Hindi Poem videos by भावना प्रकाश Watch Free

Published On : 24-May-2020 01:17am

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छुप गए वो भाव
जो मैं असल में तुम्हे दिखाना चाहती थी।

जिनको देख कर तुम इतने घबड़ाये की
मुझसे दामन ही छुड़ा लेना चाहा
उन्ही के पार छिपी थी वो सच्चाई
जिनसे तुम्हे असल मे रूबरू होना था।

तुम्हारे माथे की उन
सहमी सिलवटों को देख कर
मैं डर गई हूँ ,अपनी ही सच्चाई से
और छुपा दिया है उन्हें एक सीप में।

नहीं , वो मोती कतई नहीं हैं
बस मेरे जीवन का हिस्सा हैं
उस जीवन का जो मैनें
सौंप दिया है सागर को
तुम्हारा नाम ले कर

पर अब उस तक पहुंचने के लिए तुम्हे
एक लंबी यात्रा तय करनी पड़ेगी
और मुझे तय करनी होगी,
असंख्य अथाह नदियों की यात्रा
जिनसे पार पाना अब संभव नहीं।

मैं जानती हूँ तुम्हे मुझसे
मेरा कुछ भी चाहिए नहीं
हाँ ,क्योंकि तुम जानते हो
मेरा अस्तित्व जरा मटमैला है
और तुम्हारा दामन पाक साफ।

भावना प्रकाश✍️

6 Comments

Vinay Panwar 1 month ago

बहुत खूब
जारी रखिये

भावना प्रकाश 2 month ago

शुक्रिया💐

shekhar kharadi Idariya 2 month ago

वाह... अति उत्तम सृजन...👌👌

Mohit 2 month ago

Amazing

Hardik Rajput 2 month ago