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    मेरा भारत दिखा तुम्‍हें क्‍या? - 8
    by बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

    मेरा भारत दिखा तुम्‍हें क्‍या? 8     काव्‍य संकलन-        मेरा भारत दिखा तुम्‍हें क्‍या?                वेदराम प्रजापति ‘’मनमस्‍त’’   समर्पण -- धरती के उन महा सपूतों, ...

    The girl's life is abandoned without dreams - novel end .. thanks
    by navita

    ??? thanku so much everyone ????✍️✍️✍️☺️☺️☺️✍️✍️✍️☺️☺️☺️✍️✍️✍️दुनिया अच्छी नहीं लगती जब रूठ जाते है सब दुनिया अच्छी नहीं लगती जब दर्द मिले हर तरफ दिन आये रात चली जाये ,वक़्त के साथ खुदी को ...

    पिशाच.. - 1
    by Neerja Pandey

                     आज भैरवी को घर लौटने में कुछ ज्यादा ही देर हो गई थी। टैक्सी से जल्दी से उतर तेज कदमों से ...

    इंसानियत - एक धर्म - 43
    by राज कुमार कांदु

    मुनीर के इतना कहते ही परी ने खुलकर अपनी नाराजगी का इजहार किया और मुंह फुलाकर बिसूरते हुए बोली ” ना मतलब ना ! अब आप हमें छोड़कर कहीं ...

    BOYS school WASHROOM - 17
    by Akash Saxena

    दोनों हॉल से बाहर निकलते है तो देखते हैँ की मौसम काफी ख़राब हो रहा है….जैसे तूफ़ान आने को हो….अमन और यश दोनों वाशरूम की तरफ बढ़ रहें होते ...

    तांत्रिक मसाननाथ - 17
    by Rahul Haldhar

                यमहि मन्दिर का अभिशाप ( 7 )सुबह के 9 बजे आसनसोल स्टेशन पर गोमो - आसनसोल पैसेंजर रुका । रेलिंग पकड़कर एक आदमी ...

    ममता की तुलना
    by vidya,s world
    • 66

    सुबह सुबह ब्रिजेश अपनी मां से झगड़ रहा था। मां चुप चाप अपना सिर झुकाए उसकी बाते सुन रही थी।ब्रिजेश अपने छोटे भाई जयेश की तरफ गुस्सैल नजरों से ...

    प्रेम की भावना (अंतिम भाग)
    by Jyoti Prajapati
    • 162

    भावना के जाने के दो महीने बाद सुधा ने जुड़वा बच्चो को जन्म दिया। एक बेटा और एक बेटी। सबका बड़ा मन रहा घर मे पूजा-पाठ हो जाये..! मगर ...

    विवेक तुमने बहुत सहन किया बस! - 16
    by S Bhagyam Sharma
    • 189

    अध्याय 16 डॉ. अमरदीप ऑपरेशन के कमरे से एक दीर्घ श्वास छोड़ कर थके हुए बाहर आए। पोरको के पिता तिरुचिरंमंपलम, अपनी पत्नी और तीनों लड़कियों के साथ डॉक्टर ...

    विष कन्या - 22
    by Bhumika
    • (11)
    • 342

           आगे हमने देखा की, मृत्युंजय और लावण्या जब प्रातः राजकुमारी के कक्ष में पहुंचते हे तब वहां महाराज पहले से ही उपस्थित होते हे। वो दोनो ...

    रिस्की लव - 25
    by Ashish Kumar Trivedi
    • 240

        (25)अंजन ने सागर को सबकुछ बता दिया। कैसे उसने मानवी को अपने प्यार के जाल में फंसा कर शादी की थी। उसके ज़रिए उसके भाई की दौलत ...

    मैं ईश्वर हूँ - 2
    by Satish Thakur
    • 141

    एक आवाज ,एक शब्द मुझे सुनाई दिया। आश्चर्य है इस शांत अंधकार में ये शब्द कैसा, ये आवाज क्या है। अब वो आवाज लगातार आने लगी, कुछ रुक-रुक कर ...

    कुछ चित्र मन के कैनवास से - 5 - बहाई टेम्पिल
    by Sudha Adesh
    • 117

     बहाई टेम्पिल पार्टी के पश्चात हम बहाई टेंपल गए जो 100 लिंडन एवेन्यू विलमेटि में स्थित है । इसका पहला पत्थर 19 अप्रैल में लगाकर इसका शुभारंभ किया गया किन्तु ...

    हारा हुआ आदमी (भाग30)
    by किशनलाल शर्मा
    • 168

    "तभी मुझे बताना नही चाहती।"देवेन पत्नी के चेहरे को देखने लगा"मुझे शर्म आती है।"निशा ने शर्माकर अपनी गर्दन नीचे झुका ली।"शर्म और मुझसे?अपने पति से शर्म,"देवेन पत्नी के चेहरे ...

    रामप्रसाद की तेरहवीं
    by Mahendra Sharma
    • 450

    रामप्रसाद की तेरहवीं नेफ्लिक्स पर थी पर मेरे पास सब्सक्रिप्शन था नहीं तो इंतज़ार करता रहा कि कब यह फ़िल्म मेरे सब्सक्राइब किए प्लेटफॉर्म पर आए और देखी जाए। ...

