//वेदानां चक्षु ज्योतिष//

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जिस घर की स्त्री लक्ष्मी समान हो, पुरुष विष्णु समान हो।वह घर ही वैकुंठ हैं।

🙏 Jay siyaram🙏 उद्यमेनैव हि सिध्यन्ति,कार्याणि न मनोरथै। न हि सुप्तस्य सिंहस्य,प्रविशन्ति मृगाः॥
- भावार्थ :
प्रयत्न करने से ही कार्य पूर्ण होते हैं, केवल इच्छा करने से नहीं, सोते हुए शेर के मुख में मृग स्वयं प्रवेश नहीं करते हैं।

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🙏jay siyaram🙏
घोड़े की शोभा उसके वेग के कारण होती है हाथी की उसकी मदमस्त चाल से होती है।
नारियों की शोभा उनकी विभिन्न कार्यों की दक्षता के कारण और पुरुषों की उनकी उद्योग शीलता के कारण होती हैं।

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🙏 Jay siyaram🙏☝️सन्तोषः परमो लाभः सत्सङ्गः परमा गतिः । विचारः परमं ज्ञानं शमो हि परमं सुखम् ॥☝️

- भावार्थ :

संतोष परम् बल है, सत्संग परम् गति है, विचार परम् ज्ञान है, और शम परम् सुख है ।

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☝️न मुक्ताभि र्न माणिक्यैः न वस्त्रै र्न परिच्छदैः । अलङ्कियेत शीलेन केवलेन हि मानवः ॥☝️

- भावार्थ :

मोती, माणेक, वस्त्र या पहनावे से नहीं, पर केवल शील से हि इन्सान विभूषित होता है ।

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🙏 Jay siyaram🙏
☝️निशानां च दिनानां च यथा ज्योतिः विभूषणम् । सतीनां च यतीनां च तथा शीलमखण्डितम् ॥☝️

- भावार्थ :

जैसे प्रकाश, दिन और रात का भूषण है, वैसे अखंडित शील, सतीयों और यतियों का भूषण है ।

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https://youtu.be/Z7iFbE2Xpnk
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