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बात बस इतनी सी थी - 16
by Dr kavita Tyagi

बात बस इतनी सी थी 16. अगले दिन मेरी माता जी गाँव में चली गई । गाँव में हमारा पैतृक घर था, जिसमें मेरे एक ताऊ जी रहते थे ...

પગરવ - 42
by Dr Riddhi Mehta

પગરવ પ્રકરણ - ૪૨ વીણાબેન સવિતાબેનનાં ઘર પાસે પહોંચ્યાં તો ઘરની બહાર મોટું તાળું લટકી રહ્યું છે‌. એમણે આજુબાજુ નજર કરી. બાજુમાં રહેલા એક બેનને નાછુટકે એમણે પૂછ્યું. તો ...

दास्तानगो - 6 - अंतिम भाग
by Priyamvad

दास्तानगो प्रियंवद ६ एटिक में अब अंधेरा था। बुढ़िया ने चरखे पर काता हुआ सूत समेटना शुरू कर दिया था। अंधेरे में ही वामगुल स्टूल पर बैठ गया। पुल ...

મહત્વકાંક્ષા
by Dhaval

            જગતના પ્રત્યેક માતા-પિતાની એવી ઇચ્છા હોય છે કે પોતાનું સંતાન પછી ભલે તે પુત્ર હોય કે પુત્રી ભણીગણીને હોંશિયાર બને. સારી નોકરી મેળવીને પગભર ...

आवारा अदाकार - 2
by Vikram Singh

आवारा अदाकार विक्रम सिंह (2) सही मायने में वह सुबह में दिखती ही नहीं थी। क्योंकि वह सुबह देर से उठती थी। दरअसल वो सुबह से ही उसे तलाशने लगता था। ...

लीव इन लॉकडाउन और पड़ोसी आत्मा - 3
by Jitendra Shivhare

लीव इन लॉकडाउन और पड़ोसी आत्मा जितेन्द्र शिवहरे (3) दरवाजे की डोर बैल बज रही थी। टीना ने मैजिक आई से झांक कर देखा। बाहर किराना सामान लेकर एक ...

રાજકારણની રાણી - ૧૬
by Mital Thakkar

રાજકારણની રાણી       - મિતલ ઠક્કર તથા રાકેશ ઠક્કરપ્રકરણ-૧૬    સુજાતા પતિની કરતૂતોથી વાકેફ હતી. બીજા કોઇ સંજોગો હોત તો એને ટીના સાથે રંગેહાથ ઝડપી પાડયાની જાહેરાત કરી હોત. ...

विभाजन - 7
by Ankush Shingade

विभाजन (कादंबरी) (7) धुळ्यात प्लेगच्या साथीचा बंदोबस्त करताना प्लेग कमिशनर रँड याने जुलूम जबरदस्ती केली. त्याचा बदला म्हणून दामोदर व बाळकृष्ण चापेकर बंधूंनी २२ जून १८९७ रोजी रँडचा वध ...

आद्यक्रांतिवीर और हमारी जिम्मेदारी
by Subhash Mandale

आद्यक्रांतिवीर और हमारी जिम्मेदारी भारत के इतिहास में कई ऐतिहासिक घटनाएं हुई हैं, जिनमें से कुछ दर्ज की गई हैं, जिनमें से कुछ पर किसी का ध्यान नहीं गया। ...

मन्नतों का घर
by Dr Vinita Rahurikar

मन्नतों का घर मंदिर तक ऊपर अब तो गाड़ी आज आने लगी है। एकदम मंदिर के सामने तो नहीं लेकिन नीचे के मोड़ तक। पहले तो बड़ी सड़क के ...

छोटी मछली
by padma sharma

छोटी मछली   होटल से निकल कर मनेन्द्र ने दूर तक जाती सड़क का जायजा लिया । सड़क के एक ओर दुकानों की लंबी कतार थी। दुकानों के ऊपर ...

लहराता चाँद - 3
by Lata Tejeswar renuka

लहराता चाँद लता तेजेश्वर 'रेणुका' 3 माथेरान से लौटने के बाद से संजय को रम्या में बहुत बदलाव महसूस हुआ। कभी खोई-खोई नज़र आती तो कभी वह किसी भी ...

అరుణ చంద్ర - 1
by BVD.PRASADARAO

  రచయిత : బివిడి ప్రసాదరావు   ఎపిసోడ్ 1   "శరణం శ్రీ షిర్డీసాయిబాబా" అని, మలి నమస్కారం చేసి, పూజా గది లోనించి బయటకు వచ్చింది అరుణ.హాలులో తన అమ్మ, నాన్న ఉన్నారు.వాళ్లు ఆనందంగా కనిపించారు.వాళ్ల కాళ్లకు ...

उलझन - 6
by Amita Dubey

उलझन डॉ. अमिता दुबे छः अंशी ने जैसे कुछ सुना ही नहीं आगे बताने लगी - ‘एक दिन एक अंकल जी को मुहावरा मिला - ‘थाली का बैगन’ वे ...

गूगल बॉय - 10
by Madhukant

गूगल बॉय (रक्तदान जागृति का किशोर उपन्यास) मधुकांत खण्ड - 10 मशीन ख़रीदने के लिये गया तो गूगल अपने साथ एक गिन्नी भी ले गया। दुकान का सामान ख़रीदकर ...

हरवलेले प्रेम........#०२.
by Khushi Dhoke

इकडे सकाळी लवकर फ्रेश होऊन...... हृषिकेश टेडी सोबत बोलत बसतो......तो रेवा समजूनच बोलत असतो हृषिकेश : "I will never bother you....if you are not interested to talk.......But, baby please ...

