ख़ामोश लब हैं झुकी हैं पलकें, दिलों में उल्फ़त नई-नई है, अभी तक़ल्लुफ़ है गुफ़्तगू में, अभी मोहब्बत नई-नई है। अभी न आएँगी नींद न तुमको, अभी न हमको सुकूँ मिलेगा अभी तो धड़केगा दिल ज़्यादा, अभी मुहब्बत नई नई है। बहार का आज पहला दिन है, चलो चमन में टहल के आएँ फ़ज़ा में खुशबू नई नई है गुलों में रंगत नई नई है।@j

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