एक कदम आत्मनिर्भरता की ओर - भाग - 3

आधुनिक युग के इस स्पर्धा में हर कोई मशीन की भाँति बस भागता जा रहा है। हर ओर धमाका चौकड़ी "बस तीव्र गति से भागता हुआ यह युग यंत्रवत बनता जा रहा है, किसी के पास किसी के लिए वक्त नही ं। जब समय मानव का साथ दे तो जिंदगी के क्षण पवित्र आशीर्वाद सा लगने लगता है और जो साथ न दे तो " मानो जिंदगी बोझ लगने लगती है " ऐसे ही झंझावातों को स्वीकारती क्षमा जब पहली बार युनिवर्सिटी में पढने आयी तो अकस्मात ही सबका ध्यान उसकी ओर आकर्षित हो गया। "सुंदरता की अप्रतिम मूर्ति"" कानों में बड़े बड़े कुंडल, ललाट पर लंबी सी बिंदी,  नाक की लौंग माणिक सा चकाचौंध करनेवाली, लंबोत्तरा चेहरा, मुस्कुराहट पर हजार खुशियाँ कुर्बान हो जाए, बड़ी बड़ी कांच जैसी आंखें, नाक एकदम सधी हुई, लंबे केश, दो तीन लटें आनन पर यूं लटकती हुई मुख मंडल को ताबंयी रंग से आकर्षित कर रही थी। 
          अन्य छात्राओं के मुख से यकायक निकला "वाव!  अति सुंदर, " क्या कोई इतना सुंंदर भी हो सकता है? 
शबनम लगभग उछलते हुए बोली, " बहन तुम्हारा नाम क्या है?   पता नहीं?   पर तुम आज से मेरी दोस्त हो और मेरे पास ही बैठोगी। क्षमा का चेहरा आभा यक्त हो उठा। वो धीरे से बोली "हाँ हाँ क्यों नहीं, मैं तुम्हारी ही नहीं सबकी दोस्त हूँ और मेरा नाम क्षमा है"... 
अनामिका उन दिनों खाली समय में सेवा भाव की दृष्टि से दूरस्थ शिक्षा केंद्र में पढाने का कार्य कर रही थी। संयोगवश उस दिन, अनामिका ही उस दिन का कालांश ले रही थी। अनामिका के कहने पर कक्षा की सभी छात्राओं ने क्षमा का स्वागत तालियों की गड़गड़ाहट से किया। 
     क्षमा की खूबसूरती ने अनामिका को भी भीतर तक प्रभावित कर दिया। शीघ्र ही वह सब में घुल मिल गई। अनामिका ने पढाना शुरू किया•••• फाउंडेशन कोर्स की पुस्तक का एक पाठ••••"घरेलू हिंसाचार " जिसमें समस्त घरेलू हिंसाचार का जिक्र था। एक परिच्छेद पढाने के बाद उसपर चर्चा होने लगी। उस दिन के कालांश के बाद सभी छात्राओं ने अपने घर की ओर रुख किया।  पर क्षमा ने पुस्तकालय की ओर रूख किया। शायद उसे कुछ पुस्तक लेनी थी या फिर शायद, लाइब्रेरी कार्ड बनाना होगा। 
       परंतु अनामिका को कुछ अजीब सा लगा। उसने क्षमा का चेहरा पढने का प्रयास किया। पर कुछ देर दिमाग पर जोर देने के बाद सोचा, "मैं भी कितनी पागल हूँ, भला एक ही झलक और थोड़ी देर की मुलाकात में कैसे किसी के बारे में सोच सकती हूँ"इसी सोच विचार में अनामिका हेड ऑफिस की ओर तीव्रता से कदम बढने लगी। अभी तो उसका ध्यान क्षमा की तरफ था। पर यकायक उसे याद आया, " उसे आज आकाशवाणी में" महिलाओं की समस्या " पर प्रकाश डालना है और प्रोग्राम रिकॉर्ड करना है। 
       उसने पंच मशीन में अपना कार्ड पंच करते हुए बडे़ बाबू से कहा "गोगटे सर, " मेरा क्लास खत्म हो गया अब मैं जा रही हूँ अगला लैक्चर कब होगा आप मुझे मैसेज करके बता देना। और हाँ ऐसे समय में मेरा लैक्चर रखवाना आप, "जिससे मेरे कालेज का समय बाधित न हो"। 
ओके,  "मैडम••• तुम्ही टेंशन घेऊन का,  मी आहेत न...  मी तुम्हाला सांगते...। "
गोगटे सर अक्सर मराठी में ही बोला करते... 