डर
by HARIYASH RAI

डर बहुत परेशान से लग रहे थे धनंजय नागर यहाँ आकर। जब-जब वे जामनगर आते तब-तब बहुत उत्साहित और प्रफुल्लित रहते। वे उन गलियों में जाते जहाँ वे अपने ...

टोहा टोही
by Deepak sharma

टोहा टोही ड्राइवर नया था और रास्ता भूल रहा था| मैंने कोई आपत्ति न की| एक अज़नबी गोल, ऊँची इमारत के पोर्च में पहुँचकर उसने अपनी एंबेसेडर कार खड़ी ...

Kanu Patel's Journey of Creativity:
by Abhijit Vyas

Kanu Patel's Journey of Creativity:   -     Abhijit Vyas         When a person intends to create a form of art, he/she selects a medium to fulfill ...

जिंदगी मेरे घर आना - 13
by Rashmi Ravija

जिंदगी मेरे घर आना भाग – 13 नए सिरे से किताब में मन लगाने की कोशिश कर ही रही थी कि बुआ आती दीखीं। हाथ में उनके एक फोटो ...

इक समंदर मेरे अंदर - 15
by Madhu Arora

इक समंदर मेरे अंदर मधु अरोड़ा (15) वसई का यह घर बीच बाज़ार में था। खासी चहल पहल रहती थी रात के ग्‍यारह बजे तक। ज़रूरत की सभी चीज़ें ...

BOYS school WASHROOM - 5
by Akash Saxena

हर्षित, विशाल और राहुल प्रिंसिपल रूम से रोते हुए ही बाहर जाते हैँ तो उनकी रोनी शक्लो को देखकर पेओन उन पर तंज कस्ता है.. 'लगता है भईया हो ...

गवाक्ष - 33
by Pranava Bharti

गवाक्ष 33== अक्षरा काफी संभल चुकी थी किन्तु यह कोई भुला देने वाली घटना नहीं थी । उसके साथ  जो दुर्घटना हो चुकी थी, अब उसमें बदलाव नहीं हो सकता था लेकिन इसके ...

એક નવી પ્રથા.દત્તક મા.
by Bharti Bhayani

   દત્તક માયશોદાબહેનમાં નામ મુજબ ગુણ.દરેક બાળકમાં કાનો દેખાય.બધાયને વહાલ કરે અને બનતી મદદ પણ કરે.એમને પોતાને એક દીકરો આકાશ.પોતે પતિના અવસાન બાદ આકાશને માતા પિતા બન્નેનો પ્રેમ આપ્યો ...

चार चतुर की बेकार कथा
by Mukesh Verma

चार चतुर की बेकार कथा वे चार थे। चारों बेकार थे। पहिले वे ऐसे नहीं थे। बचपन से ही सबके अपने कारोबार थे, जहाँ कहीं कभी कोई ना तो ...

યોગ-વિયોગ - 49
by Kaajal Oza Vaidya

યોગ-વિયોગ કાજલ ઓઝા વૈદ્ય પ્રકરણ -૪૯ સૂર્યકાંત છાતી પર ડાબી તરફ હાથ દબાવતા ઊભા થવા ગયા, પણ જમીન પર ફસડાઈ પડ્યા... યશોધરા, શૈલેષ, દેવશંકર, ગોદાવરી, અજય, અભય, અલય, વસુંધરા, ...

आवारा अदाकार - 1
by Vikram Singh

आवारा अदाकार विक्रम सिंह (1) ’’मुश्किलें दिल के इरादे आजमाती हैं, स्वप्न के परदे निगाहों से हटाती हैं। हौसला मत हार गिरकर ओ मुसाफिर,ठोकरें इन्सान को चलना सिखाती हैं। ...

दास्तानगो - 5
by Priyamvad

दास्तानगो प्रियंवद ५ हिनहिनाहट, कार के इंजन, आदमियों की चीखें, लगाम पफटकारने और तराशे हुए खुरों के पटकने की आवाजें खत्म हो जाने के बाद पाकुड़ ने बाहर के ...

विभाजन - 6
by Ankush Shingade

विभाजन (कादंबरी) (6) अशातच एक दिवस टिळक मृत्यू पावल्याची बातमी कानावर आली. सारा देश हरहळला. देशानं एक नेता गमावला. भारतीय नेत्यांसह इंग्रजही हळहळले. कारण ज्या माणसानं स्वराज्य हा माझा ...

30 शेड्स ऑफ बेला - 20
by Jayanti Ranganathan

30 शेड्स ऑफ बेला (30 दिन, तीस लेखक और एक उपन्यास) Day 20 by Sonali Mishra सोनाली मिश्रा चांद भी अकेला है अबूझ पहेली बनती जा रही है पद्मा। ...

बात बस इतनी सी थी - 15
by Dr kavita Tyagi

बात बस इतनी सी थी 15. सुबह आँखें खुली, तो माता जी अकेली ही घर की सफाई में लगी हुई थी । मंजरी नहा-धोकर पूजा की तैयारी कर रही ...

पहला कदम
by Pavitra Agarwal

पहला कदम पवित्रा अग्रवाल आज बुआ फिर आई थीं. बुझा बुझा सा मन, शिथिल सा तन, भावहीन चेहरा देख कर मैं दुखी हो जाती हूँ. जब फूफाजी जीवित थे, ...