जो सब का होता है,उसका कोई नहीं होता.., प्रांजल, 18/06/20,08.10A

#निर्दयी ....

ओ...निर्दयी प्रीतम..,
प्रणय जगा कर,
हृदय चुरा कर..,
गुम हुए क्यूं तुम....

फिल्म-स्त्री....,
स्वर-लता जी,
गीत-भरत व्यास..

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"पचपन खंबे, लाल दीवारें"

हजार ग़मों के बीच
बस यही एक राहत....,
बचपन की आधी-अधूरी सी
एक दिलकश याद...,
लंबे इंतज़ार के बाद...,
और इसके बाद 'नील','नीलाभ'
नाम...पसंदीदा नाम बन गए
जो आज तक हैं....
प्रांजल,
05/06/20,10.30A

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Online सा एक रिश्ता था,
हमको लगता दिल का था..,
धड़कनों का था...
कभी लगता,जनमों का था,
इक रोज ज़रा Offline क्या हुए,
जनमों का रिश्ता,
पल में ख़त्म हो गया..
प्रांजल,
10/05/20,
10.10A

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