एक अजनबी

सचिन तेंडुलकर के गुरू रमाकांत आचरेकर स्वर्ग चले गये है ।सचिन ने कहा है कि अब स्वर्ग में भी क्रिकेट खेला जाएगा।
यहां सुनकर नेता जी आज कल खुश नजर आ रहे है।
पुछने पर बताया कि यहां नही तो वहा तो मंत्री बन ही जाऊगा।

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न गरमी मे ,न बारिश मै,अखिर रूकते नही है मेरे कदम इन *सर्द हवाओं मे भी*
पचमढ़ी आज का तपमान 1 डिग्री सेल्सियत

दुनिया एक किताब की तरहा है।
(मैरी दुनिया मैरी लाईब्रेरी)

*सुकून की सांस* (लघुकथा)
रामकिसन की उम्र 60 वर्ष से ज्यादा होने को आई थी वह इतनी उम्र में भी हाथगाड़ी से समान बेच कर आपने परिवार का पेट अकेलेही वह भरा करता था।उनके इस काम मे उनकी कमाई तो ज्यादा नही थी पर भूखे मरने की नौबत भी कभी नही आई। उसे आपनी किस्मत से ज्यादा आपनी मेहनत पर विश्वास था,इस साल लगता था कि यहा बजार नया होने के कारण नये समान की माग रहेगी और वे यहा समान बेच कर इतने पैसे तो जुटा ही सकता है कि इकलौती बेटी की शादी अच्छी तरहा से कर सके , जब आरती पांच साल की थी तब से ही उनकी पत्नी उमा बेटी की शादी के लिए छोटे-छोटे समान जुटा रही थी ।
आखिर वहा वक्त भी आ गया जब उनकी विवाह रतनलाल से होना था।
मगर किसमत के आगे किसकी चलती है इस साल रामकिसन के उनका काम से कुछ अधिक मुनाफा नही हो सका।और घर पक रखे कुछ कीमति समान पर चौरों वे हाथ सफ़ाई कर दी।घर की हालत देख रामकिसन सिर पकक्कड़ कर बैठ गया।उसे डर था कि आगर लड़के वालों को यहा बात पता चल गई तो वे कही रिश्त ही न तोड दे,लेकिन बात कब तक छुपी रहती ,उसके पड़ोसी से रतनलाल के घर वालो को यहा बात पता चल ही गई।दुसरे दिन रामकिसन को बिना बताए रतनलाल का पुरा परिवार सगई का समान लिए उनके घर पर आ गई।उन्हे अचनाक देख रामकिसन डर गया,उनके भाव देख रतनलाल ने कहा,आपकी चिंता हम सब जनते है ।इसमे आपका कोई कुसूर नही है, मैं अब भी आपकी बेटी से शादी करने को तैयार हुँ।ज्यादा खर्च न आए इसलीए हम ने सबने मंदिर मेंचूनिदा लोगो के बीच शादी का निर्णय लिया है, यहा सुनकर रामकिसन ने सुकून की सांस ली।
( सुनिलम वरकड़े M.P)

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मै तेरी ही बेटी हुँ,ए जननी माँ वसुधंरा।

मेरा रास्ता रोकना आसंम्भव

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आपका निर्माण आप के विचार करते हैं, कोई संसाधन नही।
इसलीए आपने विचार हमेशा स्वतंत्रत रखिए।
...........SNL........

सफर इनका और मेरा
इतने सुबह-सुबह जगना उन्हे और मुझे पसंद है ।पर वो मुझ से भी जल्दी उठ जाती है, और निकल पड़ती है आपने भोजन की तलश मे मिलो दुर उसे मोसम का फार्क नही पड़ता क्या बरीश , क्या शीत सभी समान है उसके लिए।
उनका यहा कम में बचपन से देखकर सोचता हु कि रानी सुबहा से उड़कर जाती है पर श्याम होते ही फिर वापस आ जाती है ,तो एक दिन मैने पुछ ही लिया ,रानी तुम इतने दुर हमेशा जती हो आती हो तो आपना घर तुम उधर ही क्यु नही बना लेती हो।
उन्होने जवाब दिया में जने आने मे जो थकान है ,वो वापस आने मे गायब हो जाती है।मुझे यहा बहुत शंन्ति मिलती है।
मेने कहां एसा क्या है यहा पर
उन्होने कहां माँ की यादे ।
उनका जवाब सुनकर मेरे मुख से कोई दुसरा प्रश्न ही नही निकला.......

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यहा कहनी है,एक अनाथ की
जिसके जन्म के तीन महा बाद उनकी मां दुनिया से चली गयी और उनके पिता ने दुसरी नही बलकि तीसरी शादि कर ली है।
" अब वहा बालक बड़ा हो गया है, पर अब वो अपने पिता से शयद नफरत करता है।
अगर उस बच्चे के पिता का देहान्त होता तो क्या मां उस दो महा के बच्चे के होते हुए तीसरी शादी करती।
वहां बालक अब युवा हो गया है।
ये उसी की अब तक की कहनी है जो क्रमशा उनके बचपन से अब तक के उतार चड़ाव व कटो भरी बचपन की दस्ता है।
कहनी का नाम "मेरी और उनकी,

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