Be Natural

#अनुभव

आखिर क्या देखूँ कोई सपना
जब साथ न होगा कोई अपना
हर कदम पर देखा असली रंग
पता नहीं कैसा होता है स्वप्न का रंग
अच्छा बनकर मिला है तो वह है अनुभव
उस अनुभव से जीवन बचाने को सदैव तत्पर
🙏🏻✍🏻

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मूक हैं सब भावनायें
पर तुम्हारी हो गयी हूँ।
तुम मुझे ढूढ़ोगे कैसे,
मैं तुम्हीं में खो गयी हूँ।
मैंने खुद को अब तुम्हारा,
आईना सा कर लिया है।
वक्त से आगे निकलकर,
प्रेम तुमसे कर लिया है।
✍🏻💖

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बोलना बहुत सहज है,
मौन को साधना बहुत कठिन।
बोलने में तारे हैं, हवाएँ हैं,
मौसम में चांदनी है, धूप है, सूर्य है।
पेड़ की छाया है काया है और ये माया है ।
तुम हो तभी यह संसार है ।
बोलना च्युत होना है,
और मौन ब्रम्हचर्य है ।
✍🏻

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✍🏻

इस मन के अन्दर कुछ न रखिए
न दुख न शिकायतें,
न मिलने के वादे ,
न अपने हस्ताक्षर ,
न ही कोई अकथित विचार,
नहीं तो ये मन पकड़ा जायेगा
भावनाओं के आगोश में ।

#अकथित

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Actions are words at deeds,
Feelings untold,
Feelings unspoken,
Actions are worth better at showing.

Love is a building tool,
Hearts breaking,
Hearts leaking,
Love is still a mending wool.

Words Unspoken,
Hearts sealed,
Love leaking,
Thoughts hindering.

Words untold,
By a heart dreading,
To a heart unknowing,
For a stranger unseeing....

#Untold

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कर सिंगार प्रकृति पद्मिनी पलक उघारी,
पात पात पर लगी नाचने हो मतवारी।
आ पहुँचे ऋतुराज आज फ़िर रंग जमाने,
होंठों पर शतदल सी आभा लगी मुस्काने।
पा कोमल संदेश आम ने मौन धराया,
चिपके थे जो पात पियरे लगा पराया।
बसंत लगा मेहमान आज बगिया है महकी,
बौराये सब आम कुंज में कोयल चहकी।
स्वर्ण कलश ले हाथ खड़ी सरसों की क्यारी,
मन की फिर जगी उम्मीद देख ये आभा प्यारी।
✍🏻🙏🏻😊


#वसंत

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#प्रारंभ
प्रारंभ में लौटने की ख्वाहिश है मन में,
शुरु की गयी गृहस्थी के पूर्व के पल फिर से जीना चाहती हूं,
योगसाधना में फिर से डूबना चाहती हूँ,
फिर से अल्हड़ और फक्कड़ होना चाहती हूँ,
फिर से शुरुआत में लौट जाना चाहती हूँ ......

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भावुकता का परिणाम क्षणिक होता है,
लहरों का विकल विराम क्षणिक होता है,
मलियानिल की मंथर गति के स्वागत में,
विटपों का मौन प्रणाम क्षणिक होता है।


#भावुकता

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#निजी
समूचे के समूचे, अंतर यातना में,
अपने विषय, विश्लेषण, विवेचना में,
प्रबोधक-प्रहार या प्रपंच-परिक्रमा में,
द्वंद, संताप, पश्ताचाप, प्रार्थना में,
तुम्हारे शब्दों से पृथक
मैं समझती हूँ तुम्हें
धुंध में विलीन होती
निजी अभिव्यक्ति तुम्हारी
अपेक्षाओं के नभ में......✍🏼🙏🏻

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