भावों की ये, अभिव्यक्ति शब्दों के आधार है मेरी कलम ही, मेरे अस्तित्व की पहचान है.

परीक्षा
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परीक्षा की जब घड़ी आती है जिंदगी में,।
अपनों की बड़ी याद सताती है जिंदगी में।।

कठिनायाँ भी आसान लगने लगती है।
रिश्तों की कली मुस्काती है जिंदगी में।।

सभी मुश्किलें सरल लगने लगती है।
जब तक आप की दोस्ती है जिन्दगी में।।

परीक्षा से खुद की पहचान हो जाती है।
गलतियां भी सामने आ जाती है जिंदगी में।।

अब परीक्षा से हम नही घबरातें उमा।
हर घड़ी परीक्षा ले आजमाती है जिंदगी में।।

उमा वैष्णव
मौलिक और स्वरचित

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दीपक की तरह,
रहना जिंदगी में,
मैं बाती बन जाऊंगीं,
तुम उजाला फैलाना जिंदगी में

Uma vaishnav

मेरी खामोशी,
मेरी जुबान बन गई,
मैं कुछ भी नहीं बोलती,
और वो,
सब समझ जाते हैं।
Uma vaishnav

शिव - आराधना


काल है महा काल हैं,
वो काल से विकराल हैं
कहते जिसको महाकाल,
वो मेरा शिव शंकर हैं।

खंड हैं, अखंड हैं
वो सृष्टि में विखंड हैं
कहते जिसको आदिरूप,
वो मेरा निलकंठ हैं।

गिरीश है, गिरीप्रिय हैं
वो पर्वत का वासी हैं
कहते जिसको भुजंगभूषण ,
वो मेरा गिरिश्वर हैं

अज हैं, शाश्वत हैं
वो देवों में महादेव हैं ,
कहते जिसको विश्वेश्वर,
वो मेरा महेश्वर है

उग्र हैं, रूद्र हैं
वो भूतों का नाथ हैं
कहते जिसको भूतनाथ,
वो मेरा भोले नाथ हैं

Uma vaishnav
मौलिक और स्वरचित

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जब जब मर्यादाओं
का हनन होगा।
एक पुरुषोत्तम का
जन्म होगा।
Uma vaishnav

जन्म और मृत्यु दोनों ही जीवन के दो पहलु हैं, इसलिये न जन्म के लिए खुश होना चाहिए और ना ही मृत्यु के लिए दुखी होना चाहिए। Uma vaishnav

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वक्त जब एक बार, हाथ से निकल जाता है, तो चाहे जो भी कर लो,
लौट कर नहीं आता,
इसलिए वक्त के हिसाब से जीना सीख लीजिये।

Uma vaishnav

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गजल
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ये दिल शीशे के जैसा हैं तबहा होने से डरता है ।
खिलौना हैं जो मिट्टी का फ़ना होने से डरता है।।

मिलन के बाद में अक्सर जुदाई खूब मिलती है।
भ्रमर फूलों से अक्सर ही जुदा होने से डरता है।।

बिना आराम के हम को बड़ी तकलीफ होती है।
ये दिल का रोग दिल से भी बड़ा होने से डरता है।।

वो इक बच्चा हुआ घायल, सड़क पर कार के नीचे।
अभी भी वो सड़क पर यूं खड़ा होने से डरता है।।

उमा धोखे जमाने में बहुत झेले हैं हमने भी।
यही सब सोच कर ये दिल जवा होने से डरता है।।
रचनाकार
उमा वैष्णव

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