lover by nature, writer by mind, singer by heart, indian by soul. जै श्री राम

हाय, मातृभारती पर इस कहानी 'दो बाल्टी पानी' पढ़ें
https://www.matrubharti.com/book/19877861/do-balti-pani

कई बार सोचा तुझे अब आवाज न दूँ,
तू मुझे खो देगा फिर ये खयाल आता है।

उसकी यादें कुछ इस कदर सुलगती रहीं मेरे सीने में ....
कब मेरे सारे अरमान जल गए पता हि न चला ....

एक तेरे लिए ही सीने में ये सांस बचा के रक्खी है ......
तू आये तो, मेरे हमदम फिर से तेरी खातिर मर जाऊं ....

खुदा जाने कौन सा गुनाह कर बैठे हम.....
कि तमन्नाओं की उम्र मे तजुर्बे मिल रहे हैं.....

हाय, मातृभारती पर इस कहानी 'दो बाल्टी पानी' पढ़ें
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मेरे मिज़ाज को समझने के लिए, बस इतना ही काफी है, मैं उसका हरगिज़ नहीं होता.....
जो हर एक का हो जाये।

मै क्यूँ रोता रहूँ ये सोचकर कि ....

उसने इजहार ए मुहोब्बत में हामी नहीं भरी ......

मै ये सोचकर मुस्कुराता रहता हूँ कि ....

उसने इजहार ए मुहोब्बत में ना भी तो नहीं भरी ......

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अभी जिंदा हूँ तो मिलकर गले लगा लिया करो दोस्त....
वरना मरने के बाद तो लोग छूकर भी हाथ धोते हैं....