भले किसी को समझे ना समझे। पर अनामिका को मराठी बहुत ही अच्छे से आती थी। इसलिए भी शायद गोगटे सर उससे मराठी में बात करते थे। 
अनामिका वहाँ से सीधे चर्चगेट चली गई आकाशवाणी वहाँ  उसका रिकॉर्डिंग जो था। रिकॉर्डिंग के बाद प्रसारण होने की तिथियों की जानकारी उन दिनों डायरेक्टर के पास ही मिलती थी। डायरेक्टर द्वारा मिली तिथि को डायरी में नोट करके अनामिका घर चली गई। इस बीच कई बार यूनिवर्सिटी में लैक्चर भी हुआ। अनामिका ने Notice किया की क्षमा अब पहले जैसी खुश नहीं दिखती। और  University से छुटने के बाद भी वह जल्दी घर नहीं जाती। बल्कि बाकी की छात्राएँ समय से पहले अनामिका का ध्यान आकर्षित करवा देतीं ताकि अगर विषय विषद हो तो उसके  बारे में चर्चा संक्षेप में हो सके। और वे समय पर घर पहूंच सकें। 
    एक दिन अनामिका ने University  में सबको अपने रेडियो में प्रसारित होने वाले कार्यक्रम को बताया और कहा "छात्राओं आप सभी कल मेरे  घरेलू हिंसाचार पर आधारित होनेवाले कार्यक्रम को सुन लेना। कल ही वह Broadcast होने वाला है " आप सभी शाम को 6:30  बजे अवश्य ही उस कार्यक्रम सुनना। आपके विषय पर आधारित है आपके कुछ प्रश्नों के उत्तर उसमें निहित मिलेंगे। 
       अगले व्याख्यान में सबने इस विषय पर चर्चा की परंतु क्षमा बहुत disturb लगी। अनामिका के बहुत पूछने पर भी उसने कोई जवाब नहीं दिया। ऐसे कई दिनों के आंख मिचौली के बाद क्षमा ने लैक्चर में बैठना बंद कर दिया। अनामिका ने उसकी सहेलियों से पूछा परंतु कुछ ज्यादा जानकारी हासिल न कर सकी। हाँ उसने what's up group  में अपनी अनामिका मैम को Congratulations अवश्य भेजा कि आपका कार्यक्रम बहुत अच्छा था। 
    अब अनामिका का अनुमान सच साबित होने लगा। एक दिन जब अनामिका चर्चगेट स्टेशन के Plateform number 2 पर बैठी थी कि अचानक वहाँ क्षमा इंद्रधनुषी रंग की तरह प्रकट हो गई। और अनामिका के पास बैठने कि इजाज़त मांगते हुए वहाँ बैठ गई और बिना कुछ कहे कहने लगी, "मैडम म्हारे को बचा लो मैडमजी, वरना म्हारे सुसराल वाले म्हारे को मार देवांग"। 
अनामिका हतप्रभ रह गई। क्षमा को दिलासा दिलाते हुए उसने कहा, " आप चिंता न करो क्षमा, पर आप अपनी समस्या सविस्तार हिंदी में समझाओ। 
अब क्षमा कहने लगी, " मैडम,  मैं All ready hisotry से graduate हूँ मैं आपसे शुरू में ही बताना चाहती थी पर सभी सहेलियों के सामने कहने की हिम्मत न जुटा सकी।  