घूँघटवाली लड़की

किसी रीसर्च के सिलसिले में रोहन रामपूर नांमक गाँव में आया था। गाँव बहुत पूराना था।

वहा ठहरने के लिए कोई होटल तो थी नहीं। और ना ही कोई गाँव वाला किसी अंजान व्यक्ति को अपने घर में रहने देता।

काफी देर इदर-उदर भटकने के बाद रोहन को एक लड़की आती हुइ नज़र आई।उसने चेहरे पर लम्बा घूंघट निकाला हुआ था।

रोहन ने उसे रोक कर पूछा..

रोहन:- ....अरे ...इस गाँव में किसी अंजान मुसाफिर को रूकने की कोई जगह मिलेगी??

लड़की कोई जवाब नहीं देती हैं थोड़ी दूर जा कर एक गेस्ट हाउस की तरफ इसारा करती हैं । रोहन गेस्ट हाउस देख कर बहुत खुश हो जाता है। जैसे ही उस लड़की को थैंक्यू कहने के लिए पीछे मुडता है,तो वो लड़की वहा से जा चुकी होती हैं

उसे थोडा अजीब लगता हैं,पर रहने की जगह मिल जाने की खूशी में वह सब़ पर ध्यान नहीं देता।

वह गेस्टहॉउस की तरफ बढता हैं देखने में ऐसा लगरहा था जैसे किसी पूरानी हवेली को गेस्ट हाउस में बदल दिया गया हो। रोहन हवेली में पहुचता हैं रिसेप्सन पर कोई नज़र नहीं आता हैं

रोहन:-हैलो.....कोई हैं यहा ???...

तभी अंदर से लम्बा-सा दिखनेवाला एक आदमी बाहर आता है सिर पर पगड़ी बंधी थी, चहरे पर दाड़ी-मूछ थी दिखने में अकडू लग रहा था ।भारी आवज में बोलता है:-

मेरा नाम बहादुर है, मैं ही यहा की देख-भाल करता हुँ तूम्हे क्या चाहीए ?

रोहन :- कोई रूम मिलेगा ??

बहादुर: - हॉ, मिल जाएगा।

एक चाबी उस के हाथ में थमा कर कहता हैं " सीढीयाचढ़ते ही पहला कमरा है,

रोहन धन्यवाद कहते हुए कहता हैं, "कुछ खाने के लिए मिलेगा...?

बहादुर:- तुम चलो मैं भीजवाता हूँ।

रोहन चाबी लेकर रूम में पहुच जाता है, रूम काफी बड़ा और पूराने तरी के से सजा हुआ था। उस की तीनों दीवारें सजी थी पर एक दिवार बिल्कुल खाली थी । अजीब सा खीचाव महसूस कर रहा था, वह धीरे-धीरे दिवार की तरफ बढ़ता हैं,तभी पीछे से किसी के चलने की आवाज़ आती हैं, रोहन मुडकर देखता है, तो सामने वही घूंघटवाली लड़की हाथ में ट्रेे लिये खड़ी थी।

रोहन आगे बढ़ कर " तूम वही होना जो बहार मिली थी।"

वह औरत ट्रे को टेबल पर रख कर बीना कुछ जवाब दिये चली जाती हैं

अगले दिन रोहन जल्दि उठ कर रिसर्च के लिये गाँव के बाहर स्थित पूराने मन्दिर की तरफ जाता है रोहन कुछ पूराने खण्डर की फोटो ले रहा था कि उसे वह घूंधट वाली लड़की फिर दिखती हैं,रोहन उस देख उस के पीछे -पीछे जाता है, पर कुछ दूर जाने पर वह लड़की पता नहीं कहाँ घायब हो जाती हैं, रोहन असमझस में पड़ जाता है कि आखीर वह औरत है कौन ??

रोहन उस लड़की का पीछा करते-करते गाँव में पहूँच जाता है सभी गाँव वाले उसे अजीब नज़रो से देखते हैं,रोहन एक दुकान पर जा कर पानी की बोतल लेता हैं ,वह दुकानवाला भी उसे अजीब सी नज़रो से गुरता हैं,रोहन से रहा नही गया,वह दुकान वाले से पूछता है,"क्या हुआ है सब को, मै जब से गाँव में आया हुँ तब से सभी मुझे ऐसे गुर रहे हैं जैसे के मैं कोई भूत हूँ।"

इस पर वह दुकानदार कहता हैं,"तूम उस हवेली में ठहरे होना।"

रोहन:-हवेली, .....कौन-सी....??

