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    बेनज़ीर - दरिया किनारे का ख्वाब - 12
    by Pradeep Shrivastava

    भाग - १२ ' जीवन, दुनिया की खूबसूरती देखने का आपका नजरिया क्या है?' 'अब नजरिया का क्या कहूं, मैं जल्द से जल्द सब कुछ बदलना, देखना, चाहती थी। ...

    कच्ची डगर....
    by Dr Vinita Rahurikar

    आज खाना बनाते हुए सीमा के मन में विचारों की तरंगे उठ रही थी रह-रहकर। पिछले कई दिनों से वह देख रही थी उसकी किशोर वय बेटी श्वेता उसके ...

    बिटवा आ गवा... लॉकडाउन
    by Sunita Bishnolia

        पूनम की रात में जवान होने को आतुर चाँद को एकटक देखती रजनी के देखते ही देखते चाँद आसमान में अपनी आभा बिखरे चुका था। लंबे समय ...

    चिराग़-गुल
    by Deepak sharma

    चिराग़-गुल बहन की मृत्यु का समाचार मुझे टेलीफोन पर मिला. पत्नी और मैं उस समय एक विशेष पार्टी के लिए निकल रहे थे. पत्नी शीशे के सामने अपना अन्तिम ...

    काला धन
    by राज कुमार कांदु

    मैं घर से दूकान की तरफ जा रहा था । सुबह का खुशनुमा मौसम था । सडकों पर शोर शराबा लगभग नहीं होता है । अपनी धुन में चलते ...

    कालचक्र
    by श्रुत कीर्ति अग्रवाल

    कालचक्र उस दिन अचानक आशीष का फोन आया। न जाने कितने समय बाद उसकी आवाज़ कान में पड़ी थी। ये मेरे इकलौते बेटे की आवाज़ थी... उस बेटे की, जिसे ...

    इमली की चटनी में गुड़ की मिठास - 7
    by Shivani Sharma

    भाग-7 चन्द्रेश ने लौटते समय उसकी कार में चलने का आग्रह किया।पहले तो शालिनी झिझकी पर फिर उसे लगा चन्द्रेश के साथ थोड़ा सा और वक्त बिताने को मिल ...

    बेनज़ीर - दरिया किनारे का ख्वाब - 11
    by Pradeep Shrivastava

    भाग - ११ मैं घूमना चाहती थी। खूब देर तक घूमना चाहती थी। रास्ते भर कई बार मैंने बहुत लोगों की तरफ देखा कि, लोग मुझे देख तो नहीं ...

    तीसरे लोग - 7
    by Geetanjali Chatterjee

    7. ट्रैन शायद किसी बड़े जंक्शन पर रुकी थी। किसना की अंतड़ियां मारे भूख और प्यास के सिकुड़ गई थी। जेब में पैसे तो थे, पर उतरने की हिम्मत ...

    जगत बा
    by Neelam Kulshreshtha

    जगत बा [ नीलम कुलश्रेष्ठ ] कुछ बरस पहले मैंने अपने सरकारी घर के पीछे के कम्पाउंड में खुलने वाला दरवाज़ा खोला था, देखा वे हैं -बा, दो कपडों ...

    सुलझे...अनसुलझे - 17
    by Pragati Gupta

    सुलझे...अनसुलझे बेशकीमती रिश्ते -------------------- ‘छोटे बच्चों को मनाना कितना आसान होता है न मैडम| ज्यों-ज्यों ये बच्चे बड़े होते जाते है, उतना ही इनको मनाना मुश्किल का सबब बनता ...

    लता सांध्य-गृह - 8
    by Rama Sharma Manavi

          पूर्व कथा जानने के लिए पिछले अध्याय अवश्य पढ़ें।   आठवां अध्याय-----------------  गतांक से आगे….  ---------------   शोभिता की कक्ष साथी थीं विमलेश जी,पैंसठ वर्षीया, रिटायर्ड प्रधानाध्यापिका।   स्नातक ...

    लहराता चाँद - 28
    by Lata Tejeswar renuka

    लहराता चाँद लता तेजेश्वर 'रेणुका' 28 कुछ महीने बीत गए। अनन्या अपनी जिंदगी में व्यस्त हो गई। अवन्तिका के कॉलेज में आखिरी साल भी खत्म हो चुका था। महुआ ...

    मिशन सिफर - 14
    by Ramakant Sharma

    14. पता नहीं वह कितनी देर तक सोता रहा था। खिचड़ी लेकर आई नुसरत ने ही उसे उठाया था और पूछा था – “अब कैसा लग रहा है?” “बुखार ...

    एक दुनिया अजनबी - 11
    by Pranava Bharti

    एक दुनिया अजनबी 11- एक झौंका जीवन की दिशा पलट देता है, पता ही नहीं चलता इंसान किस बहाव में बह रहा है| आज जिस पीने-पिलाने को एक फ़ैशन समझा जाता ...

