Hindi Blog videos by Kaushik Dave Watch Free

Published On : 24-Feb-2026 02:37pm

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मौसम-ए-इश्क की कोई सरहद नहीं, कोई उम्र नहीं,
नजरों के सजदे को, किसी मंदिर-मस्जिद की फिक्र नहीं।

​नज़रें मुकम्मल रखना, ये लौ तो बस जलती रहेगी,
इबादत-ए-चाहत का, कोई मौसम, कोई वक्त नहीं।

​कंधे पर रखा है हाथ, अब दुनिया से पर्दा कैसा,
रूह से रूह मिल गई, अब जिस्मों की कोई शर्म नहीं।

​यूँ ही जिक्र-ए-यार बढ़ता रहा, और फना होते रहे हम,
सदियां गुजरती रहीं, पर इस मोहब्बत का कोई अंत नहीं।

2 Comments

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Kaushik Dave Matrubharti Verified 1 week ago

धन्यवाद 🙏

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Soni shakya Matrubharti Verified 1 week ago

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