गहा ,
मुझे दिखा दो ! मुझे बता दो !!
किस छवि में आ मुझें पढ़ा |
हर मूरत में तुमको देखूँ ,
आखिर ! वह सूरत है क्या ?
मगर बताना हाथ पकड़कर ,
जबतक न समझूँ , मुझे जकड़कर,
देना मत केवल संकेत मुझे ,
क्षुद्र समझ है ,
सीमित परिधि ,
मगर भावना अलग नही |
कविता (अंश से)

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माँ .............🙏
माँ................🙏
माँ..................🙏
माँ.....................♥️🙏

"तुमने वही किया जो तुमने चाहा ,
मैने वही किया जो तुमने चाहा |
जीवन है ही कहाँ , निराधार साँसो
का चलना साँसो की मर्जी से ?
नाहक दोषो से बहुत कोसा है खुद को,
हकीकत अब समझने लगी हूँ |"
#जो_दिखरहा_है_वह_नही |
#हमारे_हाथ_हम_नही |

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"आपका मार्ग सही होना चाहिये
चाहे आपकी सारी पूँजी(खुशियाँ)
समाप्त हो जाये | "

"एक दिन सबकुछ छूटना ही है
बेहतर हम सही के साथ खड़े होकर
सबकुछ अपने हाथ से लुटा दे |"
#जीवन_सूत्र

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आपकी अनुपस्थिति यदि किसी के जीवन की
सुन्दर मुस्कान हो , वहाँ से पलायन ही बेहतर चाहे
वह घर आपका आखिरी ही हो |
#जीवन_सूत्र

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