Best poems in English, Hindi, Gujarati and Marathi Language

میں اور میرا احسان
by Darshita Babubhai Shah
  • 18

میں اور میرا احسان Me and my kindness مرد خود جانتے ہیں۔ یہ دنیا اسے پہچانتی ہے ************************************ کچھ بھی مضبوط ہونے سے شروع نہیں ہوتا ہے۔ فتح کی ...

सीता: एक नारी - 5
by Pratap Narayan Singh
  • 32

सीता: एक नारी ॥पंचम सर्ग॥ संतप्त मन, हिय दाह पूरित, नीर लोचन में लिएमुझको विपिन में छोड़कर लक्ष्मण बिलखते चल दिए निर्लिप्त, संज्ञा शून्य, आगे लड़खड़ाते वे बढ़ेउठते नहीं थे पाँव, ...

अर्धनिमिलिप्त
by Er Bhargav Joshi
  • (19)
  • 366

                                   "अर्धनिमिलिप्त"??? ?? ??? ?? ???                ...

હું અને મારા અહસાસ - 7
by Darshita Babubhai Shah
  • 192

હું અને મારા અહસાસ ભાગ-૭ લાયક બનો,નાયક નહીં ચાહત બનો,ચાહક નહીં. ************************************ લાગણી ની છત્રી ખોલીને નીકળ્યો છું,વાદળી ની દશા જોઈને નીકળ્યો છું. ************************************ રાધા - કૃષ્ણનોઉત્કૃષ્ઠપ્રેમ. **********************

ग़ज़ल, कविता, शेर
by Kota Rajdeep
  • 82

प्रेम-जल बरशा बादल से, दरख़्त की हर पत्तियां सुनहरी हों चली हैं।अंगड़ाई लिए नई कोंपलें उठती हैं, जमीं कितनी ताज़ा हो चली हैं।___Rajdeep Kotaएक रोज़ शादाब शामों से दूर जाना होगा।ज़िन्दगी ...

માણસ
by Ronak Joshi
  • 322

છે છેલ છબીલો રંગ રંગીલો જાતભાત નો માણસ. નાત જાત ના વાડામાં ઉલઝી ગયો છે, ક્યાંક ફરિયાદ કરે છે તો કરાવે છે ક્યાંક ફરી "યાદ". "હું" થી સાચી વાતમાં ...

सीता: एक नारी - 4
by Pratap Narayan Singh
  • 100

सीता: एक नारी ॥चतुर्थ सर्ग॥ सहकर थपेड़े अंधड़ों के अनगिनत रहता खड़ा खंडित न होता काल से, बल प्रेम में होता बड़ा पहले मिलन पर प्रीति की जो अंकुरित थी ...

From Bottom Of Heart - 4
by Jiya Vora
  • 202

1.Kheriyat maat pucho hamari,Hum to sirf unhi ke khwaab mein rehte hai!Unse dur chahe kitne bhi ho fasle,Par hum to sirf unhi ke dil mein dhadak te hai! 2.थे ...

मी आणि माझे अहसास - 1
by Darshita Babubhai Shah
  • 126

मी आणि माझे अहसास भाग -१ आई " सर्वोत्तम आहे ची आवृत्ती अगोदर निर्देश केलेल्या बाबीसंबंधी बोलताना मानव । ************************************ प्रियजनांशी दुष्ट वागणे ही चांगली गोष्ट नाही । ************************************ ...

મનોમંથન
by Yakshita Patel
  • (42)
  • 474

નમસ્કાર  મિત્રો,                      મારી  પ્રથમ  રચના  "સ્વાનુભવ" , દ્વિતીય  રચના  "શુભારંભ" , તૃતીય રચના નારીશક્તિ અને ત્યારપછી આવેલ "મનનું ખેડાણ"ને આપ સૌ તરફથી ખૂબ  ખૂબ સારો પ્રતિસદ મળ્યો એ ...

और ख़ामोशी बोल पड़ी (पुस्तक-समीक्षा )
by Pranava Bharti
  • 198

और ख़ामोशी बोल पड़ी  (पुस्तक-समीक्षा ) ------------------------------------              ख़ामोशी मनुष्य-मन के भीतर हर पल चलती है ,कभी तीव्र गति से तो कभी रुक-रुककर लेकिन भीतर होती हर ...

Broken feeling with heart
by Ambaliya Anjali
  • 406

1. Don't call me!!Because I am heartless!!But please,I get an hurt,I am not an heartless!!2. I text you always;Because to talk with you:Not to get an one word answer...3. ...

सीता: एक नारी - 3
by Pratap Narayan Singh
  • 108

सीता: एक नारी ॥तृतीय सर्ग॥ स्वीकार करती बंध जब, सम्मान नारी का तभीहोती प्रशंसित मात्र तब, संतुष्ट जब परिजन सभी भ्राता, पिता, पति, परिजनों की दासता में रत रहेहोती विभूषित ...

बेनाम शायरी - 1
by Er Bhargav Joshi
  • (35)
  • 662

                        "बेनाम शायरी"??? ?? ??? ?? ???क्रूर भी है, निष्ठुर भी है, वो खुदा मेरा मगरुर भी है।"बेनाम" ...

હું કવિતા એમની...
by Hiralba Talatiya
  • 358

?નમસ્કાર મિત્રો    હું  હિરલબા તલાટીયા આપ સૌનિ સમક્ષ કવિતા લઈને આવી છુું.     આશા રાખુ છું કે આપ સૌને પસંદ આવશે ???????????????????????????????????????????????????????એક તારો વરસાદ, ને એક મારો વરસાદ ...