    पत्थर की मूरत
    by राज कुमार कांदु

    छमाही इम्तिहान के नतीजे घोषित हो चुके थे । कमल को सत्तर प्रतिशत अंक मिले थे । अपने इस प्रदर्शन से वह स्वयं ही काफी निराश था । लेकिन ...

    आ अब लौट चलें
    by Abdul Gaffar

    आ अब लौट चलें। (कहानी)लेखक - अब्दुल ग़फ़्फ़ार उस समय मैं दिल्ली में पढ़ाई कर रहा था जब धर्मा के मरने की ख़बर मिली। उसे गेहुअन सांप ने डंस लिया था। ...

    अपने-अपने कारागृह - 11
    by Sudha Adesh

    अपने-अपने कारागृह-10  थोड़ी ही देर में ही अपनी जगह पर आकर विमान रुक गया ,.। विमान का गेट खुलते ही यात्री एक-एक करके उतरने लगे । गेट पर परिचारिका हाथ ...

    मिरगी
    by Deepak sharma

    मिरगी उस निजी अस्पताल के न्यूरोलॉजी विभाग का चार्ज लेने के कुछ ही दिनों बाद कुन्ती का केस मेरे पास आया था| “यह पर्ची यहीं के एक वार्ड बॉय ...

    नई दिशा
    by Sudha Adesh

    नई दिशा     ‘ मेरी मृत्यु के पश्चात् मेरा शरीर दान कर दिया जाये ।’ अमित शंकर की इस कथन को सुनकर जहाँ सचिन तथा चेतना अवाक् रह गये वहीं ...

    BOYS school WASHROOM - 10
    by Akash Saxena

    ""सुनो प्रज्ञा मै समझता हूँ तुम्हे क्या महसूस हो रहा है और मै भी वही महसूस कर रहा हूँ जो तुम महसूस कर रही हो, लेकिन मेरी तरह तुम्हें ...

    मुझे पंख दे दो
    by Ila Singh

    मुझे पंख दे दो।*************घड़ी की तरफ नजर गई तो चौंक उठी ,अरे साढ़े दस बज गए ;आशा नहीं आई अभी तक ,आसमान तो एकदम साफ है ,बारिश के  कोई ...

    तीसरे लोग - 6
    by Geetanjali Chatterjee

    6. स्मारक इन दिनों ज्यादा से ज्यादा वक्त अस्पताल में मरीजों के बीच ही बिताने की चेष्टा करता। घर लौटने के समय का कोई ठिकाना नहीं था। आज बड़-सावित्री ...

    सुलझे...अनसुलझे - 16
    by Pragati Gupta

    सुलझे...अनसुलझे बहुत मुश्किल नहीं ----------------------- मैं उस रोज बहुत सवेर-सवेरे अपने सेंटर पर आ गई थी| मुझे अंदाजा था कि सेंटर पर मरीजों की संख्या, और दिनों के अपेक्षा ...

    लहराता चाँद - 27
    by Lata Tejeswar renuka

    लहराता चाँद लता तेजेश्वर 'रेणुका' 27 अनन्या की जिंदगी खौफ से निकल कर साधारण होने लगी थी। संजय और अवन्तिका का जन्मदिन एक ही महीने में आता है। इसलिए ...

    इमली की चटनी में गुड़ की मिठास - 6
    by Shivani Sharma

    भाग-6 शालिनी ने एक नज़र घड़ी पर डाली फिर कमरे का मुआयना किया। सामने अर्ध गोलाकार दीवार पर बणी-ठणी की बड़ी सी पेंटिंग लगी थी और उसके नीचे ही ...

    बेनज़ीर - दरिया किनारे का ख्वाब - 10
    by Pradeep Shrivastava

    भाग - १० पिछली बार की तरह दरवाजे की आड़ में नहीं गई, लेकिन अम्मी की आड़ में जरूर बैठी रही। अम्मी ने उसे शुक्रिया कहा तो मुन्ना ने ...

    एक दुनिया अजनबी - 10
    by Pranava Bharti

    एक दुनिया अजनबी 10- पिता के न रहने से प्रखर को जीवन की वास्तविकता आँखें खोलकर देखनी पड़ी |दो युवा होते बच्चों का पिता अहं में पहले ही ज़मीन से बहुत दूर जा ...

    मिशन सिफर - 13
    by Ramakant Sharma

    13. वह घर पहुंचा तो बेहद थका हुआ महसूस कर रहा था। काश, नुसरत इस समय उसे एक कप चाय बना कर पिला जाती। वह इस समय खुदा से ...

    जर्जर आधार
    by Ramnarayan Sungariya

    कहानी--                                 जर्जर आधार                                                   ...