Social Stories Books in Hindi language read and download PDF for free

    भई यह दुनिया है दुनिया
    by Husn Tabassum nihan

    भई यह दुनिया है दुनिया सुभान भाई के घर से अलस्सुबह सयास ही दहाड़ मारू रूदन का सोता फूट पड़ा तो मोहल्ले वाले जान छोड़ कर दौड़े- ‘‘...क्या हुआ...क्या ...

    होने से न होने तक - 21
    by Sumati Saxena Lal

    होने से न होने तक 21. डाक्टर उदय जोशी लखनऊ आए थे तो उन्होने मीनाक्षी को सूचित किया था। वह उनसे मिलने गयी थी। जितने दिन भी वे रहे ...

    चिरनिद्रा
    by Pranava Bharti

    चिरनिद्रा ------------        डाकघर में बैठी वह अपनी निस्तेज आँखों को यूँ ही इधर उधर घुमाने लगी।युवा चेहरे कम थे, उसके जैसे भी कुछेक ही ,अधिक चेहरे ...

    सपनों की चादर
    by saba vakeel
    • 27

    एक साल पहले हिसाम अपने गांव में ही रहता था। दूसरे बच्चों की तरफ स्कूल जाता था। शाम को गिल्ली डंडा खेलता। दूसरे बच्चों को साइकिल चलाता देखता था ...

    किसी ने नहीं सुना - 14
    by Pradeep Shrivastava
    • 49

    किसी ने नहीं सुना -प्रदीप श्रीवास्तव भाग 14 अंदर जो हुआ वह मेरी कल्पना से परे था। जो बॉस पिछले पंद्रह वर्षों से मुझे छोटे भाई की तरह मानता ...

    पसंद अपनी अपनी - 3
    by किशनलाल शर्मा
    • 30

    "मै देखती हूं"।विमला पलंग से उठते हुए बोली।माँ के उठते ही वह पलंग पर लेट गई।वह अपनी सहेली निशा के घर गई थी।धूप और गर्मी की वजह से परेशान ...

    परीक्षायें
    by Chaya Agarwal
    • 2.1k

    कहानी -परीक्षायें छम..छम..छम..करती बिरजू के रिक्शे की आवाज दूर से सुनाई दे जाती है, जैसे वो कोई रिक्शा न होकर बैलगाड़ी की बैल हो। सजी-संवरी, साफ-सुथरी, नकली फूलों की लड़ियों ...

    ताई की बुनाई
    by Deepak sharma
    • 2.1k

    ताई की बुनाई गेंद का पहला टप्पा मेरी कक्षा अध्यापिका ने खिलाया था| उस दिन मेरा जन्मदिन रहा| तेरहवां| कक्षा के बच्चों को मिठाई बांटने की आज्ञा लेने मैं ...

    पापा का वो आखिरी ख़त
    by Kalyan Singh
    • 949

    वह  पापा का आखिरी ख़त था जिसमें   प्रिय  रवि , शुभार्शीवाद                       तुम्हारा पत्र मिला पढ़कर बहुत प्रसनन्ता हुई ...

    अंत
    by डिम्पल गौड़
    • 956

    अंत संकरे रास्ते से होते हुए आखिर मैं पहुँच ही गया उस जगह जिसे आम भाषा में बदनाम बस्ती कहा जाता है।टूटी- फूटी बदरंगी दीवारों से भी बदरंग था वहाँ ...

    प्रेम का बलिदान
    by JYOTI PRAKASH RAI
    • 913

    किसी चीज का त्याग कर देना कितना कठिन होता है यह अंदाजा लगा पाना बहुत ही मुश्किल होता है। यदि अपनी भाषा में कहू तो यह असंभव है और ...

    कुबेर - 36
    by Hansa Deep
    • 1.7k

    कुबेर डॉ. हंसा दीप 36 एक नया विचार था स्टॉक मार्केट की ओर ध्यान देने का। डीपी पढ़ने लगा, समझने लगा। डे ट्रेड की वर्कशॉप में भाग लिया और ...

    महामाया - 5
    by Sunil Chaturvedi
    • 1.9k

    महामाया सुनील चतुर्वेदी अध्याय – पांच ‘‘व्हाट इज यूअर नेम.....?’’ आश्रम की रिसेप्शन कुर्सी पर बैठे-बैठे ही स्वामी दिव्यानंद ने सामने खड़ी विदेशी महिला से पूछा। ‘‘काशा’’ ‘‘आऽऽशा’’ स्वामी ...

    देह की दहलीज पर - 13
    by Kavita Verma
    • (23)
    • 1.2k

    साझा उपन्यास  देह की दहलीज पर  संपादक कविता वर्मा लेखिकाएँ  कविता वर्मा  वंदना वाजपेयी  रीता गुप्ता  वंदना गुप्ता  मानसी वर्मा  कथाकड़ी 13  अब तक आपने पढ़ा :- मुकुल की उपेक्षा से ...

    ईस्ट इंडिया कम्पनी
    by PANKAJ SUBEER
    • 941

    ईस्ट इंडिया कम्पनी (कहानी - पंकज सुबीर) वे कुल जमा नौ थे, इसमें अगर दो बच्चों को भी जोड़ दिया जाए तो कुल संख्या ग्यारह हो जाती है। हालांकि ...