आप जब भी women changing of India पढाती थीं और उसको कोरिलेट  करके घरेलू हिंसाचार पढाती ं थीं तब मेरे उपर हो रहे हिंसाचार पर ध्यान चला जाता। आप सब मेरी सूरत को देखकर खुश हो जाते थे पर सरकस की जोकर की भांति मेरे चेहरे को कोई पढ न सका। मेरे माता पिता ने मेरे मामा के कहने पर उनके किसी रिश्तेदार के बेटे से शादी करवा दी यह बोलकर की लडका ग्रेजुएट है और एल आईसी में अकाउंटेंट है। मैं बहुत खुश थी। माँ ने एकबार पापा से कहा भी, "देखो जी एकबार ही सही पर सही ढंग से पता तो लगवा लो सब ठीक ठाक तो है लड़की को दुसरे के घर भेजना है"। पर पापा ने मां की एक न सुनी।,  " कहने लगे वो तुम्हारे भाई हैं क्षमा के मामा हैं धोखा क्यों करेंगे भला "  मैं तो शादी यहीं करूंगा लडके वाले  भी जल्दी में थे इसलिए शादी आनन फानन में हो गई। 
    मैडम शादी के बाद मुझे प्रताड़ित किया जाने लगा यह कहकर की अगर लडका नौकरी नहीं करता है तो तुम कर लो। स्यापा क्यों निकाल रही हो।  सास हमेशा बाड़मेर में रहती है कई बार तो ससुर ने अपने बेटे की कमजोरी बताकर मुझे गलत इशारे कर कर के कुछ समझाने का प्रयास किया। जब मैं समझ न सकी तब से ,वह जबरदस्ती पर उतर आया। अचानक आकर कभी मेरे पीठ पर हाथ रख देता है या लज्जाशील जगह पर हाथ रखते हुए कहता है तुम अपने आपको अकेले न समझो।" "मैम आपको बता नहीं सकती। मेरी जबान भी शरमा रही है कहते हुए। "पति को बताया पर उसे कुछ फर्क नहीं पड़ा। फिर एक दिन मेरे पडोसी की लडकी जो मुझसे मिलने आया करती थी उससे अपनी बात कह डाली। वह अचंभित रह गई। उसने ही एक अस्थायी हल निकाला। उसने मेरा एडमिशन आपके यूनिवर्सिटी में करवा दिया। ताकि दिनभर मेरा यहाँ गुजर जाए। इसलिए मैं लेक्चर के बाद भी लाईब्रेरी में रहती हूँ ताकि शाम को मेरा पति जब आवारागर्दी करके लौटे तब मैं उसके सामने ही जाऊं। "
मैडम आप मानवाधिकार की बात पढा रहीं हैं घरेलू हिंसाचार से बचने के उपाय बताती हैं क्या आप मुझे personally  मेरी मदद कर सकतीं है ं। प्लीज मैडम आप मुझे बचा लो वरना मेरा बुड्ढा ससुर मेरी इज्जत मिट्टी में मिला देगा और मेरा नकारा पति  कुछ न कर सकेगा.... 
अनामिका स्तब्ध रह गई। वह सोचने लगी दुनिया इतनी तीव्र गति से परिवर्तित हो रही है पर कुछ कुत्सित मानसिकता आज भी हमारे समाज में जड़ जमाए बैठी है ं। उसने मन ही मन फैसला किया कि वह क्षमा को कानूनी मदद दिलवाएगी। उसे ससुर रूपी राक्षस से आजाद करवाएगी। नकारे पति को जीवन की अनिवार्यता को समझाए। समझ गया तो ठीक अन्यथा तलाक तो है ही। वह एक स्त्री है अतः क्षमा के मर्म को समझते हुए है इस ओर कदम बढाऐगी। वह स्त्री है इसलिए स्त्री के  जीवन का विस्तार करेगी। अपने चला रही इस गुप्त मिशन को पूरा करेगी। स्थिति संभल गई तो ठीक,  वरना क्षमा को अपने पास रखेगी। उसे आत्मा निर्भर बनाएगी..... 



 













    

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Jadeja Rajdeepsinh