कविता - ‘ माँ ‘
by प्रतिभा चौहान
  • 100

  कविताएँ       १'माँ' -कविता ************#प्रतिभा_चौहान_की_कवितायेंतुम बिन इह लोक, जगत मर्माहतसूने अंचल और इन्द्रधनुष प्रेम,त्याग,क्षमा,दया की धाराधैर्य,कुशलता,धर्मपरायणजीवन रहा तुम्हारा, इठलाती, बलखातीगुण तेरे ही गाती माँन पड़ता कम ...

मे और मेरे अह्सास - 12
by Darshita Babubhai Shah
  • 192

मे और मेरे अह्सास भाग- १२ उदास मत हो lजी ले जिंदगी ll वो लम्हें ना रहे हैं lये लम्हें ना रहेगे ll तू जी रहा था जैसे lफिरसे ...

ગઝલ સંગ્રહ - ભાગ - ૬
by Pratik Rajput
  • 168

જરૂર જણાય ત્યાંજ બોલવાનું,હદથી વધુ કદી નહિ ખોલવાનું.લડાઈ હમેશા પોતાની સાથે જ,ખુદને બીજાથી નહિ તોલવાનું.સ્વાભિમાન પોતાના મનમાં જ,બીજા સામે આમ નહિ ડોલવાનું.ચકાચી લે પારકા,પોતાના સૌને,આમ જ બીજાને નહિ મોલવાનું.પ્રતીક ...

कुछ अछांदस रचनाएं
by Pranava Bharti
  • 90

(कुछ अछांदस रचनाएं)                                                      ...

एक लड़की
by Archana Yaduvanshi
  • 164

लगता था मुझ सा कोई दुखी नहीं आज देखा जो अंदर उसके झाँककरतो उस सा दुखी कोई है ही नहीं...कोई मिला उसे भी उस घड़ीदुनिया थी एक तरफ और वो ...

सीता: एक नारी - 2
by Pratap Narayan Singh
  • 200

सीता: एक नारी ॥द्वितीय सर्ग॥ मेरे लिए जो था प्रतीक्षित वह समय भी आ गयारण बीच रावण बन्धु-बांधव के सहित मारा गया कम्पित दिशाएँ हो उठीं जयघोष से अवधेश ...

Happiness - 7
by Darshita Babubhai Shah
  • 146

HAPPINESS PART- 7 Mother"  Is the best  Version of  the  Human being ************************************ Vicious behavior with love ones is not a good thing.  ************************************ If start up is vigorous ...

महारथी कर्णःभाग-१-(विषय प्रवेश एवं गुरु परशुराम द्वारा कर्ण का अभिशापित होना।)
by Manish Kumar Singh
  • 254

कौन कर्ण सा दानवीर है,इस अम्बर,धरा, रसातल में।सदा पार्थ से श्रेष्ठ रहा,वह धनुष-बाण या भुजबल में।।मधुसूदन सारथी न होते, माया अपनी ना दिखलाते।तो पार्थ जैसेे योद्धा भी,रण उससे जीत ...

કાવ્યસેતુ - 2
by Setu
  • 122

વેલવિશર ... અજાણ્યા એ વ્યક્તિએ, ન જણાતાં છતાં, સાથ નિભાવી જાણ્યો... વાતના થોડા વિસામાથી, પૂરો ટેકો આપી, સાથ નિભાવી જાણ્યો... સાચી રાહ પર, માર્ગદર્શનના મુસાફર બની, સાથ નિભાવી જાણ્યો... ...

જીદ અને અહમ
by Bharat
  • 420

નમસ્કાર મિત્રો,,,માતૃભારતી એપ પર મેં એક પુસ્તક લખ્યું છે જેનો સારો એવો પ્રતિસાદ મળ્યો, જે લોકોએ મને અને મારી રચનાઓ ને પોતાનો બહું મુલ્ય સમય આપ્યો એ લોકોનો હું ...

कविताएं
by किशनलाल शर्मा
  • 254

दिनचर्या--------------जैसेहवा,पानी,खाना जरूरी हैऐसे ही जरूरत बन गया हैअखबारइसके   बिनारहा नही जाातासुबह    उठते हीगेट की तरफ नज़रे टिकी रहती हैंअखबार  वाले के  इन्तजार मेजब तक   अखबार नही आतामन  बेचैन ...

कुछ पंक्ति
by Narendra Rajput
  • 126

"पंछी" हे ईश्वर क्या हे हमारी जिंदगानी,जेल में खाना जेल में पानी,जैसे मिली हो सजा ए कालापानी। इंसान हमें कैद करके रखते है,वजह पूछो तो बताते है, हम तुम्हे ...

सीता: एक नारी - 1
by Pratap Narayan Singh
  • 406

सीता: एक नारी ॥ प्रथम सर्ग ॥ गाथा पुरानी है बहुत, सब लोग इसको जानते वाल्मीकि ऋषि की लेखनी के तेज को सब मानते है विदित सबको राम सिय का चरित-रामायण कथा ...

फितरत इंसान की
by Ajay Amitabh Suman
  • 140

मानव के स्वभाव को दिखाती हुई पाँच कविताएँ1.फितरत इंसान कीइन्सान की ये फितरत है अच्छी खराब भी,दिल भी है दर्द भी है दाँत भी दिमाग भी ।खुद को पहचानने ...

હું અને મારા અહસાસ - 6
by Darshita Babubhai Shah
  • 218

હું અને મારા અહસાસ ભાગ ૬ પ્રેમપાગલ બની રંગાઈ જવા આવ્યાં છે,આંખોના તોફાન માં સંતાઈ જવા આવ્યાં છે ********** પ્રેમ માં બેવકૂફ બનવાની પણ મઝા છે,બાજી જીતી ને હારવાની ...