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उलझे हुए रखते हैं
जिंदगी की उलझनों
में खुद को...

डर लगता है
के फिर से किसी से
लगाव ना हो जाये... bhavna

हमें लोग सिर्फ
परखते हैं...

पर कभी
समझते नहीं... bhavna

हम तो वहां भी मुस्कुराये
जहाँ हमें रोना था...

पास कुछ था हीं नहीं
फिर क्या हमें
खोना था... bhavna

કેવી રીતે વર્ણવુ
એને મારી લાગણી
શબ્દો માં...

એનુ દિલ પથ્થર છે.
કાગળ નથી... bhavna

दिल करता है के
खुले आसमान में उड़ लूँ...

में वो पंछी हुं
जो अपने हीं
पिंजरे में केंद हुं... bhavna

हमनें तों कभी
देखा भी नहीं
तुजे जी भर कर...

फिर क्यु लोग
बदनाम करते हैं
तेरे नाम ले कर... bhavna

यु तो हमें चाहने वाले
बहोत थे मगर
हमने उसे जिंदगी से
बढकर माना...

पर वो मेरी चाहत को
कभी ना समज पाया... bhavna

कहीं ऐसा न हो
के तुम मुझसे नजरें भी
न मिला पाओ...

मेरे सवालों के
जवाब भी न दे पाओ...

दुआ करना के अब कभी
मेरे सामने ना आओ... bhavna

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कुछ लम्हों को
सदियों में जिते हैं...

चलो आओ
इन सर्दीओ में साथ
गर्म चाय पीते हैं... bhavna