दुकानदार:- वही जहा तू ठहरे हो।

रोहन:- ......पर वह तो गेस्ट हाउस हैं ना

दुकानदार:- .....किस भ्रम में हो .....वहा कोई गेस्ट हाउस नही हैं......वहा तो क्या....इस पूरे गाँव मे भी कोई गेस्ट हाउस नही हैं।

दुकानदार की बात सुन कर रोहन सोच में पड़ जाता है.... दुकानदार कहता हैं

"आज तक कोई भी उस हवेली से जिन्दा वापस नहीं लौटा .....तुम पहले आदमी हो जो उस हवेली से जिन्दा वापस लौटे हो,इसलिए ही सभी गाँव वाले तूम्हे इस तरह देख रहे थे । वो घूंघटवाली लड़की किसी को भी जिन्दा नहीं छोड़ती है।

रोहन:- घूंघटवाली लड़की...., पर वो...उस ने तो मेरी मदद की थी.....इतना ही नहीं.... वो मेरा ख्याल भी रखती हैं

दुकानदार की बात को वहम् समझ रोहन वापस गेस्ट हाउस की तरफ लौट जाता है, पर वहा पहुँने पर क्या देखता है कि उस गेस्ट हाउस की जगह एक पुरानी सी हवेली नजर आती हैं, यह देख रोहन थोडा डर जाता है, और मन ही मन सोचता हैं कि क्या गाँववाले जो कह रहे थे वो सच था।....इतना सोच वह सच्चाइ जानने के लिए आगे बढ़ता है, रोहन हवेली में पहुँच कर बहादुर को आवाज़ लगाता हैं.......बहादुर......, बहादुर,....

कहा हो तुम ,.....मेरा समान कहा हैं,.....,वो घूंघटवाली औरत कौन है...??

तभी वह घूंघटवाली लड़की सीढीया से उपर की तरफ जाती हुइ नज़र आती हैं,रोहन उस के पीछे-पीछे जाता है और उसी कमरे में पहुँच जाता है जहा वह ठहरा था।

अचानक वह घूंघटवाली लड़की चलते-चलते रूक जाती हैं, रोहन उस के करीब जाकर उसे छुने की कोशिश करता हैं पर छु नही पाता है वो फीर से हाथ पकड़ने की कोशिश करता हैं पर पकड़ नहीं पाता,तभी जोरो की हवा आती हैं... और ..,उस औरत का घुंघट उड़ जाता है रोहन उस के चेहरे को देख लेता हैं, ...और उसे देखता ही रह जाता है उसे देख ऐसा लग रहा था मानो सदीयो से उसे जानता हो।

रोहन :- कौन हो तुम....? ऐसा क्यू लगता हैं, जैसे हम एक - दूसरे को सदीयो से जानते हो।

इस पर वो लड़की बोलती है:- किशन, तुम ने मुझे नहीं पहचाना, मै तुम्हारी नदंनी.....याद करो किशन.....वो पूराना मंदिर जहा हम मिलते थे

रोहन:- मुझे कुछ याद नहीं आ रहा .....क्या कह रही हो तुम ??,......आखीर हो कौन तुम ...?

तब वह लड़की रोहन को अपने साथ आने को कहती हैं,वह उस खाली दिवार की तरफ जाती हैं,तभी वह दिवार अचानक दरवाजे की तरह खुल जाती हैं,रोहन उस लड़की के पीछे-पीछे उस दिवार के पीछे वाले रूम में पहुच जाता है, वहा एक दिवार पर नंदनी की पेंटीग लगी थी,जिसे देख कर उसका सर चक्कराता हैं ,किशन .....किशन की आवाज़े गूंजने लगती हैं, एक चलचित्र-सा आँखो के सामने छा जाता है, रोहन को अपना पीछला जन्म याद आ जाता है

उस जन्म में रोहन का नाम किशन होता है और वो घूंघटवाली लड़की कोई ओर नहीं नंदनी होती हैं। नंदनी और किशन एक-दूसरे से बहुत प्यार करते थे। दोनो एक-दूसरे पर जान छिड़कते थे। वो दोनो अक्सर गाँव के उस पूराने मंदिर के पास मिलते थे।

