Best Social Stories stories in hindi read and download free PDF

जिंदगी की शाम - सही
by Sunita Maheshwari

जब दुःख बढ़ जाता है तो अपने ही याद आते हैं, पर जब दुःख का कारण अपने प्रिय जन ही हो जाते हैं, तो फिर उसका क्या उपाय है ...

बेटियां
by Krushkumar Ashu

बेटियां भवानी प्रसाद की आंखों से नींद कोसों दूर थी। शरीर पलंग पर था मगर दिल कहीं ओर। वे समझ नहीं पा रहे थे कि आखिर वे करें तो ...

उर्वशी - 5
by ज्योत्सना कपिल

उर्वशी ज्योत्स्ना ‘ कपिल ‘ 5 नाटक को देखने के पश्चात घर आये तो मदालसा बनी हुई ऐश्वर्या से उन्हें विरक्ति हो उठी। अभी वह क्लब से लौटी थी ...

बडी प्रतिमा - 8
by Sudha Trivedi

बडी प्रतिमा (8.) अगले सोमवार को सभी छात्राएं अपने घरों से लौट आईं। उसी रात में बेबी, मीरा, नर्मदा आदि लडकियों ने योजना के तहत भारी हंगामा करना शुरू ...

आधा आदमी - 17
by Rajesh Malik

आधा आदमी अध्‍याय-17 पीछे-पीछे टीकली अम्मा भी चली गयी। ‘‘लगता हैं नया-नया बिगड़ा हैं.‘‘ दुकान में बैठे एक सज्जन ने अपने बगल वाले से कहा। ‘‘कुछ भी कहो माल ...

महामाया - 23
by Sunil Chaturvedi
  • 95

महामाया सुनील चतुर्वेदी अध्याय – तेईस ठीक एक बजने में पाँच मीनिट पूर्व बाबाजी ने समाधि पर से मिट्टी हटाने का संकेत किया। कौशिक, जसविंदर और दो अन्य लोगों ...

मेरा बचपन और ऊंट वाली तकनीक
by Anurag mandlik_मृत्युंजय
  • 47

#Blog कल रात को ही मैं अपने गांव आया ये सोचकर कि कुछ आराम करूँगा घर जाकर, पर जब मैं यहाँ आया तो कुछ अलग ही अहसास हुआ,जिसे मैं ...

होने से न होने तक - 38
by Sumati Saxena Lal
  • 92

होने से न होने तक 38. यूनिवर्सिटी की परीक्षाएं शुरु हो गई थीं और सभी काफी समय के लिए उसमें व्यस्त हो गए थे। कालेज आते हैं तो वहॉ ...

जिंदगी
by Trisha R S
  • 95

ज़िन्दगी... काले बादल छाये थे, बादलों की हल्की-हल्की फुहार दोपहरी को शाम की सुहानी छटा दे रही थी। कई महीनों के लॉकडाउन के बाद  लोग सड़कों पर दिखने लगे थे ...

गवाक्ष - 2
by Pranava Bharti
  • 50

गवाक्ष 2 मंत्री जी के मुख से मृत्यु की पुकार सुनकर दूत प्रसन्न हो उठा । ओह ! कोई तो है जो उसे पुकार रहा है । 'अब उसका कार्य आसान ...

रेप जिम्मेदार कौन?
by pratibha singh
  • 183

                      रेप- जिम्मेदार कौन?"क्या कर रहे हो बेटा।" रमा ने अपने बेटे अनुज को आवाज़ दी। "कुछ नही माँ टीवी देख रहा हूँ।" अनुज कमरे से ही चिल्ला-या।रमा चालीस साल की ...

राम रचि राखा - 1 - 1
by Pratap Narayan Singh
  • 220

राम रचि राखा अपराजिता (1) दोपहर हो चुकी थी। ध्रुव को सुलाकर मैं आफिस के लिए तैयार होने लगी थी। शान्ति खाना बना रही थी। तभी कालबेल बजा। कौन आ ...

दिव्यांग सिंगल माँ
by Darshita Babubhai Shah
  • 157

दिव्यांग सिंगल माँ आज के युग में यह शब्द नया नहीं है। यह 30 साल पहले की बात है। जब महिला की समाज में कोई हैसियत नहीं थी। नारी ...

समंदर और सफेद गुलाब - 1 - 3
by Ajay Sharma
  • 136

समंदर और सफेद गुलाब 3 मैं सोया तो था ही नहीं...मेरे मन में आया कि आंखें खोलूं और देखूं कि मुंबई आने में कितना समय बाकी रह गया है। ...

केसरिया बालम - 5
by Hansa Deep
  • 204

केसरिया बालम डॉ. हंसा दीप 5 पुनरारोपण अमेरिका, न्यूजर्सी के एडीसन शहर ने दिल खोलकर स्वागत किया उसका। इमीग्रेशन काउंटर से लेकर घर के दरवाजे तक। लैंड होने के ...

आधी दुनिया का पूरा सच - 12
by Dr kavita Tyagi
  • 268

आधी दुनिया का पूरा सच (उपन्यास) 12. रानी जहाँ बैठी थी, बिना हिले-डुले निष्क्रिय और भाव शून्य मुद्रा में वहीं पर बैठी रही । एक क्षण पश्चात् उसके कानों ...

