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आज की सोच ••••

महक ने स्कूल से आकर अपना बैग मेज़ पर रखा और दौडती हुई माँ के पास रसोईघर में गयी। माँ रसोई में कुछ विशेष व्यंजन बना रही थी।महक के पूछने पर माँ ने बताया कि आज रात को गाँव से शान्ति बुआजी आ रही हैं। यह सुनकर महक बहुत ख़ुश हुई ,क्योंकि उसे अपनी बुआ से अत्यधिक लगाव था। रात को क़रीब 8.30 बजे बुआजी रेलवे स्टेशन से ऑटो पकड़कर घर आई। पापा ने उनका बैग उठाया और उन्हे अंदर लेकर गये। माँ ने उनके पैर छुए। महक को देखकर बुआजी ने उसे गले लगा लिया और कहने लगी पिछली बार आए थे, तो बहुत छोटी थी लेकिन अब बहुत समझदार हो गयी हैं।दादाजी ने उन्हे बिठाया और कुछ समय बाद पूछा कि - "क्यो शान्ति आज अचानक यहाँ आने का मन कैसे बनाया।अभी चार दिन पहले पूछा था, तो तुमने मुझसे कहा था कि खेत पर बहुत काम हैं।"

शान्ति ने कहा कि - "खेत पर तो काम हैं।लेकिन पिंकी अब बड़ी हो गयी हैं।इसीलिए उसकी शादी भी तो करनी हैं।"

दादाजी ने कहा कि - "ये क्या कह रही हो शान्ति? अभी तो वह सिर्फ़ सोलह साल की हैं।और पढ़ने में भी होशियार हैं।हमेशा क्लास मे अव्वल आती है।"

शान्ति ने कहा कि -"यह बात तो ठीक हैं।लेकिन लड़कियों को पढ़ -लिखकर भी करना, तो घर का ही काम हैं। फ़िर ज़्यादा पढ़ा -लिखाकर पैसे ख़र्च करने से क्या फ़ायदा।उसकी पढ़ाई से बचे हुए पैसों को उसकी शादी में ख़र्च कर देगे।"

पास में बैठी हुई महक दादाजी और बुआजी की बात बड़ी गौर से सुन रही थी।कुछ देर शांत रहने के बाद महक ने बुआजी से कहा कि -"बुआजी पढ़ने का उद्देश्य केवल नौकरी करना नहीं हैं। बल्कि पढ़ाई का उद्देश्य तो व्यक्ति के मानस का विकास करना हैं।अगर आप मानती हैं कि शिक्षा का उद्देश्य नौकरी ग्रहण करना हैं ,तो इसके भी कई उदाहरण आपको हमारे समाज में देखने को मिल जायेगे।क्योंकि आज लड़कियाँ डॉक्टर, इंजीनियर, प्रशासनिक अधिकारी तथा वकील बनकर हर जगह अपने पैर जमा रही हैं।और रही बात पिंकी दीदी की तो वे महज सोलह साल की हैं और अगर आप उनका विवाह करती है, तो वह विवाह एक बालविवाह की श्रेणी में आएगा ,जो हमारे देश में कानूनी अपराध हैं।बुआजी यह तो इक्कीसवीं सदी चल रही हैं। और आप इस समय ऐसी दकियानुसी सोच रखेगी तो आज की युवा पीढ़ी आपको कचरे के ढेर की तरह फेंक देगी।"
यह कहकर महक अपने कमरे में चली गयी।

महक की बात सुनकर सभी परिवार वाले अवाक रह गये।वे सभी सोचने लगे की इतनी छोटी -सी लड़की भी क्या इतनी बड़ी बात सोच सकती हैं।शान्ति बुआ को महक की बात समझ आ गयी और उन्होनें महक को अंदर जाकर गले से लगा लिया।

               नेहा शर्मा।

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श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं ⚘⚘

जय श्री राधे-कृष्ण⚘⚘

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प्रकृति की गोद में समाये तत्व हजार
हर मनुष्य के जीवन में ये खुशियाँ भरती अपार

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✍नेहा शर्मा

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लगी पाबंदियां कितनी इस बार होली में
लगा रंगरेली पर प्रतिबंध इस बार होली में
लगाकर घात चौखट पर बैठा है कोरोना
करों रंगो से तुम परहेज इस बार होली में

होली के रंगों भरी, उमंगों भरी शुभकामनाएं सभी को..

©️ नेहा शर्मा

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महाशिवरात्रि के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनायें 🏵
हर-हर महादेव🌺

विद्या: समस्तास्तव देवि भेदा: स्त्रिय: समस्ता: सकला जगत्सु।

त्वयैकया पूरितमम्बयैतत् का ते स्तुति: स्तव्यपरा परोक्ति:।।

 

अर्थ : 'हे देवी, विश्व की संपूर्ण विद्याएं तुम्हारे ही भिन्न-भिन्न स्वरूप हैं। जगत में जितनी स्त्रियां हैं, वे सब तुम्हारी ही मूर्तियां हैं। जगदम्ब! एकमात्र तुमने ही इस विश्व को व्याप्त कर रखा है। तुम्हारी स्तुति क्या हो सकती है? तुम तो स्तवन करने योग्य पदार्थों से परे हो।'

🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनायें 🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼

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कृपया मातृभारती पर प्रकाशित उपन्यास "कोरोना एक प्रेम कहानी - अन्तिम भाग" पर अपनी बहुमूल्य प्रतिक्रिया देकर अनुग्रहित करें
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Neha sharma लिखित कहानी "कोरोना - एक प्रेम कहानी - 10 - अंतिम भाग" मातृभारती पर फ़्री में पढ़ें
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