मैं ऋषभ लेखन में छोटा मोटा प्रयास करता हूं, वास्तव में मेरी कहानियां या मेरे लेख मेरे व्यक्तिगत जीवन के या तो वास्तविक अनुभव है या स्वरचित कल्पनाएं है जिन्हें या तो मैं जीना चाहता था या कल्पना में जिया उस हालात को मैंने महसूस किया कहानी में किसी न किसी किरदार के रूप में कहानी को महसूस कर के अपनी लेखनी से आप तक पहुँचा रहा हूं कृपया पढ़े और मेरी त्रुटियों को कमेंट में अवश्य शेयर करे धन्यवाद

RISHABH PANDEY लिखित कहानी "कर्तव्य - 1" मातृभारती पर फ़्री में पढ़ें
https://www.matrubharti.com/book/19905173/kartvya-1

किसी के चले जाने से जिंदगी नही रुकती बस जाने के बाद एक खालीपन रह जाता है और जब वो याद आते है तो उनकी खुशबू सांसों में महक जाती है, ये इश्क है या कुछ और कह पाना मुश्किल है लेकिन अक्सर जीना दुश्वार कर देती है
-ऋषभ पाण्डेय

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जिंदगी में कोई एक खास जगह खाली कर जाता है जो जिन्दगी भर नही भरता,
झूठ कहते है लोग की भूल गए है ,
उसे सच तो ये होता है कि
लोग उससे दूर होने के जख्म के साथ
मुस्करा कर जीना सीख लेते है.....✍️
-ऋषभ पांडेय

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कैसे मान लू जिंदा लोगो के बीच हूँ मैं यहां हर किसी के जहन-ए-कब्रिस्तान में दफन है कुछ ख्वाहिशये कुछ सिसकियां तो कुछ अधूरी मोहबतें.....✍️
-ऋषभ पांडेय

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तेरा साथ होना और मुझमें समिट जाना कुछ चाहत सा लगता है,
मेरे हर संघर्ष, मेरे हर दुख दर्द को तेरा अपनाना सच कहूं ख़ुदा की रहमत सा लगता है,,

-ऋषभ पांडेय

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जिंदगी ने मेरी हर हार पर मुझसे पूछा: बोल अब तू क्या कर सकता है?

मैंने हर बार ही मुस्करा कर कहा: जीतू या हारू ये मेरे वश में नही, लेकिन हर बार फिर से संघर्ष को खड़ा रहूंगा ये वादा कर सकता हूँ, हां ऐसा ही हूँ मैं....✍️

-ऋषभ पांडेय

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शब्दो के चयन में गम्भीर रहिए,
ये आपके घर के वातावरण के गवाह होते है....
-ऋषभ पांडेय

सालो बाद मिली वो.....और बोली क्यों अपनी शादी में मुझे नही बुलाओगे?
बिना देरी किये मेरे मुँह से निकला- क्या तुम आओगी??
फिर हम दोनों ने एक दूसरे को देखा और अजीब सी खामोशी चारो ओर फैल गयी......
#इश्क जो मिला नही
तो मिटा भी नही....✍️
-ऋषभ पांडेय

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Beauty lies in the nature and simplicity of heart that creates adorable & awesome feeling of being loved,
ya I feel
this with you....✍🏻❤️

-RISHABH PANDEY

थक गए भागते भागते सपनो के पीछे,
अब कही तो सुकून आये,,
चाहत है दिल की समय मे वो ठहराव आये,
मैं रूठूँ बच्चे की तरह मुझे मनाने को खिलौने हजार आये,,
-ऋषभ पांडेय

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