Best Children Stories stories in hindi read and download free PDF

नकलची मोनू
by RACHNA ROY
  • 1.1k

मोनू ग्यारह साल का है और कक्षा सात का छात्र है। मोनू में एक खराब आदत है वह सबकी नकल किया करता है। चाहें वो बड़ा हो या छोटा। ...

छिपी हुई मदद
by Sandeep Shrivastava
  • 711

रघुवन में एक दिन सुबह होते ही एक आदमी और एक छोटी बच्चे प्रवेश करे | दोनों इधर उधर कुछ खोज रहे थे | दोनों कुछ परेशान लग रहे ...

दोस्ती मिलन
by Vishnu Dabhi
  • 756

            ऊंचे पहाड़ और वहां से निकल हुई नदिया, बड़े बड़े पेड़ , पौधे से भरा एक जंगल था| पक्षी ओ की मधुर संगीत ...

प्रकृति की संतान
by Sandeep Shrivastava
  • 603

कूकी कोयल सारे रघुवन में बड़ी चिंता में यहाँ वहां घूम रही थी | कभी इस पेड़ तो कभी उस पेड़ पे उड़ती बैठती थी | फिर एक घने ...

तोता और आम
by Abhinav Bajpai
  • 705

आंख खुली तो मैं चारपाई पर लेटा हुआ था। और मेरे चारों तरफ परिवार वाले मुझे घेर कर बैठे हुए थे, बाई तरफ चारपाई पर दादी बैठी सिर पर ...

ज़ेब्रा क्रासिंग
by Sandeep Shrivastava
  • 453

"रघुवन में दोपहर का समय था| झबरु ज़ेब्रा झाडिओं के बीच मजे से हरी हरी घास चर रहा था | टोनू तोता उसकी पीठ पे बैठा, अपनी चोंच से ...

कर्मफल
by Asha Saraswat
  • 852

       खेत में गेहूं काटने का समय था ।प्रतिदिन खेतों में किसान गेहूं काटते और इकट्ठे करके खेत में ही रख दिया करते ।जब खेत में गेहूं पड़े ...

शाकाहारी शेर
by Sandeep Shrivastava
  • 1.4k

रघुवन के शेर, शेरसिंह का आजकल हाल बहुत बुरा था| एक तो बढ़ती आयु के कारण पहले जैसी चुस्ती फुर्ती नहीं रही, दूसरे एक दिन शिकार करते हुए उसके ...

नमक का क़र्ज़
by Sandeep Shrivastava
  • 573

रघुवन में नदी किनारे दो पदयात्री,अपना भोजन करने के लिए बैठे थे| उनके पास भोजन से भरा हुआ एक डिब्बा था| जैसे ही उनमें से एक ने वो डिब्बा ...

शुभि (10) अंतिम भाग
by Asha Saraswat
  • 618

शुभि  अंतिम भाग            प्रार्थना में प्रधानाध्यापक जी ने बताया कि आज से तीन दिन का स्काउट शिविर लगेगा, जिन बच्चों के नाम बोले जा रहे ...

अन्तरिक्ष में पाखी
by RACHNA ROY
  • 1.1k

पाखी एक बड़ी ही प्यारी सी चंचल लड़की थी। अपने मम्मी पापा की सबसे प्यारी बेटी। इकलौती संतान थी पर कभी कोई नखरे नहीं थे पाखी के। अपने ही ...

मीठे अंगूर - खट्टे अंगूर
by Sandeep Shrivastava
  • 975

रघुवन की छोटी पहाड़ी पर जो फूलों की बगिया है, उस पर पेड़ोंपर अंगूर के रसीले गुच्छे लगे हुए थे।अंगूर खाने के लालच में उधर कई जानवरों का आना ...

मित्रता का कर्त्तव्य
by Sandeep Shrivastava
  • 1.2k

रघुवन के दो बंदर, सोनू और मोनू बहुत अच्छे मित्र थे | दोनों हमेशा साथ साथ रहते थे| उनका खाना पीना, घूमना फिरना, सोना जागना सब साथ में ही ...

शुभि (9)
by Asha Saraswat
  • 732

        शुभि (9)       आज शुभि का मन बहुत ख़राब था ,पढ़ाई में भी उसका बिलकुल मन नहीं लगा ।बार-बार उसकी ऑंखें ऑंसुओं से गीली ...

दानी की कहानी - 4 - मूल से प्यारा ब्याज़
by Pranava Bharti
  • 813

दानी की कहानी(मूल से प्यारा ब्याज़ ) --------------------------------     समय के गुजरने के साथ दानी हमें तो और भी सचेत लगती हैं | मम्मी कहती हैं ; "हमने ...