पर नंदनी के भाई को उन का प्यार मंजूर नहीं था क्यू कि किशन एक बंजारे का बेटा था, और नंदनी तो राजघराने की थी।

जब नंदनी के भाई को उन दोनो के प्यार के बारे में पता चलता हैं तो वो किशन और उस के परिवार को गाँव छोड़ कर जाने को कहता हैं, पर किशन उस की बात नहीं मानता हैं,वो गाँव छोड़ के जाने से इन्कार कर देता हैं, नंदनी का भाई उसे जान से मारने कि धमकी देता हैं, ये बात जैसे ही नंदनी को पता चलती हैं वो किशन को तुरन्त उस पूराने मंदिर के पास मिलने आने को कहती हैं

नंदनी लाल जोड़े में सज कर हाथो में मंगलसूत्र और सिन्दूर लिए वहा पहुँचती हैं, किशन भी वहा पहुँच जाता है,

तभी नंदनी का भाई वहा कुछ गुंडो के साथ पहुँच जाता है, और किशन को चारो तरफ से घेर लेता हैं, नंदनी जैसे हि किशन की तरफ बढ़ती हैं तो उसका भाई उसे हाथ पकड़ के उसे घसीडता हुआ। गाड़ी में बिठाकर हवेली ले जाता है ।

उधर वो गुण्डे़ किशन को जान से मार कर मंदिर के पास वाले तलाब में फैक कर हवेली आते हैं और नंदनी के भाई से कहते हैं कि हम ने किशन को जान से मार दिया। नंदनी ये बात सुन लेती हैं,वो अपने भाई से कहती हैं :-

"जीते- जी तो तुमने हमें मिलने नहीं दिया, पर मरने के बाद कैसे रोकोगें। मैं किशन को उसी रूप में मिलूगी जिस रूप में उसने मुझे आखरी बार देखा......दुल्हन के रूप में घूंघट निकले उसका इन्तजार करूगी।"

इतना कह कर वह अपने कमरे में जाकर चाकू से अपने हाथ की नशें काट लेती हैं तभी उस का भाई नंदनी के पास आता है,और कहता हैं :-

" मैं भी राजघराने से हूँ,आज मैं तुम से वादा करता हूँ मेरी जिद्द की वज़ह से मैंने अपनी लाडली बहन को खोया हैं,अब अगले जन्म में, मैं ही तुम दोनो को मिलाऊगा।"

इतना कह कर वो भी अपनी जान लेलेता है

बहादुर ओर कोई नहीं नंदनी का भाई होता हैं, किशन की आत्मा तो मंदिर के तलाब के पानी के कारण मुक्त हो कर रोहन के रूप में पून: जन्म लेती हैं, पर नंदनी और बहादुर की आत्मा अब तक किशन का इंतजार करती हैं

इतना सब अपनी आँखो के सामने देख,रोहन को ऐसा लगता हैं जैसे कुछ ही पल में एक पूरी जिन्दगी जी गया हो। रोहन को सब याद आ जाता हैं,तब रोहन कहता हैं:-

" पर तूम तो एक आत्मा हो, ओर मैं एक जीता-जागता इंसान......हमारा मिलन कैसे हो सकता हैं......इसके लिए तुम्हे इंतजार करना पड़ेगा।"

तब नंदनी कहती हैं:- जहा इतना इंतजार किया वहा कुछ दिन ओर सही।

तभी रोहन के पीछे से कोई वार करता हैं,वो ओर कोई नहीं ......बहादुर होता हैं,बहादुर कहता हैं :-

"पीछले जन्म में मैंने तूम्हें अलग करने के लिए मारा .....पर इस जन्म में तूम दोनो को मिलाने के लिए मारा.....अब मेरी आत्मा को मुक्ती मिल जाएगी।"

इतना कह कर बहादुर की आत्मा मुक्त हो जाती है,और रोहन और नंदनी की आत्मा का मिलन हो जाता है

समाप्त


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बहुत सुन्दर..👌👌

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Hamir Chavda 2 month ago

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Smita 2 month ago

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Anandi 2 month ago

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ritu agrawal 2 month ago