तुम्हे देखा तो ये ख्याल आया, ज़िन्दगी धूप तुम घना साया.....

मैने उसको इतना देखा,जितना देखा जा सकता था
मगर दो आंखों से आखिर, कितना देखा जा सकता था...

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