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बीते वक्त को छोड़ देना अच्छा है।
मायूसियों के घेरों को तोड़ देना अच्छा है।।
जिस राह पर चलना न हो मुमकिन,उसे
एक खूबसूरत मोड़ देकर छोड़ देना अच्छा है।।
~✍️ निमिषा~

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आशियाने तो और भी थे मगर,जलाने को
उसे मेरा आशियां ही पसंद आया।।
~✍️ निमिषा~

कभी हस हस के रोता है।
कभी रो रो के हंसता है।।
मुझको भूल जाने की ,वो
कोशिशें नाकाम करता है।।
©निमिषा

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सिंहवाहिनी, सिद्धि दायनी।
ममतामय तू वर प्रदायनी।।
जग के संकट हरने वाली।
दुष्टों को भय देने वाली।।
धूम्र विलोचन नैनों वाली।
कृपा दृष्टि बरसाने वाली।।
तू महामायी,जग कल्याणी।
विपदा पल में हरने वाली।।
शत शत नमन करे ये "निमिषा"
पूरन कर दो सबकी इच्छा।।
©निमिषा

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गमों से बात होती है।
बेफिक्री में हर बात होती है।।
बड़े काम की होती हैं तनहाइयां।
यहां खुद से मुलाक़ात होती है।।
~✍️निमिषा~

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मर्ज ए इश्क का शिफा कोई तबीब न कर सका।
तमाम उम्र गुजर गई कोई हबीब न मिल सका।।
~✍️निमिषा~

हमनवां, हमसाया,हमराज बनो।
मैं कहूं न कहूं मेरे सरताज बनो।।
धडकनों को न रहे शिकायत।
कुछ देर मेरे पास रहो।।
~✍️ निमिषा~

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हसरतों में कुछ ऐसा मुकाम आया।
ना हम मर सके ना कोई साथ आया।।
~✍️निमिषा~

ज़माने की बेरुखी की आदत सी हो गई।
तन्हा थी ज़िन्दगी तन्हा ही रह गई।।
~✍️निमिषा~

मासूम वो हैं या उनके अल्फ़ाज़, खुदा जाने।
इश्क़ है या रश्क हमसे ये तो, खुदा जाने।।
इबादत में उठते हैं हाथ जब भी, मांगती हूं उसको।
मुक्कमल होगी या नहीं ये मुराद, खुदा जाने।।
~✍️निमिषा~

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