अपनी भावनाओं को शब्दों में ढालकर कभी कभी कुछ लिखने का प्रयास होता था तो कभी रंग भरकर चित्रों में सहेजने में आंनद आता था l पर सबकुछ कहीं खो सा गया था जिसे ढूंढने का फिर से प्रयास है l

जिसको भी अपना कहते हैं वो ही रूठ जाता है,
किसका दिल तोड़ने की ये सजा मिलती है बार बार

हम उनको दोस्त समझकर जीना सिखा रहे थे और
वो किसी की यादों का हमें दुश्मन समझ बैठे।