I'm writer, poet, portrait artist, keyboard player , linguist, struggler and a thinker man. I've written 3 novels, some short stories, 400+ poem in 4 different languages. Thank you my readers and Matrubharti for support. ================= Join me on Facebook https://m.facebook.com/mahebub.sonaliya?refid=8 ================= Take a look at Author Mahebub sonaliya (@MSonaliya): https://twitter.com/MSonaliya?s=09 =================

की टूटके भी चाँद पर निशान छोड़ आए।

जहाँ के पार तिरंगे की शान छोड़ आए।

महबुब सोनालिया
#chandrayan -2
proud for isro

ufff

Aap gulashan ko na yun pyaar se dekha kijey,

Aapko dekhta hai pyaar se sara gulshan !!

Author Mahebub Sonaliya

अप्रशस्तानि कार्याणि यो मोहादनुतिष्ठति। स तेषां विपरिभ्रंशाद् भ्रंश्यते जीवितादपि॥

भावार्थ :
जो मोह -माया में पड़कर अन्याय का साथ देता है, वह अपने जीवन को नरक-तुल्य बना लेता है।
–विदुर नीति से
🌹💐🇮🇳🕉🙏🏻मंगलमय सुप्रभात नमस्ते🙏🏻🕉🇮🇳💐🌹

💐💐 योगीराज भगवान श्रीकृष्ण की जन्माष्टमी पर हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई🌹🌹🌹🌹

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किया जो गोर मकीनों पे तो हुआ महसूस।

हरेक घर मे सुलगते मसान रहते हैं।

महबुब सोनालिया

Nothing can change you
Until you change 'nothing'
-Mahebub Sonaliya

#Reality #Life #InspirationalQuotes #Motivational
#MahebubSonaliya

હાય, માતૃભારતી પર આ વાર્તા 'લવ મેરેજ - 15' વાંચો
https://www.matrubharti.com/book/19869500/love-marraige-15

साँसों का यूँ किराया अदा कर रहा हूँ मैं
होटों पे मुस्कुराहटो को भर रहा हूँ मैं।

पैवंद सिर्फ जिस्म नहीं रूह तक में है
जैसे किसी फकीर की चादर रहा हूँ मैं।

तुम कहे रहे हो सब यहाँ महेफुज है मगर
बेटी को अपनी देखके ही डर रहा हूँ मैं।

तुम साथ धुप में जो चले यूँ लगा मुजे
साये में बादलों के सफ़र कर रहा हूँ मैं।

सहमा हुआ समां भी है दहशत है हर जगा
लगता है अपने साये से भी डर रहा हूँ मैं।

तुम आ गए तो रौनक-ए-हस्ती भी आ गयी
'महेबुब' मेरे अब ख़ुशी से मर रहा हूँ मैं।

महेबुब आर. सोनालिया।

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यूँ हम अपनी किसमत बदलने लगे हैं।

तुम्हे देखकर सिर्फ चलने लगे हैं।


वो तालीमका बोझ बच्चों को दे कर।

खयालों के पर को कुचलने लगे हैं।


मसाइल जो सुलजाने आये यहां थे।

वही तो हमे आज खलने लगे हैं।


भला अपने बच्चों को क्यों कोसते हो।

तुम्हारे कदम पर ही चलने लगे हैं।


फ़क़त इतना दस्तूर है ज़िंदगी का।

गिराते है सब को जो चलने लगे है।

महबूब सोनालिया

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તારી આંખો માં મારો વરસાદ, તારા શ્વાસોમાં હોય મારો ભેજ....
મારે મન ચોમાસું એ જ.......

ભીતર ભીતર જાણે વાગે કોઈ જીણું જંતર
મૌન ગગન છે, મૌન પવન છે, રસ્તો મુંગો મંતર.
તારી મારી વચે પ્રયતમ,સો સો ગાવ નુ અંતર.
કરું અજાવાળા પાથરી ને આજ.....

તારી યાદો નું તેજ.

સપનામાં બસ રાચે કાયમ તારા દીઠે સપના.
દીવાનાને કામ યે લાગે, જગ માટે શુ ખપના.
આ દુનિયાથી સાવ અનેરું આ જ જમા છે પાસુ
આપણી અલબેલી મસ્તીનુ આઠે પ્રહર ચોમાસું

થાય આંખોથી ગીતનો વરસાદ...
અને ભીંજાય મેજ.

મહેબુબ સોનાલિયા

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