Best Biography stories in hindi read and download free PDF

तेरे शहर के मेरे लोग - 13
by Prabodh Kumar Govil

( तेरह )कभी- कभी ऐसा होता है कि अगर हम अपने बारे में सोचना बंद कर दें तो ज़िन्दगी हमारे बारे में सोचने लग जाती है। ज़िन्दगी कोई अहसान नहीं ...

मेरे घर आना ज़िंदगी - 2
by Santosh Srivastav
  • 41

मेरे घर आना ज़िंदगी आत्मकथा संतोष श्रीवास्तव (2) सातवें -आठवें दशक में जबलपुर संस्कारधानी ही था । वह मेरे स्कूल के शुरुआती दिन थे। मेरे बड़े भाई विजय वर्मा ...

मेरी जिंदगी का सफर - 2
by Devesh Gautam
  • 55

जब मैं 9वी का छात्र था तभी मेरे नाना सेवानिवृत्त हो गए और वापस गांव आ गए और साथ मे आई मेरी मामी।यहां आकर उन्होंने देखा कि ये यहां ...

तेरे शहर के मेरे लोग - 12
by Prabodh Kumar Govil
  • 376

( बारह )मेरा जीवन बदल गया था।मैं अकेलेपन की भंवर में फंस कर कई सालों तक शहर दर शहर घूमता रहा था किन्तु अब परिवार के साथ आ जाने ...

मेरे घर आना ज़िंदगी - 1
by Santosh Srivastav
  • 152

मेरे घर आना ज़िंदगी आत्मकथा संतोष श्रीवास्तव (1) ज़िंदगी यूँ हुई बसर तनहा काफिला साथ और सफर तनहा जो घर फूँके आपनो कबीर मेरे जीवन में रचे बसे थे। ...

मेरा दुखद जिवन - जनता की अदालत में न्याय की मांग
by रनजीत कुमार तिवारी
  • 81

                      ।।श्री गणेशाय नमः।।जय श्री कृष्ण,हर हर महादेव आदरणीय पाठकों मेरा सादर प्रणाम मैं रनजीत कुमार तिवारी पिता श्री ...

तेरे शहर के मेरे लोग - 11
by Prabodh Kumar Govil
  • 615

( ग्यारह )इस नए विश्वविद्यालय का परिसर शहर से कुछ दूर था। हमारे सारे परिजन शहर में ही रहते थे। और इतने सालों बाद अब यहां आकर रहने पर ...

मेरी जिंदगी का सफर - 1 - मेरी जिंदगी-जन्म से ग्रेजुएट बनने तक का सफर
by Devesh Gautam
  • 151

13 जनवरी रुद्रपुर के एक हॉस्पिटल में मेने इस दुनिया को पहली बार देखा।बहुत यादगार था वो पल लेकिन बहुत दुखदायी भी।मेरी हालत बहुत दयनीय थी।डाक्टर्स ने मुझे एमरजेंसी ...

तेरे शहर के मेरे लोग - 10
by Prabodh Kumar Govil
  • 397

( दस ) मुझे बताया गया कि पार्टी राज्य में चुनाव लड़ना चाहती है और इसकी यथासंभव तैयारी की जाए।मैंने शाम को दो घंटे का समय पार्टी के कार्यालय ...

तेरे शहर के मेरे लोग - 9
by Prabodh Kumar Govil
  • 526

( नौ )एक दिन मैं अपनी मेज़ पर ताज़ा अाई कुछ पत्रिकाएं पलट रहा था कि मेरे हाथ में "इंडिया टुडे" का नया अंक आया।इसमें एक पूरे पृष्ठ के ...

तेरे शहर के मेरे लोग - 8
by Prabodh Kumar Govil
  • 505

(  आठ )इन्हीं दिनों एक चुनौती मुझे मिली।ज़रूर ये अख़बारों के माध्यम से बनी मेरी छवि को देख कर ही मेरी झोली में अाई होगी।इस चुनौती की बात करूंगा ...

किर_दार - 4
by sk hajee
  • 252

प्रोफेसर सहाब और मै कुछ ऐसे नगिनो के किरदार के बारे मे जानने की कोशिश करते जो है सदियों से महिलाओं को प्रताड़ित करने का काम करते आए है ...

सबसे खतरनाक
by Amit Singh
  • 415

 23 मार्च ! शहीद-ए-आज़म भगत सिंह के शहादत की तिथि | यह गज़ब का इत्तेफ़ाक है कि शहादत की यही तारीख उसकी भी है, जिसने भगत सिंह के क्रांतिकारी ...

तेरे शहर के मेरे लोग - 7
by Prabodh Kumar Govil
  • 433

वीरेंद्र के अपना कला संस्थान खोल लेने के बाद मैंने अपने संस्थान का भी विधिवत पंजीकरण करवा लिया। संस्था के पंजीकरण के कारण मुझे दो - तीन बार जयपुर ...

तेरे शहर के मेरे लोग - 6
by Prabodh Kumar Govil
  • 462

( छह )  मेरे जीवन में आने वाले इस परिवर्तन का असर मेरे मित्रों, परिजनों और शुभचिंतकों पर क्या पड़ने जा रहा था, ये देखना भी दिलचस्प था। मैं अपनी इक्कीस ...

