Hindi Stories PDF Free Download | Matrubharti

दस दरवाज़े - 22
by Subhash Neerav
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फिर मैं डेविड और जैकलीन को प्रायः एकसाथ देखता हूँ। डेविड लगभग आए दिन जैकलीन के साथ उसके घर आ जाता है। एक दिन वह मुझे पब में मिल ...

गुमशुदा की तलाश - 4
by Ashish Kumar Trivedi
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               गुमशुदा की तलाश                             (4)सरवर खान ने रंजन के रहने ...

आमची मुम्बई - 30
by Santosh Srivastav
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गोरेगाँव में ५२० एकड़ भूमि पर फैली है फिल्म सिटी जिसे ३० अप्रैल २००१ में फिल्मों के जनक दादासाहब फालके चित्रनगरी नाम दियागया है २६ सितंबर १९७७ ...

जो रोम रोम में है, उसे कैसे भूल जाऊं
by Roopanjali singh parmar
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समय और नैना एक दूसरे को कॉलेज के दिनों से जानते थे। समय उसका सीनियर था और उससे 2 साल बड़ा भी था..नैना और समय में जैसे-जैसे पहचान हुई ...

अनजान रीश्ता - 17
by Heena katariya
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पारुल सेम के पीछे जाती है तभी सेम तेजी से भागते हुए डाइनिग टेबल पे पहुंच जाता है ओर पारुल भी पीछे पीछे भागती हुयी आती है और कहती ...

लाइफ़ @ ट्विस्ट एन्ड टर्न. कॉम - 4
by Neelam Kulshreshtha
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उसका जीवन कैसा बदल गया है ? युवा उम्र में बाहर जाते समय वे हमेशा साड़ी पहना करती थी। हाँ, तब इक्का दुक्का स्लीवलेस ब्लाउज़ पहनने वालों में से ...

वो लम्हें
by Dr. Vandana Gupta
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       अनूप मुझे झिंझोड़ कर जगा रहे थे, मैं पसीना पसीना हो रही थी. आज फिर वही सपना आया था. मीलों दूर तक फैला पानी.. बीचों बीच ...

यलगार
by Dipti Methe
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       Description :  हर तरफ इंग्लिश भाषा और लहेजेने कब्जा कर रखा हैं | हिंदी - मराठी स्कूल भी बंद होने की कगार पर हैं | ईसी ...

इंद्रधनुष सतरंगा - 4
by Mohd Arshad Khan
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शाम को जब सारे लोग पार्क में टहल रहे थे तो घोष बाबू ने कहा, ‘‘आज कितना सूना-सूना लग रहा है।’’ ‘‘हाँ, सचमुच,’’ गायकवाड़ उदासी से बोले। ‘‘पंडित जी हम लोगों ...

पीताम्बरी - 1
by Meena Pathak
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घर में उत्सव जैसा माहौल था सभी के चेहरों पर उत्साह झलक रहा था बड़की चाची. रामपुर वाली चाची, पचरूखिया वाली चाची, सभी दोगहा में ...

कभी यूँ भी तो हो... - 2
by प्रियंका गुप्ता
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दो-तीन दिनो तक मेरी हिम्मत ही नहीं हुई थी सागर को फोन करने की...फिर आखिरकार फोन कर ही दिया। उसने फोन उठाया भी...बात भी की...। नाराज़ तो था, पर ...

द टेल ऑफ़ किन्चुलका - पार्ट - 9
by VIKAS BHANTI
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दुनिया तैयार थी इस बड़ी लड़ाई के लिए, पर किन्चुलका के निशान कहीं नज़र नहीं आ रहे थे । 5 दिन और गुज़र चुके थे । हर कोई हैरान ...

मन्नू की वह एक रात - 15
by Pradeep Shrivastava
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‘तो फिर क्या तुमने फिर अपने को सौंप दिया उस सुअर को।’ ‘बिब्बो और कोई रास्ता बचा था क्या मेरे लिए?’ ‘हे भगवान! क्या यही सब सुनवाने के लिए जिंदा रखा ...

माँ: एक गाथा - भाग - 2
by Ajay Amitabh Suman
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ये माँ पे लिखा गया काव्य का दूसरा भाग है . पहले भाग में माँ की आत्मा का वर्णन स्वर्ग लोक के ईह लोक तक , फिर गर्भधारण , ...

कमसिन - 18
by Seema Saxena
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बाहर पहाड़ों पर हरी घास और फल, फूल देख उसके मन को कुछ अच्छा महसूस हुया। ये प्रकृति उसे इतना क्यों लुभाती है जरूर मेरा और प्रकृति का आपस ...

