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Published On : 15-Aug-2019 03:03pm

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धागे का हक़दार

पेड़ सरसरा रहे थे, कलकल बहती हुई नदी के साथ हवाएँ भी अपना रस घोल रही थी।
वहीं नदी किनारे कोई बैठा था, एक लड़का एक लड़की, वह भाई बहन थे, दोनों अपनी ज़िंदगी को कहीं दूर ले जाते हुए, अपने भविष्य की कल्पनाओं में थे, इस मौसम के साथ, जीवन की उन अनगिनत गणनाओ को लेकर जो अभी शुरू भी नहीं हुआ था।
‘हम जीवन में चाहे उम्र के किसी भी पढ़ाव पर हों, सपने हमें हमेशा नई उड़ान देते है..’
बातों बातों में वे नदी के दूसरे छोर तक जाने की बातें करते, कभी यहाँ तो कभी वहाँ..
भाई कहता मैं इस नदी को उड़ कर पार कर लूँगा, पर बहन कहती है ‘मैं तो नीचे से ही जाना चाहती हूँ, तैरकर।’
भाई - क्यों तुम्हें आसमान में उड़ना पसंद नहीं है?
बहन - पसंद तो है, मैं भी आसमान में पंछियों की तरह उड़ना चाहती हूँ।
भाई - तुम डरती हो ?
बहन - नहीं, में किसी से नहीं डरती।
भाई - तो फिर..
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Written By Yogita Warde
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1 Comments

Devesh Sony 3 month ago

👌

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