किर_दार - 3
by sk hajee
  • 338

कुछ दिन पहले ही देश का मनोरंजन विभाग याने हमारे बोलीवूड के कुछ मशहूर अदाकार हमारे बिच नही रहे, वक्त से पहले ही उनको ईश्वर/परमात्मा ने उन्हें बुला लिया, ...

तेरे शहर के मेरे लोग - 5
by Prabodh Kumar Govil
  • 469

( पांच )ये छः महीने का समय बहुत उथल - पुथल भरा बीता। मैंने अपने बैंक के केंद्रीय कार्यालय को एक वर्ष की अवैतनिक छुट्टी का आवेदन दिया, किन्तु ...

तेरे शहर के मेरे लोग - 4
by Prabodh Kumar Govil
  • 537

 ( चार  )जबलपुर में आकर मुझे ये भी पता चला कि हिंदी फ़िल्मों के मशहूर चरित्र अभिनेता प्रेमनाथ यहीं के हैं। उनकी पत्नी फ़िल्म तारिका बीना राय की एक ...

तेरे शहर के मेरे लोग - 3
by Prabodh Kumar Govil
  • 555

( तीन )एक बात आपको और बतानी पड़ेगी।बड़े व भीड़ - भाड़ वाले शहरों में रहते हुए आपकी इन्द्रियां या तो आपके काबू में रहती हैं या फ़िर अनदेखी ...

तेरे शहर के मेरे लोग - 2
by Prabodh Kumar Govil
  • 533

( दो )एक बात कुदरती हुई कि मैं जो उखड़ा- उखड़ा सा जीवन- अहसास लेकर मुंबई से रुख़सत हुआ था, वो आहिस्ता- आहिस्ता यहां जमने लगा।न जाने कैसे, मुझे ...

तेरे शहर के मेरे लोग - 1
by Prabodh Kumar Govil
  • 1.1k

( एक )जबलपुर आते समय मन में ठंडक और बेचैनियों का एक मिला- जुला झुरमुट सा उमड़ रहा था जो मुंबई से ट्रेन में बैठते ही मंद- मंद हवा ...

मेरी नजर में प्रकाशक
by Sandeep Tomar
  • 390

मेरे सरोकार(एक अन्यर्यात्रा)   एक अंश---प्रकाशकों से रिश्ते   प्रेमचंद युग में लेखक प्रकाशक के रिश्ते अवश्य ही आज से जुदा रहे होंगे। तब शायद आज जैसी स्थितियां न हों ...

आत्म कथा
by रनजीत कुमार तिवारी
  • 318

प्रिय पाठकों मेरा सादर प्रणाम, मैं रनजीत कुमार तिवारी  अपनी आत्म कथा आप लोगो से साझा कर रहा हूं।जो मेरी जिंदगी के कुछ खट्टे मीठे यादों के झरोखों से ...

किर_दार
by sk hajee
  • 605

एक ही व्यक्ति के दो किरदारों को मानना मेरे लिए बड़ा मुश्किल है, यूं कहूँ तो उसके दो किरदार मै मानता ही नही । पहले किरदार मे वह लोगों ...

पूना पलट
by Neelam Kulshreshtha
  • 752

पूना पलट [ नीलम कुलश्रेष्ठ ] [ टी वी शो ‘बिग बॉस’ की शूटिंग लोनावाला [महाराष्ट्र] में होती है जिसके होस्ट महानायक हैं। इसी शूटिंग की पृष्ठभूमि पर एक ...

प्रखर राष्ट्रवादी क्रांतिकारी व्यक्तित्व के धनी वीर दामोदर सावरकर
by SURENDRA ARORA
  • 2.6k

प्रखर राष्ट्रवादी क्रांतिकारी व्यक्तित्व के धनी वीर दामोदर सावरकर सुरेन्द्र कुमार अरोड़ा सन 1857 के वीर यौद्धाओं के बलिदान को चाटूकार इतिहासकारों द्वारा ग़दर कहने वालों को आइना दिखाने ...

कहानी पुरानी दिल्ली की
by Amar Gaur
  • (11)
  • 1.5k

सन् 2001, दीवाली जा चुकी है और मीठी मीठी सी ठंड दस्तक दे चुकी थी । रविवार का दिन था तो घर के उस समय के सबसे छोटे युवराज ...

बहीखाता - 47 - अंतिम भाग
by Subhash Neerav
  • 737

बहीखाता आत्मकथा : देविन्दर कौर अनुवाद : सुभाष नीरव 47 मलाल बहुत सारी ख्वाहिशें थी ज़िन्दगी में। जैसे कि गालिब कहता है कि हर ख्वाहिश पे दम निकले। बहुत ...

जीवन की सोच
by Shivraj Anand
  • 825

  (बाधाएं और कठिनाइयां हमें कभी रोकती नहीं है अपितु मजबूत बनाती है)  लफ़्ज़ों से कैसे कहूं कि मेरे जीवन की सोच क्या थीं? आखिर  मैने भी सोचा था ...

बहीखाता - 46
by Subhash Neerav
  • 672

बहीखाता आत्मकथा : देविन्दर कौर अनुवाद : सुभाष नीरव 46 एक लेखक की मौत चंदन साहब चले गए। कुछ दिन उनके धुंधले-से अक्स दिखते रहे। कभी फोन बजता तो ...