ज़िन्दगी कविता या कविता ज़िन्दगी यही सोचते हुए उम्र के पल गुजार दिए ,जो दिल देखता सुनता है लिख देती हूं .ज़िंदगीनामा वेबसाइट है मेरी और कुछ मेरी कलम से ब्लॉग काव्यसंग्रह 2 अपने और 15 सांझे पब्लिश हो चुके हैं . पर कलम अभी भी कहती है कि बहुत कुछ लिखना बाकी है .

तुमसे मिलने से पहले

अँधेरे में डूबी किरण थी मैं
जब ज़िदगी गुजरी
तेरी राह से हो कर
तो इन्द्रधनुष से सात रंग चमकने लगे
रंजू भाटिया

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इंतज़ार
करते रहे हम इंतज़ार तुम्हारा
गुजरे लम्हे फिर ना गुज़रे
आँखो में तो भरे थे बादल
फिर भी क्यों वो ख़ाली निकले

खुशबू चाँद ,किरण, औ हवा, में
हर शे में बस तुम्हें तलाशा
पर जब झाँका दिल के दरीचां
वहाँ हर अक़्स में तुम ही निकले

गुज़रे वक़्त का साया है तू
फिर भी निहारुं राह तुम्हारी
दीप जलाए अंधेरे दिल में
तू इस राह से शायद निकले

बिखर चुकी हूँ कतरा- कतरा
अब तेज़ हवाओं से डर कैसा
फिर भी दिल मासूम ये सोचे
कि यह तूफ़ान ज़रा थम के निकले !!#साया संग्रह से .........

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मैं क्या जानूं तू बता ,
तू है मेरा कौन
मेरे मन की बात को बोले तेरा मौन

तोड़ें नहीं नाते शब्दों के तीर से ...फिर उन्हें जोड़ने में सारी उम्र गुजर जायेगी ...
क्या पता फिर जुड़े या न जुड़े यह नाते ,बात ख्वाबों की तरह उड़ जायेगी

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शोर है सब तरफ वादो का अभी
चले आओ कुछ इकरार हम भी कर लें

चुनाव बयार के झोंके इश्क़ से मौसमी होते हैं !!............@ ranju bhatia

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तय हुई ,साँसों की गिनती
प्रदूषण के ,इस काल में
कौन भरे ,इसका खमियाजा
जनता,नेता सब ही फंसे
तेरे -मेरे जंजाल में .....??
#दिल्लीपल्यूशन

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साँसे सिमटी ,मास्क में
राजनीति लिपटी, बकवास में
#दिल्लीप्ल्यूशन

आँखे जल जल, लाल भई
फेफड़े भये राख
रूकती साँसे,बोल रही
मुझे साफ़ हवा की आस
#दिल्लीप्ल्यूशन

हाय, मातृभारती पर इस कहानी 'घुमक्कड़ी बंजारा मन की - 9' पढ़ें
https://www.matrubharti.com/book/19872162/ghumakkadi-banzara-mann-ki-9

हाय, मातृभारती पर इस कहानी 'घुमक्कड़ी बंजारा मन की - 8' पढ़ें
https://www.matrubharti.com/book/19872161/ghumakkadi-banzara-mann-ki-8