नमस्कार वाचकहो शाळेत असल्यापासून काव्यलेखनाची आवड आहे. मात्र गेल्या 5 वर्षापासून blogs, कथा सुद्धा लिहित आहे. मायबोली, storymirror.com, facebook, instagram, Pratilipi वर लिहित आहे. मराठी,हिन्दी, English,गुजराती भाषेत लिहित आहे. आईने लावलेली वाचनाची आवड, पत्नीची प्रेरणा, मित्रांचे कौतुक आणि वाचकांचा सुयोग्य आशिर्वाद यामुळे पुनश्चा जोमाने Matrubharati वर लिहित आहे. लक्ष असू द्या. आपला नम्र सूर्यांश (suryakant majalkar)

कलम है, खंजीर नहीं कत्ल-ए-ज़िगर करने को।
तेरी निगाहों के अंदाज से हम कबके घायल हो चुके है।

तुम दौड़ी चली आती हो मेरी आगोश में।
कभी इरादों के पत्थर भी देखा करो।

कहीं गिर न जावो ठोकर खाकर ,कुछ अपना भी वजुद रखा करो।

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નવા સપનાની નવી રાત છે
આજે પ્રીતમ સાથે મારી મુલાકાત છે

वो बाल्कनी में खड़ी थी,राह निहारते हुवे।
आते जाते राहगीर ताकते हुवे।
कही गलती से हम न गुजर जाये।
शायद यहीं खयाल उसके दिल में जगा होगा।

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हालात ऐसे है की इश्क नजरबंद है।

दिल की तड़प को बेदर्द जमाना क्या जाने ।

उसने कल भी बात छेड़ी थी भरी महफ़िल में, तुमसे दिल लगाने की किमत क्या दोगे।

मैंने भी दिल से सौदा नहीं किया, तुझपे फ़िदा हुवा तो हम क्या करे।

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लो एक और किस्सा सुनाता हुँ। दो अजऩबी, बिना मिले बिछड़ गये। आँखों से जज्बात बयां करते थे।

डायरी के उस पन्ने को फ़ाड दिया है मैंने, जिसको तुम्हारे लब छु गये थे।

मौत तुम्हारी शार्गीद है।
उसे जीने का अंदाज सिखा दो।
अपनी मस्ती में वो भी डुब जायेगी।
उसे खुद को भुलना सिखा दो।

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जा रहा हुँ, अब तुझे छोड़कर।
हो सके तो अपनी यादें टटोल लेना।