सोहबत
by padma sharma
  • 579

सोहबत पिताजी की आवाज नीरवता को भंग करती चली गई। वे जोर से चिल्ला रहे थे-"क्या कहा, तू आगे नहीं पढ़ेगा ? पढ़ेगा नहीं तो और क्या करेगा? तू ...

जुर्रत
by padma sharma
  • 570

जुर्रत कोठी कैम्पस का सन्नाटा बच्चों के शोरगुल से टूट गया। सारे बच्चे मजे करने के लिए कोठी की चहारदीवारी फांद के भीतर जा पहुँचे थेबच्चों की छुट्टियों के ...

मोर पंख
by Sandeep Shrivastava
  • 966

 रघुवन के मेरु मोर को जबसे पता चला है कि वो भारत देश का राष्ट्रीय पक्षी है तब से उसके स्वभाव की अकड़न कुछ ज्यादा ही बढ़ गई थी।हर ...

शुभि (8)
by Asha Saraswat
  • 792

    शुभि (8)        दादी जी..दादी जी..बाहर से आवाज़ आ रही थी शुभि ने बाहर जाकर देखा तो सुभाष भैया दरवाज़े पर खड़े थे ।भैया के ...

तहजीब
by padma sharma
  • 780

तहजीब शहर के प्रसिद्ध सिनेमा हॉल के सामने भीड़ जमा थी। सम्पूर्ण देशवासियों के प्रतीक के रूप में हर वर्ग, हर पेशे तथा हर धर्म के लोग यहाँ उपस्थित ...

भ्रम का भूत
by Asha Saraswat
  • 906

          भ्रम का भूत     सीमा का घर गली के अंत में था। जब कभी भी बिजली गुल हो जाती तो घर में बहुत गर्मी ...

भगवान की लाठी
by Sandeep Shrivastava
  • 1.2k

“भगवान की लाठी “रघुवन में कीटु लकड़बग्घा की धृष्टता प्रतिदिन बढ़ती जा रहीं थीं। धृष्टता क्या, सच कहें तो अपराध बढ़ते जा रहे थे। दूसरों को हानि पहुंचा कर ...

जीवन का मूलमंत्र
by padma sharma
  • 723

जीवन का मूलमंत्र "ट्यूशन की फीस तो इतनी लेते हैं लेकिन स्कूल की तरह यहाँ भी न तो पूरा कोर्स कराते, न हरेक को ठीक से समझाते हैं।" गुंजन ...

भालू का अपहरण
by Sandeep Shrivastava
  • 978

रघुवन का भोलू भालू शिकारियों के जाल में फंस चुका था| जैसे ही शिकारियों के लगाए हुए जाल पर उसने पैर  रखा एक शिकारी ने अपनी बन्दुक से रंग ...

शुभि (7)
by Asha Saraswat
  • 762

    शुभि (7)        सुबह से ही घर में चहल-पहल शुरू हो गई थी ।पिताजी एक व्यक्ति को लिस्ट देख कर सामान दे रहे थे तभी ...

एक शिकार दो शिकारी
by Sandeep Shrivastava
  • 828

रघुवन में आम के फलों का मौसम था| हर आम के पेड़ पर रस भरे आम लदे हुए थे| भूखी लाली लोमड़ी कुछ खाने की तलाश में इधर उधर ...

दानी की कहानी - 3 - गोलू--मुन्ना
by Pranava Bharti
  • 822

गोलू--मुन्ना  (दानी की कहानी ) ---------------------------      दानी की अम्मा जी भी एक स्कूल की प्रधानाचार्य थीं | पूरा पढ़ाकू माहौल ! अब भला बच्चों की तो ऐसी-तैसी होगी ही ...

डायनासौर का बच्चा
by Sandeep Shrivastava
  • 1k

रघुवन में एक दुपहर बहुत शांति थी।  रेंचो खरगोश भोजन के बाद झाड़ियों में दुबक कर झपकी मार रहा था | तभी अचानक उसे किसी के जोर जोर से ...

शुभि (6)
by Asha Saraswat
  • 729

    शुभि (6)            बहुत दिनों से शुभि देख रही थी कि घर में सब लोग व्यस्त हैं ।मॉं सुबह का नाश्ता फिर खाना ...

चमकती तितली
by Sandeep Shrivastava
  • 1.1k

रघुवन में एक चांदी जैसी चमकती तितली थी। उसका नाम था चंदा। वो फुलवारी में जाके रोज फूलों से पराग पीती और यहाँ वहां उड़ती रहती थी। सभी उसे ...