अपनी ही तलाश में आजकल...

"सज़ा.."

मेरे देश में कुछ अपराधियों को सज़ा मिलने पर,पुलिस को बधाईयाँ दी जाती हैं,आपस में मिठाइयाँ बाँटी जाती हैं क्योंकि ये सज़ाएँ ही बहुत कम मिलती हैं...समझ नहीं आता
इस दुर्दशा पर मुझे खुशी मनाना चाहिए या अफ़सोस...
ये वो खुशी है जो अक्सर मेरी
आँखें भिगो देती है...,क्योंकि
कुछ ज़ख्म कभी नहीं भरते,
कुछ अश्क कभी नहीं रुकते,
कुछ अश्क कभी नहीं बहते,
नासूर बन कर हर पल चुभते...
प्रांजल,
06/12/19,5.35P

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कभी-कभी यूँ भी होता है...