शायरो कीबस्ती में क़दम रखा तो जाना, गमो की महफिल भी क्या खूब जमती है...

खुद को समझाते थक गये...
इन यादों को कह नही पाये...
रात को अक्सर आके हम सो नही पाये...

कुछ रिश्ते भगवान तय करते है
और कुछ अगले जन्म की लेनदेन होती है...
जैसे हमारा ही रिश्ता देख लो ..
हम पहचानते किसी को नही...
पर जानते यहाँ सबको है...

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जींदगी कभी हंसने भी नही देती
ना ही रोने देती...
मै उसे ऐसे ही देखती रहती...
हर सुबह वैसे नई उम्मीद लेकर आती...
सूरज की रोशनी जैसे लेके आती...
फूल की खुशबू महेकाती...
ऐसे ही हँसाती वैसे रुलाती...

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दुआ मांगी हमने उनकी खुशियों कि...
दुआ मांगी हमने उनकी खुशियों कि...
वो हमारे नही है तो क्या हुआ?
हम तो उन्हें अपना मानते है,
वो नही जानते हमें
हम तो जान मानते है उनहे...
वो नही हँसते हमारे सामने?
हम तो मुस्कुराते है उन्हे देख..
वो नही देखते तो क्या हुआ?
हम तो नजर रखते है उन पर...
दुआ मांगी हमने उनकी खुशियाँ की...
वो खुश रहे अपनी जींदगी मे
हमेशा मुसकुराते रहे...

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ठहर गया उस दरिये का पानी,
इन्सान के आँखो मे लालच कि गहराई देख।

चाई हो या शाही हो
दोनों ठीक हो तो ही मजा आतां है
एक पीने मै,,दुसरी लिखने मै,

लिख गया वो मेरा नाम यु समंदर कि रेत मे,
मुझे वो रात के अंधेरे मै भी नजर आया!
जैसे कोई सांस आया,
वैसे ऐ याद आया!

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હ્રદય ને કયાંક તો ખુટે છે
એટલે જ વારે વારે તૂટે,..
એ કોઈ ની યાદ ને રોજ ઘુટે છે,
એટલે જ વારે વારે ચુંથે...
કયાંક તો જીંદગી ઘટે છે
એટલે જ વારે વારે છુટે...
કશુંક જરૂર એ લૂંટે છે..
એટલે જ વારે વારે ચૂંટે..

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एक सफ़र हमे भी चुना था।

तेरे घर का रास्ता जो तरह करना था।
कैसे गुजरे तेरे रह गुजरे ऐ दिल को समझाना था।
तुम्हें देखकर या अनदेखा कर निकले ऐ
फैसला करना था।
गर देखेगे तो तो कभी वहाँ से जा नही पाएंगे,
ऐ लंबा सा लगता सफ़र तय करना था।

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જીંદગી કયાં રસ્તે લઈ ગઇ
ખબર ન પડી..?
આંખો બંધ થઇ લાશ કબર મા મળી..