इतना क्या सोचते हो,
छोड़ दो लब्ज़ों को खुला।
कुछ लब्ज़ पे ताले अच्छे नही लगते।

-સંદિપ જોષી સહજ

करलो तुम आज ये काम
की दे दो डर को आराम

-સંદિપ જોષી સહજ

કહ્યું ઘણું શબ્દોની સથવારે,
હવે તો સમજ હદયની ધારે.

-સંદિપ જોષી સહજ

खुद ही करले फतेह तू,
सहारे की क्या ज़रूरत।
इशारो में ही ले समज,
लब्ज़ों की क्या ज़रूरत।

-સંદિપ જોષી સહજ

रूबरू ना सही निगाहों से पीला दे,
जाम ही तो है, निगाहोंमें पीला दे।

-સંદિપ જોષી સહજ

थोड़ी सी चोरी करनी है,
दीदार से तेरे आंखे भरनी है।

-સંદિપ જોષી સહજ

वो कहते रहे के हमारे साथ हे,
ओर पिछेसे खंजर मारते रहे।

-સંદિપ જોષી સહજ

જો મળે એની પરવાનગી તો મારા હોઠો ને છૂટા મૂકી દવ,
એના અધર પર મારા અધર થી એક ગઝલ લખી દવ.

-સંદિપ જોષી સહજ

थाम ले बवंडर को,
है जब तक चाय तेरे हाथमें।
होगा मुश्किल सैलाब को रोकना,
होगी जब शराब तेरे हाथमें।

-સંદિપ જોષી સહજ

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कहने वाली ये बात नही
कोई पल नही जो तू मेरे साथ नहीं
क्या ज़रूरत है लब्स कि,
जब तू इससे अंजान नही।

-સંદિપ જોષી સહજ

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