    होने से न होने तक - 20
    by Sumati Saxena Lal
    • 975

    होने से न होने तक 20. शशि अंकल मानसी की तरफ देख कर हॅसे थे, ‘‘तू क्यों विरोध कर रही है। मैंने तो सबसे पहले तेरा ही सब्जैक्ट चुना ...

    किसी ने नहीं सुना - 13
    by Pradeep Shrivastava
    • (15)
    • 1.9k

    किसी ने नहीं सुना -प्रदीप श्रीवास्तव भाग 13 कई बार मन संजना पर भी गया। फ़ोन करूं या न करूं मैंने इस असमंजस में रात में बारह बजे तक ...

    पसंद अपनी अपनी - 2
    by किशनलाल शर्मा
    • 1k

    "रोको,"उमेश के बांयी तरफ बैठा आदमी बोला था।ऑटो रुकते ही वह आदमी उतर गया।उसके उतर जाने पर हुई खाली जगह में उमेश खिसक गया था।   सड़क पर लोग आ ...

    22 वां घर राजमहल
    by Neelima Sharrma Nivia
    • 1k

    २२ वां घर / राजमहल नीलिमा शर्मा    आप सबको मेरा प्रणाम | बहुत दिन से आप मूड्स ऑफ़ लॉकडाउन  की कहानियाँ पढ़ रहे हैं  और मैं ख़ामोशी से इन सब ...

    कुबेर - 35
    by Hansa Deep
    • 1.7k

    कुबेर डॉ. हंसा दीप 35 और अब डीपी के उन आँसुओं को मुक्ति मिली जो इतने दिनों से अंदर ही अंदर एक दूसरे से जूझ रहे थे। इस संकट ...

    कोपभवन
    by Renu Yadav
    • 1.9k

    “चार दिन से घर में चूल्हा नाहीं जला, बच्चे भूख से बिलबिला रहे हैं । उ तो रामनयना क माई खाना दे जात है त बच्चे आपन परान जियावत ...

    आँसरिंग मशीन
    by PANKAJ SUBEER
    • 1k

    आँसरिंग मशीन (कहानी - पंकज सुबीर) ‘‘घिन आती है मुझे इन सबसे’’ सुदीप का स्वर काफी हिकारत से भरा हुआ था। ‘‘क्यों ...? इसमें घिन की क्या बात है, ...

    स्वीच ऑफ
    by विनीता परमार
    • 1.5k

    कैंटीन से ठहाकों की गूँज सुनाई दे रही है । वैसे आमतौर पर यहाँ गहरी उदासी ही पसरी रहती है । यहाँ बिकनेवाली सारी चीजों को पता है कि ...

    फिरोजी रेखाओं के नीड़
    by Husn Tabassum nihan
    • 1.1k

    फिरोजी रेखाओं के नीड़ प्रेम हमेशा स्थिर नहीं रहता। यह चंद्रमाओं की कलाओं की तरह घटता रहता है...बढ़ता रहता है। ‘‘ बादल, वो देखो दूर क्षितिज पर झुका जा ...

    होने से न होने तक - 19
    by Sumati Saxena Lal
    • 1.1k

    होने से न होने तक 19. घर के सामान में काफी चीज़े ख़तम हो गयी हैं। कुछ मैचिंग रूबिया भी लेने हैं सो शापिंग के लिए हज़रतगंज चली गई ...

    किसी ने नहीं सुना - 12
    by Pradeep Shrivastava
    • (13)
    • 1.8k

    किसी ने नहीं सुना -प्रदीप श्रीवास्तव भाग 12 बातों ही बातों में उसने डिनर का भी ऑर्डर दे दिया था। जिसमें मेरी पसंद भी उसने पूछी थी। खाना सब ...

    महामाया - 4
    by Sunil Chaturvedi
    • 1.7k

    महामाया सुनील चतुर्वेदी अध्याय – चार भोजनशाला में अखिल की अनुराधा से मुलाकात हुई। दोनों बहुत देर तक भोजनशाला में ही खड़े-खड़े बतियाते रहे। सामान्य परिचय से शुरू हुई ...

    मुमताज़
    by मालिनी गौतम
    • 2.2k

    मुमताज “सादिक”......मालिशवाली बाई मुमताज़ की बारीक और तीखी-सी आवाज़ ओटले के खुले हुए दरवाज़े पर गूँजी । उस आवाज़ को सुनते ही बगीचे की नर्म धूप में अपने पालने में ...

    गुच्चू गरिया
    by Mahendra Bhishma
    • 1.3k

    गुच्चू गरिया गुच्चू मेरे ननिहाल के पास के गाँव गरिया का रहने वाला था। बचपन के उन दिनों में जब मैं ग्रीष्म की लंबी छुट्टियों में या दशहरा दिवाली ...

    देह की दहलीज पर - 12
    by Kavita Verma
    • (24)
    • 1.5k

    साझा उपन्यास  देह की दहलीज पर  संपादक कविता वर्मा लेखिकाएँ  कविता वर्मा  वंदना वाजपेयी  रीता गुप्ता  वंदना गुप्ता  मानसी वर्मा  कथा कड़ी 12 अब तक आपने पढ़ा :- मुकुल की ...