Muhabbat krni h to kitabo se kro... bewfai bhi hui to kabil bna k chhodegi...#D

जब भी दिल करे हमें बुला लिया करो,,,
हम ज्यादा दूर नहीं है बस पलकों को मिला लिया करो...#D

कभी किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता,,,
किसी को जमीं नहीं मिलती किसी को आसमां नहीं मिलता...#D

आओ कुछ दिन वहां भी ठहरते है,,,
इमारत ए मुहब्बत का दीदार करते है...#D

न मेरा दिल टूटा,,,
न किसी के नाम का बुखार है,,,
चार लाइनें शौक के लिए लिखता हूं,,,
और इसी शौक से मुझे प्यार है...#D

मेरी पसंद को भी लोग पसंद कर रहे है,,,
वो खुश है और इससे ज्यादा मुझे क्या चाहिए...#D

यूं ही नहीं है फकत मैं ही उसे चाहता हूं,,,
जो भी उस पेड़ की छाव में गया, बैठ गया,,,
उसकी मर्जी वो जिसे भी साथ बैठा ले अपने,,,
अब इसपे क्या लड़ना कि फलां मेरी जगह बैठ गया...#D

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सबके लिए बहुत हूं मैं,,,
अपने लिए जरा भी नहीं...#D

कितना सब्र हुआ करता था उस खत के जमाने में,,,
अब तो 2 मिनट देर से रिप्लाई में भी शक़ किया जाता है...#D

जब किसी के साथ उम्र भर का रिश्ता निभाना हो तो दिल में एक कब्रिस्तान बना लो, जहां आप गलतियों को दफना सको😊😊...#D

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हर एक नई सुबह,,,
एक नया मौका लेकर आती है😊😊...#D