तंग गलियाँ
by Swatigrover
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चाँदनी  चौक के बल्लीमरान  में  क़ासिम  जान गली  जहाँ  ग़ालिब  की  बची-कुची  हवेली  को  देखने  लोग  दूर-दूर  से  आते  है। वह  भी  रोज़  इसी ग़ालिब  की  गली  से  होकर और दो  ...

खट्टी मीठी यादों का मेला - 8
by Rashmi Ravija
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(रात में बेटी के फोन की आवाज़ से जग कर वे, अपना पुराना जीवन याद करने लगती हैं. उनकी चार बेटियों और दो बेटों से घर गुलज़ार रहता. पति ...

लाइफ़ @ ट्विस्ट एन्ड टर्न. कॉम - 3
by Neelam Kulshreshtha
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दामिनी ने मीशा को अपने पास बुला तो लिया था किन्तु उसका दिल भी काँप रहा था, कैसे ये आजकल के बच्चे इतनी जल्दी डिप्रेशन के शिकार हो जाते ...

गवाही
by राज बोहरे
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राजनारायण बोहरे की कहानी                                                                                              गवाही                 मजिस्ट्रेट साहब का रवैया देख मै हतप्रभ हो गया । वे जिस तू तड़ाक वाली भाषा में मुझसे सवाल जवाब कर रहे ...

आमची मुम्बई - 29
by Santosh Srivastav
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बदलाव फिल्म स्टूडियो में भी आया है एक ज़माना था जब आउटडोर शूटिंग नहीं के बराबर होती थी ज़्यादा से ज़्यादा शूटिंग हुई भी तो ...

फिर भी शेष - 2
by Raj Kamal
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हमेशा की तरह उस सुबह भी वही दृश्य था। हिमानी घर के चौक में आई तो जेठानी कमला ने उसे खा—जाने वाली नजरों से घूरा। जिस रात भी हिमानी ...

गुमशुदा की तलाश - 3
by Ashish Kumar Trivedi
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             गुमशुदा की तलाश                          (3)रंजन सबसे पहले जाँच अधिकारी इंस्पेक्टर सुखबीर सिंह से ...

मायामृग - 4
by Pranava Bharti
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बुखार भर से उनका इस प्रकार उठ जाना किसी के लिए भी पचा पाना कठिन था जीवन को बहुत नाप-तोलकर जीने वाले उदय की दूरदृष्टि बहुत पैनी ...

अभिषप्त ज़िन्दगी
by Rajesh Bhatnagar
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ठण्डी बर्फीली हवा जैसे ही बदन को छूती सारे शरीर में कंपकंपी-सी दौड़ जाती । मगर उससे भी ज़्यादा चन्दा बाई के अब तक ना आने से ज़ोरा का ...

आसपास से गुजरते हुए - 4
by Jayanti Ranganathan
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हॉस्टल आने के बाद भी मैं कई दिनों तक पौधों को याद करती रही। अब आई को लम्बे-लम्बे खत लिखना मेरा शगल बन गया था। विद्या दीदी और सुरेश ...

सड़क के किनारे
by Saadat Hasan Manto
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“यही दिन थे..... आसमान उस की आँखों की तरह ऐसा ही नीला था जैसा कि आज है। धुला हुआ, निथरा हुआ.... और धूप भी ऐसी ही कनकनी थी... सुहाने ...

स्पा पार्लर का सुख
by r k lal
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स्पा पार्लर का सुखआर 0 के0 लालतरुण और रवि गहरे दोस्त थे। दोनों सुख- दुख में एक दूसरे का साथ देते थे। तरुण ने कहा, - "मेरी पत्नी  ब्यूटी ...

माँमस् मैरिज - प्यार की उमंग - 12
by Jitendra Shivhare
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एक दिन सीमा को पता चला कि उसकी होने वाली सास मनोज की मां जिन्हें घर और बाहर वाले सभी 'अम्मा' कहकर बुलाते थे, वह तीर्थ यात्रा कर घर ...

प्रिया की डायरी
by vandana A dubey
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"प्रिया...रूमाल कहां रख दिये? एक भी नहीं मिल रहा."" अरे! मेरा चश्मा कहाँ है? कहा रख दिया उठा के?"" टेबल पर मेरी एक फ़ाइल रखी थी, कहाँ रख दी ...

अफसर का अभिनन्दन - 18
by Yashvant Kothari
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युवा ,रोज़गार और सरकार   यशवंत कोठारी देश भर में बेरोजगारी पर बहस हो रही है.संसद से लेकर सड़क तक हंगामा बरपा है.बेरोजगार युवाओं की लम्बी लम्बी कतारें कहीं ...