    बनारस टॉकीज-सत्य व्यास
    by राज बोहरे
    • 186

    बनारस टॉकीज उपन्यास सत्य व्यास का उपन्यास है, जिसके मुख पृष्ठ पर लखप्रति लेखक ; यानी ऐसा लेखक जिसकी कई क़िताबों की एक लाख प्रतियां बिक चुकी हों, और ...

    कर्ण पिशाचिनी - 10
    by Rahul Haldhar
    • (12)
    • 798

                            भाग - 5विवेक की मां भगवान की मूर्ति के सामने से उठ ही नहीं रही हैं । ...

    त्रिधा - 2
    by Ayushi Singh
    • 321

    अगले दिन सुबह त्रिधा कॉलेज पहुंची तो फिर संध्या उसे लेकर कॉलेज के सेमिनार हॉल में पहुंच गई जहां आज उन्हें प्रभात और एक अन्य लड़का भी मिला।" तुम ...

    बैंगन - 33
    by Prabodh Kumar Govil
    • 441

    मुझे दोपहर को सोने की आदत बिल्कुल नहीं थी। इस कारण दोपहर बहुत देर तक ताश खेलने के बाद जब भाभी ने उबासियां लेना शुरू किया तो मैंने बच्चों ...

    अनोखी दुल्हन - ( मौत का सौदागर_२) 14
    by Veena
    • 348

    आजका पुरा दिन बस खत्म होने ही वाला था। ८ बजने वाले थे, उसने अब तक वीर प्रताप को नहीं बुलाया था। यमदूत के जाने भर से ही हाथो ...

    छुट-पुट अफसाने - 36
    by Veena Vij
    • 87

    एपिसोड---36 आज मैं आपको अपने सीधे-साधे जीवन के एक अजीब मोड़ के बारे में बताती हूं, जिसकी स्मृति मुझे ऊपर वाले के करिश्मों पर हैरान कर देती है--- बात ...

    चन्द्र-प्रभा--भाग(२)
    by Saroj Verma
    • 339

    क्या हुआ? सूर्यप्रभा!आप मुझे देखकर सर्वप्रथम प्रसन्न हुई,इसके उपरांत अप्रसन्न हो उठीं, ऐसा क्या सोचा आप ने मेरे विषय में,भालचन्द्र ने सूर्यप्रभा से पूछा।।    कुछ नहीं राजकुमार,बस कुछ ...

    मैरी कविता तुम हो
    by Deepak Pradhan
    • 615

    मैने जब जब लिखा तुम्हे ही देख देख लिखा मुझे लिखने का कोई सोख नही था तुम्हे जब भी देखा मेरी अंतर आत्मा से अनेक  शब्दों की जैसे उत्पत्ति ...

    इन्तजार एक हद तक - 1 - (महामारी)
    by RACHNA ROY
    • 663

    ये कहानी सत्य घटनाओं पर आधारित है आशा करतीं हुं।आप सभी को अच्छा लगेगा।हकीम पुर गांव अब पुरी तरह से  कोलेरा महामारी की चपेट में आ गया था अब ...

    मेरी पगली...मेरी हमसफ़र - 2
    by Apoorva Singh
    • 612

    प्रीत ने डायरी वाली पॉलीथिन उठाई और उसे खोल कर उसमे रखी सभी चीजे निकाली।एक एक चीज उठाकर वो देखने लगा।एक घड़ी जो अच्छी कम्पनी की प्रतीत हो रही ...

    उजाले की ओर - 36
    by Pranava Bharti
    • 288

    उजाले की ओर  -------------- स्नेही मित्रों प्रणव भारती का नमस्कार          मनुष्य-जीवन विधाता के द्वारा विशेष प्रयोजन से बनाया गया है जिसमें न जाने कितनी–कितनी संवेदनाएँ भरी हैं ...

    कलम मेरी लिखती जाएँ - 2
    by navita
    • (13)
    • 330

        ??कलम मेरी लिखती जाएँ ??✍️✍️✍️✍️????✍️✍️✍️✍️???✍️✍️?? उड़ान  ??उड़ान भरी थे मैंने क्यों मैं सब से पीछे छूट गई क्या ये मेरी ज़िन्दगी मुझ से ही रोठ गई ...उड़ान भरी थी मैंने खुद के ...

    बेपरवाह - 3
    by Khansa
    • 435

    इस समय मे बात नही कर सकता तुमसे मेने जवाब मे लिखा । इतनी कियू नही कर सकते call करो अभी मुझे यार तुम्हे मेरी बात समझ नही अती ...

    काव्य संग्रह - भाग 1 - माँ
    by Shivani M.R.Joshi
    • 285

              मातृ दिवस विशेष माँ   पर  लिखी मेरी कुछ  कविताओं का संग्रह है  जिसे आप जरूर पढ़े वैसे अगर बात की जाए तो दुनिया का हर ...

    अतीत के गलियारें से
    by कलम की रानी
    • 315

    नींद कोसों दूर हैं आज, अतीत के गलियारे मै खड़ी जो हूँ, अतीत के पल चाँदनी रात मै आँखो के सामने नृत्य कर रहे हैं... और मै मूक दर्शक ...