विदा रात(भाग 4 अन्तिम)
by किशनलाल शर्मा
  • 298

"यह इल्ज़ाम नही हकीकत है,"बरखा बोली,"तुमने धारीरिक कमी को दूर करने के लिए शराब का सहारा लिया।शराब तुम्हे पुरसार्थ प्रदान नही कर सकी।तब तुम मुझसे कतराने लगे।मुझ से दूर ...

बेवकूफ-लड़का
by Ram Nagina Maurya
  • 299

बेवकूफ-लड़का सुबह-सुबह उसकी पत्नी के पेट में मरोड़ के साथ तेज दर्द उठा था, फिर शान्त हो गया। उसे ध्यान आया कि डाॅक्टरनी जी ने कहा था, ‘नवां महीना ...

उर्वशी - 4
by ज्योत्सना कपिल
  • 735

उर्वशी ज्योत्स्ना ‘ कपिल ‘ 4 वह ही है मूर्ख, जो बिन सोचे समझे जाने क्या क्या कल्पना कर रही है। उन्होंने कब उसके साथ प्रेम की पींगें बढ़ाई ...

BOYS school WASHROOM-2
by Akash Saxena
  • 144

पिछले भाग में आपने पढ़ा कि कैसे स्कूल बस में कुछ लड़के विहान को परेशान करने लगते हैं और विहान अपने बड़े भाई यश को आवाज़ लगा देता है,अब ...

जननम - 5
by S Bhagyam Sharma
  • 264

जननम अध्याय 5 आनंद को उन्हें सहलाने की भावना तीव्रता से उठी। उनके हाथ को पकड़ कर हाथ हिलाने की इच्छा हुई कि बहुत धन्यवाद बोले ऐसा लगा। वह ...

बिगुल
by Deepak sharma
  • 154

बिगुल “तुम्हें घोर अभ्यास करना होगा”, बाबा ने कहा, “वह कोई स्कूली बच्चों का कार्यक्रम नहीं जो तुम्हारी फप्फुप फप्फुप को वे संगीत मान लेंगे...” जनवरी के उन दिनों ...

आधा आदमी - 16
by Rajesh Malik
  • 129

आधा आदमी अध्‍याय-16 ‘‘पर यह सब हुआ कब?‘‘ ‘‘कल रात.‘‘ ‘‘माई कहाँ है?‘‘ ‘‘वही गई हैं.‘‘ ‘‘तो ठीक हैं भाईजान, मै बाद में आता हूँ.‘‘ कहकर ज्ञानदीप ने सेलफोन ...

महामाया - 22
by Sunil Chaturvedi
  • 134

महामाया सुनील चतुर्वेदी अध्याय – बाईस संत निवास में गद्दे पर लंबे पैर कर दीवार से सिर टिकाये निर्मला माई बैठी थी। नीचे कालीन पर आलथी-पालथी लगाये जग्गा बैठा ...

चूड़ियां
by Vandana Bajpai
  • 366

चूड़ियां न जाने क्यों आज उसका चेहरा आँखों के आगे से हट नहीं रहा है,चाहे कितना भी मन बटाने के लिए अपने को अन्य कामों में व्यस्त कर लूँ, या टी वी ...

गवाक्ष - 1
by Pranava Bharti
  • 113

गवाक्ष बसंत पंचमी दिनांक-12/2/2016 (नमस्कार मित्रो ! यह उपन्यास ‘गवाक्ष’ एक फ़िक्शन है जिसे फ़िल्म के लिए तैयार किया जा रहा था किन्तु इसके प्रेरणास्त्रोत 'स्व. इंद्र स्वरूप माथुर' ...

होने से न होने तक - 37
by Sumati Saxena Lal
  • (13)
  • 273

होने से न होने तक 37. मीनाक्षी पटोला की गाढ़े लाल रंग की साड़ी पहन कर आयी थी। बहुत सुंदर और बहुत ख़ुश लग रही थी। लाल रंग उस ...

आईना मुझसे मेरी पहली सी सूरत मांगे
by Nidhi Agrawal
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आईना मुझसे मेरी पहली सी सूरत मांगेनिधि अग्रवाल पद्मा ने उकता कर बैकस्टेज की झिरी से हाल में झाँका। तिल रखने की जगह शेष न थी। शहर के गणमान्य ...

विदा रात - 3
by किशनलाल शर्मा
  • 242

तब बरखा को एहसास होने लगा कि मात्र भावात्मक लगाव उसकी बने रहने में सहायक नही हो सकता।शारीरिक इच्छा की पूर्ति भी ज़रूरी है।इस इच्छा को पति ही पूरी ...

भूख में भी स्वाद की तलाश
by Mita Das
  • 513

भूख में भी स्वाद की तलाश मीता दास मुंबई - हावड़ा मेल जब एक बजे दोपहर को रेलवे प्लेटफार्म पर रुकी, एकाएक भगदड़ मच गई | जून माह का ...